फ्री गिफ्ट आपका विशेषाधिकार, उन्हें मांगें

पुष्पा गिरिमाजी

किराने की जिस बड़ी दुकान में हर महीने मैं जाती हूं, उसकी आदत प्रसाधन आदि वस्तुओं के साथ मिलने वाले मुफ्त उत्पाद को नहीं देने की है। उदाहरण के लिए पिछले महीने जब मैं घर लौटी और मैंने अपनी पैकिंग खोली तो मैंने पाया कि उसने उस लिप बाम को नहीं दिया था जिसे बॉडी मॉइस्चराइज़र के साथ मुफ्त दिया जाना था। उससे पहले पनीर के पैकेट के साथ मुझे कांच का छोटा कटोरा नहीं दिया गया। जब-जब मैं इसकी शिकायत करती हूं, वे माफी मांगते हैं और दोष स्टोर अटेंडेंट पर मढ़ देते हैं। मुफ्त में मिलने वाली चीजें बहुत कीमती भले ही न हों, लेकिन मुझे लगता है कि स्टोर का व्यवहार गलत और अनैतिक है। क्या यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दायरे में आता है? किसी चीज के साथ नि:शुल्क उत्पाद या गिफ्ट देने के वादे को खुदरा विक्रेता द्वारा जानबूझकर पूरा न करना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत व्यापार का अनुचित तरीका है और एक उपभोक्ता को इस तरह के व्यापार के परिणामस्वरूप किसी भी नुकसान या पीड़ा के खिलाफ निवारण पाने का अधिकार है। इसके अलावा, स्टोर अपने कर्मचारियों के व्यवहार के लिए उत्तरदायी भी है। क्या इस तरह के किसी मामले में उपभोक्ता किसी खुदरा विक्रेता को अदालत की चौखट तक ले गया है? यहां मैं उन महंगे उपहारों का जिक्र नहीं कर रही हूं जिन्हें देने का वादा दिवाली या ऐसे ही अन्य खास मौकों पर बड़ी खरीद के दौरान किया जाता है। यहां मैं छोटे एवं अपेक्षाकृत उन सस्ते उत्पादों की बात कर रही हूं जो प्रसाधन या ऐसी ही अन्य चीजों के साथ मुफ्त में मिलते हैं। कृपया इस मामले को कोई अपराधबोध जैसा न मानें कि प्रसाधनों या ऐसे ही अन्य उत्पादों के साथ मिलने वाला सामान बहुत महंगा नहीं होता। जो कुछ भी उन वस्तुओं की घोषित कीमत है, निर्माता उसे दूसरे उत्पाद की खरीद के साथ आपको मुफ्त में दे रहा है और आपके पास उस मुफ्त की वस्तु को पाने का अधिकार है और खुदरा विक्रेता का यह कर्तव्य है कि इस उत्पाद को वह आपके हवाले करे। यदि ऐसा कभी-कबार हो जाता है तो तो कोई यह मान सकता है कि यह अनजाने में हुई गलती थी, लेकिन जब ऐसा नियमित रूप से होता है, तो कोई भी इसके पीछे उसकी मंशा को समझ सकता है। मुझे यह जरूर बताना चाहिए कि उपभोक्ता अदालतों ने खुदरा विक्रेता या निर्माताओं द्वारा किए गए वादे के मुताबिक गिफ्ट न देने की कई शिकायतों का निपटारा किया है, लेकिन ज्यादातर मामले महंगी वस्तुओं से संबंधित थे। हालांकि हाल ही में मुझे आपके जैसे केस का पता चला। यहां शिकायतकर्ता तमिलनाडु के एस जयारमन को स्टोर ने डोमेक्स की बोतल के साथ निर्माताओं द्वारा ऑफर किए गए 20 रुपये की कीमत वाला विम जेल नहीं दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्टोर यह सामान उनके घर पहुंचाये। गिफ्ट न देना उनकी गलती थी, लेकिन स्टोर ने उनकी बात नहीं मानी। दुखी होकर उन्होंने 20 हजार रुपये बतौर मुआवजे और 5000 कीमत की मांग करते हुए शिकायत दर्ज की। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम ने इसे सेवा में कमी माना और स्टोर को आदेश दिया कि वह उपभोक्ता को कीमत और यात्रा खर्च के तौर 2500 रुपये का भुगतान करे (शायद स्टोर से विम जेल लेने के लिए था, आदेश में यह स्पष्ट नहीं है।) हालांकि इसमें उपभोक्ता को कोई मुआवजा नहीं दिया और स्टोर को अनुचित तरीके के व्यापार के लिए जिला फोरम ने उपभोक्ता कानूनी सेवा के तहत पांच हजार रुपये देने के निर्देश दिए। इस आदेश के खिलाफ दायर याचिका राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से स्वत: ही खारिज हो गयी क्योंकि उपभोक्ता पेश नहीं हुए। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, अपने पुनरीक्षण क्षेत्राधिकार में केवल सीमित प्रश्न पर ही गौर करता है कि क्या निचली उपभोक्ता अदालतों के आदेश में न्याय या सामग्री संबंधी कोई अनियमितता थी। इसलिए निचली उपभोक्ता अदालतों के आदेशों में कोई कमी न पाते हुए इसमें (एस जयारमन बनाम प्रोपराइटर/मैनेजर श्री कन्नन डिपार्टमेंटल स्टोर, तमिलनाडु आदेश संख्या 2017 का आरपी नंबर 256 आदेश की तिथि 4 नवंबर 2019) हस्तक्षेप नहीं किया और इसे खारिज कर दिया गया। आपके मामले के तथ्य अलग हैं। यहां खुदरा विक्रेता लगतार फ्री गिफ्ट नहीं दे रहा है, लगता है यह उसकी आदत सी हो गयी है, जो गलत है। वह न तो आपको फ्री वस्तुएं दे रहा है और न ही आपकी शिकायतों को सकारात्मक रूप से ले रहा है। यह भी संभव है कि वह ऐसा ही व्यवहार अन्य ग्राहकों के साथ भी कर रहा हो। आप अपने आसपास के लोगों से पूछिये कि क्या उनका भी ऐसा ही अनुभव है। यदि ऐसा है तो यह आगे चलकर आपके केस को और मजबूत करेगा। अंत में मुझे यह अवश्य ही कहना चाहिए कि प्रदान किया गया मुआवजा मामले के तथ्यों पर निर्भर करता है और इस बात पर भी कि जिला फोरम इस तरह के अनैतिक व्यवहार को किस तरह से देखता है।

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