बढ़ गया काका का ‘कद’

जींद उपचुनाव के नतीजों ने ‘खट्टर काका’ के राजनीतिक कद को काफी बढ़ा दिया है। तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान में कांग्रेस की जीत के बावजूद काका ने हरियाणा में कांग्रेस को उभरने नहीं दिया है। उपचुनाव में काका की अंदरूनी रणनीति इतनी कारगर सिद्ध हुई कि विरोधियों को मुंह की खानी पड़ी। उम्मीदवार के चयन को लेकर काका के ‘एकतरफा’ फैसले पर सरकार के कई मंत्री और विधायक भी अंदरखाने सवाल उठा रहे थे। भितरघात का भी खतरा बताया गया था, लेकिन नतीजों ने साफ कर दिया कि काका का फैसला सही था। बेशक, इसे विटामिन ‘पी’ और ‘बिरादरी के जनेऊ’ से जोड़कर देखा जाए, लेकिन राजनीतिक तौर पर काका ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। वे गैर-जाट को एकजुट करने में भी सफल रहे और प्रदेश के पंजाबियों के सबसे बड़े नेता भी बनकर उभरे हैं। अब कुछ भाजपाई भाई लोगों को नतीजे रास आएं या नहीं, यह अलग बात है। वाह री सरकार ‘खट्टर काका’ की सरकार का भी जवाब नहीं है। पिछले वर्ष संजयलीला भंसाली की फिल्म पद्मावत को लेकर इतना बड़ा बवाल हुआ और सरकार भी इससे बच नहीं सकी। काका के मंत्रियों ने खुलकर फिल्म को लेकर बयान दिए। अब इसी विवादित फिल्म को सरकार ने सूरजकुंड के अंतर्राष्ट्रीय क्रॉफ्ट मेले में दिखाने का फैसला लिया है। यही नहीं, फिल्म के नायक रणवीर सिंह और नायिका दीपिका पादुकोण को भी मेले में आमंत्रित किया गया है। सरकार का यह फैसला सुर्खियों में है। अब सरकार तो सरकार है, जब चाहे विरोध करे और जब चाहे समर्थन, उसकी मर्जी। रॉक स्टार को चाहिए सुरक्षा हरियाणा सरकार में ‘एक और सुधार’ कार्यक्रम के निदेशक और खट्टर सरकार के रॉक स्टार यानी रॉकी मित्तल को अब जान का खतरा है। वे खुद ही यह बात बताते फिर रहे हैं। कहते हैं, मैंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिद्धू के खिलाफ गाना गाया है, इसलिए मेरी जान को खतरा है। यही नहीं, रॉक स्टार तो यहां तक कह रहे हैं कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। अब जनाब ने जेड सुरक्षा की मांग शुरू कर दी है। कहने वाले कह रहे हैं कि जेड नहीं तो अगर वाई सुरक्षा भी साहब को मिल जाए तो हैरानी की बात नहीं है। साइकिल वाले प्रधानजी कांग्रेस के साइकिल वाले प्रधानजी यानी अशोक तंवर को न चाहते हुए भी अब जींद उपचुनाव में हार की नैतिक जिम्मेदारी लेनी होगी। साहब अपनी पार्टी के उम्मीदवार रणदीप सुरजेवाला की जीत के प्रति इस कदर आश्वस्त थे कि मतदान के अगले ही दिन चंडीगढ़ पहुंच मीडिया के सामने दावा कर दिया था। यही नहीं, यह भी कह दिया था कि चुनाव जीत गए तो श्रेय सभी को जाएगा और हारने की जिम्मेदारी उनकी होगी। इससे भी बड़ी बात उन्होंने यह कही थी कि पार्टी के सभी नेताओं ने एकजुटता और ईमानदारी के साथ चुनाव में काम किया। ऐसे में अब दूसरे नेताओं पर भितरघात के आरोप भी नहीं लग सकेंगे। कांग्रेस में बढ़ेगा घमासान जींद उपचुनाव में सुरजेवाला की हार के साथ ही कांग्रेस में घमासान तेज होने का मैदान भी तैयार हो गया है। जिस तरह से उपचुनाव में सुरजेवाला और तंवर की नयी ‘जोड़ी’ उभर कर सामने आई थी, अब इस जोड़ी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। तंवर विरोधी खेमा अब और आक्रामक होगा। इसकी शुरुआत हो भी चुकी है। कांग्रेस के करीब एक दर्जन विधायक पार्टी के नवनियुक्त प्रभारी गुलाम नबी आजाद से मुलाकात कर तंवर को हटाकर उनकी जगह पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा को कांग्रेस की कमान सौंपने की मांग कर चुके हैं। नतीजों के बाद यह मांग बढ़ेगी और कांग्रेसियों की गुटबाजी भी सिर चढ़कर बोलेगी। मियां-बीवी की जोड़ी जींद उपचुनाव के नतीजों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का कद तो बढ़ाया ही है, साथ ही मिया-बीवी की जोड़ी भी उपचुनाव में कम सुर्खियों में नहीं रही। मुख्यमंत्री के मीडिया एडवाइजर राजीव जैन और उनकी पत्नी व कैबिनेट मंत्री कविता जैन द्वारा जींद में की गई मेहनत हर किसी की जुबान पर है। राजीव ने तो नामांकन-पत्र जमा करवाने के दिन से लेकर मतदान तक जींद में ही डेरा डाले रखा। इसी तरह से कैबिनेट मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा, विपुल गोयल, कृष्णलाल पंवार व कृष्ण बेदी के काम की भी भाजपा गलियारों में चर्चा हो रही है। दादा बने चाणक्य महेंद्रगढ़ वाले दादाजी यानी रामबिलास शर्मा का गणित भी उपचुनाव में कारगर साबित हुआ। उन्हें हरियाणा की राजनीति का ‘चाणक्य’ कहा जाने लगा है। कांग्रेस ने जब रणदीप सुरजेवाला को टिकट दिया तो सबसे पहले दादा ने सांघी वाले ताऊ के साथ बातचीत में चुटकी लेते हुए कह दिया था कि हुड्डा साहब आपका कांटा तो निकल गया। बेशक, उस समय इस बात को केवल मजाक में लिया गया हो, लेकिन इसके पीछे के गंभीर मायने अब नतीजों में देखने को मिले हैं। कुल मिलाकर सुरजेवाला की सियासत को बड़ा झटका उपचुनाव ने दिया है। भाजपा प्रत्याशी कृष्ण मिड्ढा के लिए 25 फरवरी को जींद में की गई रैली में पंडितजी का भाषण सुर्खियों में रहा था। उन्होंने एक बटन से 3 निशाने साधने वाली बात क्या कही कि इसे जाट और गैर-जाट की राजनीति से ही जोड़कर देखा गया। नतीजों ने भी स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। आखिर में बजट प्रदेश की खट्टर सरकार अब अपने मौजूदा कार्यकाल के पांचवें और आखिरी बजट की तैयारियों में जुट चुकी है। बजट पूरी तरह से चुनावी रंग में रंगा नज़र आएगा। किसानों-मजदूरों, कर्मचारियों के अलावा समाज के कई वर्गों को बजट में बड़ी राहत मिलने के आसार हैं। इस बजट पर प्रदेशभर के लोगों की निगाहें हैं। बहरहाल, सरकार जींद की जीत के जश्न में मग्न है। यह जश्न अगले कई दिनों तक चलने वाला है और विरोधियों के पास अब सोचने के अलावा कुछ बचा नहीं है।

-दिनेश भारद्वाज

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