फिर गुलज़ार होंगी वादियां

असीम चक्रवर्ती

बॉलीवुड में फिल्म निर्माताओं के बीच कश्मीर में शूटिंग करने का एक नया क्रेज पैदा हुआ है। तौरानी, कबीर खान, महेश भट्ट, करण जौहर जैसे कई फिल्मकार कश्मीर में शूटिंग करने का मन बना चुके हैं। करण ने अपनी फिल्म शेरशाह की शूटिंग किसी कारणवश स्थगित कर दी थी। अब वह जल्द शेरशाह की यूनिट को लेकर कश्मीर में लगभग एक माह के लिए डेरा डाल देंगे। दूसरी तरफ महेश भट्ट भी सड़क-2 को दोबारा कश्मीर ले जाने वाले हैं। असल में कुछ कारणवश उन्होंने वहां अपनी शूटिंग स्थगित कर दी थी। इतना ही नहीं कुछ और मेकर्स तो कश्मीर में फिल्मों के प्लॉट तैयार करने में लग गए हैं। माहौल ने दहशत फैला दी सच तो यह है कि पिछले कुछ सालों से वहां के हालात इतने नाजुक हो चले थे कि शूंटिग करने की बात फिल्म वाले डरते-सहमते ही सोचते थे। हाल के वर्षों में वहां यहां, हाईवे, ये जवानी है दीवानी, जब तक है जान, स्टुडेंट आफ द इयर, सात खून माफ, राॅकस्टार, लम्हा रोजा, मिशन कश्मीर, माचिस, लक्ष्य, दिल से हैदर, फितूर, बजरंगी भाईजान, रेस-3 आदि कुछेक फिल्मों की ही शूटिंग हो पाई। वह भी डरते-सहमते कुछ गिने-चुने लोकेशन में ही। याद आता है वह दौर कभी फिल्म वाले कश्मीर में शूटिंग के लिए भाग जाते थे। जानवर, जंगली, कश्मीर की कली, जब जब फूल खिले, आरजू, सिलसिला, कभी-कभी आदि उस दौर की ढेरों ऐसी फिल्में हैं जो कश्मीर की पृष्ठभूमि में बनीं लेकिन इनमें से कुछ फिल्में ही ऐसी हैं, जिसमें वहां की जीवनशैली को दर्शाया गया है। असल में उन दिनों हर तीसरी फिल्म की शूटिंग के लिए निर्माता कश्मीर के बारे में सोचते थे। हाल के वर्षों की कुछ फिल्मों की बात करें तो फितूर में गरीब घर के एक कश्मीरी युवक नूर मोहम्मद यानी आदित्य राय कपूर का प्यार एक बड़े परिवार की बेटी फिरदौस-कैटरीना कैफ से हो जाता है। निर्देशक अभिषेक कपूर ने इस प्रेम कहानी के जरिए अपने तई कश्मीर की जीवनशैली में भी झांकने की कोशिश की थी, मगर कमजोर कथाक्रम की वजह से फिल्म विफल रही। ‘रोजा’ के मणिरत्नम उन चंद निर्देशकों में से हैं, जिन्हें कश्मीर हमेशा लुभाता रहा है। मणिरत्नम की फिल्म रोजा आतंकवाद पर केंद्रित थी। पहले मणि इस फिल्म की सारी शूटिंग यहीं करना चाहते थे, पर वहां के नाजुक हालात को देखते हुए उन्हें कश्मीर के कुछ अंचलों के अलावा इसकी शूटिंग कुन्नुर, मनाली, ऊटी जैसे दूसरे हिल स्टेशनों पर भी करनी पड़ी। लेकिन इसके बावजूद कश्मीर के लोगों की जीवनशैली को उन्होंने कहीं भी मिस नहीं किया था। इसमें उन्होंने एक दक्षिण भारतीय प्रेमी युगल ऋषि-रोजा के बहाने कश्मीर को सेंट्रल में रखा। यह प्रेमी युगल किस तरह से आतंकवादियों का सामना करते हुए उनकी चपेट से अपने आपको बाहर निकालता है, यह इस फिल्म का प्लस प्वायंट है। इसके साथ ही मणि वहां की संस्कृति को भी बेहद उम्दा ढंग से दिखाते हैं। विशाल