बदले दौर में चेक करें अपना रुटीन

कोरोना महामारी के दौर में बहुत कुछ बदल गया है। लंबे समय तक स्कूल-दफ्तर बंद होने के कारण बच्चों के साथ-साथ बड़ों का भी रुटीन बदल गया। रमेश शर्मा एक रिटायर्ड व्यक्ति हैं। वह सुबह 6 बजे उठकर नित्यकर्मों से निवृत्त होकर वॉक करने जाते थे। घर आने पर पोते-पोती स्कूल के लिए तैयार मिलते थे। फिर वह उन्हें स्कूल बस में छोड़ने जाते थे। लेकिन जब से लॉकडाउन लगा उनका और बच्चों का रुटीन ही बदल गया। अब शर्मा तो धीरे-धीरे अपने रुटीन पर आ रहे हैं, लेकिन घरवालों का कामकाज अभी ढर्रे पर नहीं आ पाया है। जानकार कहते हैं कि परिस्थिति कैसी भी हो, रुटीन नहीं बदलना चाहिए। यदि वॉक करने पर पावंदी लगी थी तो लोगों को अपने घर-आंगन में ही टहलना चाहिए। बच्चों को भी सुबह उठने का अभ्यास बनाये रखना चाहिए। सुबह जल्दी उठना फायदेमंद : एक अध्ययन में भी यह पाया गया कि जिन लोगों में आनुवांशिक रूप से सुबह जल्दी उठने की आदत होती है, उनका मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर हो सकता है और सिजोफ्रेनिया तथा अवसाद जैसे मनोविकारों को लेकर वह कम जोखिम के दायरे से बाहर होते हैं। लेकिन सुबह जल्दी उठने का मतलब है कि रात में जल्दी सोकर नींद पूरी कर ली हो। इस बारे में किए गए एक अध्ययन में ‘बॉडी क्लॉक’ को लेकर कुछ अंदरूनी खुलासे हुए हैं और इस पर प्रकाश डाला गया है कि यह मानसिक स्वास्थ्य और बीमारियों से कैसे जुड़ा है। कई लोगों की दिनचर्या के हिसाब से यह अध्ययन किया गया और कहा गया कि रात में जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठना स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है। ऑनलाइन गेम की लत न लगे जानकार कहते हैं कि ऑनलाइन गेमिंग की लत बहुत नुकसानदायक हो सकती है। लॉकडाउन के समय में बच्चों को इसकी बहुत लत लग गयी थी। जानकारों का कहना है कि ऐसी लत के दोहरे नुकसान हैं। एक तो जिस मोबाइल पर बार-बार ऑनलाइन गेम्स डाउनलोड होते हैं, उस पर हैकर्स की नजर रहती है। दूसरे बच्चों को तनाव भी बढ़ता है। जानकारों का कहना है कि अगर आपका स्मार्टफोन अचानक धीमा होने लगे गया है, गर्म होने लगे या बैट्री जल्द खत्म होने लगे तो हो सकता है कि क्रिप्टो करेंसियों की ‘माइनिंग’ में उसे इस्तेमाल किया जा रहा हो। सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस नए तरह के साइबर हमले को ‘क्रिप्टोजैकिंग’ का नाम दिया है। इसलिए मोबाइल पर ज्यादा देर रहने की लत न तो खुद को लगाइये और न बच्चों को लगने दीजिए। लूडो या कैरम खेलें जानकार कहते हैं कि पूरे परिवार को एक साथ मिलकर लूडो या कैरम खेलना चाहिए। या फिर कोई ऐसा गेम जिसमें न तो मोबाइल का इस्तेमाल हो और न कोई इंटरनेट का झंझट हो। आंगन में भी कुछ खेला जा सकता है। अब तो परिवार सहित वॉक पर जाने या रेस लगाने जैसे व्यायाम वाले गेम भी खेले जा सकते हैं। - फीचर डेस्क

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