बच्चों की जगह रोबोट भी जा सकेगा स्कूल

कुमार गौरव अजीतेन्दु

ज़रा सोचो कि तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं और तुमको अपनी जगह अपने रोबॉट को क्लास में भेजने की सुविधा मिल जाए तो? है न मजेदार बात! कुछ ऐसा ही करने की सोच पर काम चल रहा है जापान में। प्रोजेक्ट पर काम कर रहे वैज्ञानिकों के अनुसार—छात्र की जगह रोबॉट को क्लास में भेजा जा सकेगा। छात्र हॉस्पिटल या घर से टेबलेट की मदद से उसे कंट्रोल कर सकेंगे। रोबॉट कैमरे से कक्षा में बताई गई बातें स्टूडेंट से लाइव साझा करेगा। वे नोट भी बना सकेंगे और लेक्चर समझ सकेंगे। फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। प्रयोग सफल होने पर इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत टोक्यो के बॉर्डर पर स्थित तोमोबे हिगाशी स्पेशल सपोर्ट स्कूल से की गई है। रोबोट का नाम ऑरी है। स्टूडेंट की अनुपस्थिति में ऑरी को डेस्क पर रखा जाएगा। इसके दो हाथ हैं। माथे पर कैमरा लगा है, जो क्लास की एक्टिविटी को लाइव स्टूडेंट तक पहुंचाता है। इसे टेबलेट की मदद से कंट्रोल किया जाता है। हाल ही में इसका सफल प्रयोग भी किया गया है। इसमें स्पीकर लगाए गए हैं, जिसकी मदद से स्टूडेंट जो कुछ घर से ही बोलेगा, उसे क्लास में रोबोट ऑडियो के रूप में जारी करेगा। घर पर बैठे-बैठे रोबोट को अलग-अलग दिशाओं में मोड़ा भी जा सकता है। क्लास में टीचर की बातों के आधार पर रोबोट इमोशन भी जाहिर करता है। जैसे कुछ पसंद आने पर यह ताली बजाता है, हाथ से इशारा करता है और हाय-हैलो भी करता है। स्कूल की प्रिंसिपल नोबोरू ताची के मुताबिक, बच्चे बेहद आसानी से ऑरी को कंट्रोल कर सकते हैं। यह उनके लिए क्लास अटेंड करने जैसा है। हम लोग इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने पर फोकस कर रहे हैं। इसे तैयार करने वाली कंपनी के सीईओ केंटरो योशीफुजी 10 और 14 साल की उम्र में बीमारी के कारण स्कूल नहीं जा पाए थे। इसीलिए उन्होंने ऐसा रोबोट तैयार किया जो ऐसे बच्चों की मदद कर सके।

डेवलप हुआ एआई टूल अब दृष्टिबाधित भी मीम्स का आनंद ले सकेंगे सोशल मीडिया पर मीम्स का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है लेकिन दृष्टिबाधित लोग इनका आनंद नहीं उठा पाते। उन्हें मीम को न सिर्फ देखने-समझने में परेशानी होती है बल्कि इसे स्क्रीन रिकॉर्डर सॉफ्टवेयर की मदद से समझ पाना भी बेहद मुश्किल होता है। इसी समस्या से निपटने के लिए अमेरिका स्थित कार्नेगी मेलोन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बेस्ड एआई टूल डेवलप किया है, जिसकी मदद से दृष्टिबाधित लोग भी मीम्स का आनंद ले सकेंगे। यह टूल न सिर्फ खुब-ब-खुद मीम की पहचान करेगा बल्कि उसे प्री-रिटर्न टेम्पलेट में कन्वर्ट कर उसमें अल्ट टेक्स्ट जोड़ेगा ताकि मौजूदा सहायक टेक्नोलॉजी की मदद से उन्हें समझा जा सके। ह्यूमन-कम्प्यूटर इंटरेक्शन इंस्टीट्यूट के पीएचडी स्टूडेंट कोल ग्लीसन का कहना है कि बेसिक कम्प्यूटर विज़न तकनीक में हर मीम का विवरण देने की सुविधा मिलती है, चाहे वे किसी सेलिब्रिटी की हो, रोते हुए बच्चे की हो या कार्टून कैरेक्टर की हो। पब्लिश की गई स्टडी के मुताबिक, ऑप्टिकल रिकॉग्निशन तकनीक की मदद से इमेज पर इस्तेमाल किए गए टेक्स्ट को समझने में मदद मिलती है जो मीम की यात्रा के साथ बदलता रहता है। मीम्स वो इमेज होती है, जिन्हें कॉपी कर उनके टेक्स्ट में एडिट कर दिया जाता है। यह खासतौर से हास्यापद और एक्सपीरियंस शेयर करने वाली होती है। अल्टा टेक्स, वह नाम होता है, जो इमेज को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते समय फोटो को दिया जाता है। इसकी मदद से ब्राउशर को तस्वीर सर्च करने में सुविधा होती है। सर्च इंजन इसी अल्ट टेक्स्ट को देखते हुए तस्वीर को अलग-अलग कैटेगरी में सेव करता है।

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