बदतर नर्सिंग होने पर बहाना नहीं चलेगा

पुष्पा गिरिमाजी

मुकम्मल नर्सिंग सेवा उपलब्ध नहीं कराने के लिए क्या मैं एक अस्पताल को जिम्मेदार ठहरा सकता हूं। कैंसर पीड़ित मेरी पत्नी इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती थी। खराब नर्सिंग देखभाल के चलते उनमें कई और जटिलताएं आ गईं और अंतत: उनकी मौत हो गई। मेरी शिकायत के जवाब में अस्पताल ने अयोग्य नर्सिंग स्टाफ को इस समस्या के लिए दोषी तो ठहराया, लेकिन इसके साथ ही अस्पताल ने निजी नर्स को रखने की अनुमति के लिए मेरे अनुरोध को ठुकरा दिया था। क्या अस्पताल के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत मैं शिकायत दर्ज करा सकता हूं? आपके सवाल से यह बहुत स्पष्ट नहीं हो रहा है कि आपकी पत्नी को ज़रूरी नर्सिंग देखभाल उपलब्ध कराने में अस्पताल विफल रहा या फिर जो जटिलताएं उनमें आईं, उसका कारण उपलब्ध कराए गए नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही थी। मामला जो भी हो, अस्पताल निश्चित तौर पर जि़म्मेदार है। मान लीजिए यदि मरीजों की देखरेख करने के लिए अस्पताल में पर्याप्त संख्या में नर्सिंग स्टाफ नहीं है, जिसके कारण सेवाओं में कमी आई, तो पर्याप्त बुनियादी ढांचा या स्टाफ उपलब्ध नहीं कराने के लिए अस्पताल दोषी है। वह तब भी लापरवाही का दोषी है, यदि उसने अयोग्य नर्सों को नियुक्त किया हो। यहां तक कि अगर यह पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा लापरवाही का मामला है, तब भी अस्पताल जवाबदेह है क्योंकि नियोक्ता के रूप में अस्पताल अपने कर्मचारियों की लापरवाही के लिए जिम्मेदार है। हरजोत आहलूवालिया बनाम स्प्रिंग मीडोज अस्पताल (1994 के ओपी नंबर 292, दिनांक 16 जून, 1997 का आदेश ) के मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्पष्ट किया कि अपने कर्मचारियों-मेडिकल और पैरा मेडिकल, की लापरवाही के मामले में अस्पताल निश्चित तौर पर जिम्मेदार है। इस मामले में नर्स द्वारा क्लोरोफेनिकॉल की जगह क्लोरीन की हाई डोज दिए जाने से नौजवान हरजोत के दिमाग की कोशिकाओं को स्थायी तौर पर नुकसान पहुंचा। इसके लिए अस्पताल को जिम्मेदार ठहराया गया। कृपया आगे बढ़कर शिकायत दर्ज कराएं। याद रखें कि आपको मेडिकल रिकॉर्ड और विशेषज्ञ की राय के जरिये अपनी बात को सिद्ध करना होगा कि खराब पैरामेडिकल सेवा के कारण आपकी पत्नी में जटिलताएं आईं और उनकी मौत हो गयी।

क्या आप किसी केस का हवाला दे सकते हैं जो मुआवजे के दावे में मेरी मदद कर सके ?

पुष्पा गिरिमाजी

कमांडेंट बेस अस्पताल (सेना), दिल्ली कैंट और अन्य बनाम विंग कमांडर केके चौधरी (सेवानिवृत्त) (वर्ष 2008 के आरपी नंबर 3247, आदेश की तिथि 2 फरवरी 2009) के मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के आदेश ने मरीजों की देखभाल में पैरामेडिकल सेवाओं के महत्व को स्थापित किया। असल में इस केस में शिकायतकर्ता की पत्नी की मौत के मामले में पैरामेडिकल सेवाओं की कमी को लेकर कोई सबूत नहीं था। हालांकि इस बात के सबूत थे कि नर्सिंग देखभाल की बेहद जरूरत के बावजूद उन्हें यह सुविधा नहीं मिली। इस आधार पर उपभोक्ता अदालत ने अस्पताल को सेवा में कमी का दोषी पाया और शिकायतकर्ता को मुआवजा दिया गया। यहां शिकायत यह थी कि शिकायतकर्ता की पत्नी लिवर सिरोसिस से पीड़ित थी। वह पूरी तरह बिस्तर पर थी और अपनी देखभाल करने की स्थिति में नहीं थी, इसके बावजूद उन्हें अस्पताल मे 5 से 8 दिसंबर 2003 तक भर्ती रहने के दौरान बेहद जरूरी नर्सिंग सेवा उपलब्ध नहीं कराई गयी, वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। शिकायतकर्ता ने कहा कि बेस अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ की कमी के चलते, उन्होंने अपनी बेटी को उसकी मां के साथ रहने और देखभाल करने की अनुमति देने के लिए ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर से विशेष अनुमति ली थी। हालांकि, उनकी मृत्यु की रात, उनका इलाज करने वाले गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट ने उनकी बेटी को उनके साथ रहने की इजाजत नहीं दी और मृत्यु के समय पत्नी के साथ कोई नहीं था। यहां आयोग ने देखा कि मरीज मरणासन्न हालत में थी और उनके ठीक होने की कोई संभावना नहीं थी। साथ ही इस बात का भी कोई सबूत नहीं था कि उनकी मौत मेडिकल लापरवाही के कारण हुई, फिर भी यह अस्पताल का कर्तव्य था कि ऐसे नाजुक बीमार व्यक्ति को 24 घंटे नर्सिंग सेवा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करे, जो नहीं किया गया। यदि अस्पताल में नर्सों की कमी थी तो अस्पताल को रात में रुकने के लिए उनकी बेटी को अनुमति दे देनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसलिए आयोग ने निचली उपभोक्ता अदालतों के दृष्टिकोण को बरकरार रखा कि शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा, आघात और उत्पीड़न के लिए मुआवजा दिया जाना चाहिए। हालांकि निचली उपभोक्ता अदालतों द्वारा मुआवजे के तौर पर तय की गयी 50 हजार रुपये की रकम को राष्ट्रीय आयोग ने घटाकर 25 हजार रुपये कर दिया। आपका केस इससे थोड़ा सा अलग है। आप खराब गुणवत्ता वाली नर्सिंग या नर्सिंग देखभाल की कमी की कड़ी को जोड़ते हुए मामले को सिद्ध कर सकते हैं, जिसके चलते आपकी पत्नी में जटिलताएं आईं और अंतत: उनकी मौत हो गयी।

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