की प्रिय जगह निर्देशक विशाल भारद्वाज को भी कश्मीर में शूटिंग करना बहुत पसंद है। सात खून माफ और हैदर अपनी इन दोनों फिल्मों की शूटिंग के लिए वे कश्मीर घूम चुके हैं। हैदर का पूरा सब्जेक्ट ही आतंकवाद था। इसके साथ ही उन्होंने इसमें डल लेक, पहलगाम, अनंतनाग, मत्तन, गुलमर्ग, पुराना श्रीनगर, निशात बाग, काजीगुंड, मार्तलैंड सन टेंपल, कश्मीर यूनिवर्सिटी गार्डेन, हजरत बल आदि उल्लेखनीय जगहों को बेहद कलात्मक ढंग से अपने कैमरे में कैद किया था। गुलजार ने भी आतंकवाद को फिल्माया निर्देशक गुलजार ने भी अपनी फिल्म माचिस के बहाने यहां निचले तबके के आतंकी बनने की वजह को बहुत अच्छी तरह से दिखाया था। किस तरह कश्मीरी युवक आतंकवादियों के बहकावे में आकर दिशाहीन हो जाते हैं और बाद में रास्ते पर भी आ जाते हैं, इसे गुलजार जैसे निर्देशक ही पूरी कुशलता के साथ पेश कर सकते थे। सुजीत की यहां सुजीत सरकार की यहां में एक कश्मीरी युवती मिनीषा लाम्बा और सेना अधिकारी जिम्मी शेरगिल के प्यार के केंद्र को पेश किया गया था। जिसमें कुछ कटु और दिलचस्प पहलू थे। सुजीत ने यहां की कुछ जगहों को अपनी फिल्म का लोकेशन बनाया था। उन्होंने इस बात को भी शिद्दत से दर्शाया था कि कैसे वहां के सीधे-सादे लोग दहशतगर्दों के झांसे में आ जाते हैं। विधु का सपना पूरा हुआ कश्मीर के रहने वाले निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा ने अपनी दिली इच्छा मिशन कश्मीर बना कर पूरा की। वह इसमें काफी सफल भी रहे। कश्मीर के होने की वजह से वह कश्मीर से वाकिफ हैं। इसलिए उन्होंने आतंकवाद की परवाह न करते हुए अपनी इस फिल्म को एक कश्मीरियत लुक दी थी। इसमें कश्मीरी युवक-युवती के तौर पर सिर्फ अभिनेता रितिक रोशन और प्रीटि जिंटा ही नहीं, बाकी सारे किरदार भी कश्मीरी लग रहे थे। जब-जब फूल खिले स्व. अभिनेता शशि कपूर को स्टार बनाने में फिल्म जब-जब फूल खिले का अहम हाथ था। फिल्म काफी हद तक कश्मीरियत पर बेस्ड थी। यूं तो शशि कपूर ने कई फिल्मों की शूटिंग की थी, मगर डल झील में शिकारा चलाते हुए उन्हें बहुत मजा आया था। दरअसल शशि ने इसमें एक शिकारे वाले का रोल किया था। इस फिल्म में उन पर फिल्माया गया एक अति लोकप्रिय गीत ‘अप्पू खुदा’ में उन्होंने अपने बड़े भाई शम्मी कपूर को पूरी तरह से फाॅलो किया था। कश्मीर का असली हीरो याहू स्टार शम्मी कपूर को कश्मीर से इतना गहरा लगाव था कि वह अपनी ज्यादातर फिल्मों की शूटिंग वहां करना पसंद करते थे। यहां की सुदर वादियों में उन पर ‘इशारों-इशारों में’, ‘दीवाना हुआ बादल,’ ‘तुमसे अच्छा कौन है’, ‘सुभान अल्लाह हसीन चेहरा’...जैसे एक दर्जन से ज्यादा हिट गाने फिल्माए गए थेे। कश्मीर की कली, जानवर, जंगली, तुमसे अच्छा कौन है आदि कई फिल्मों की ज्यादातर शूटिंग यहां की गई थी। लेकिन कश्मीर की कली की शूटिंग के दौरान वह यहां की जीवनशैली से बहुत प्रभावित हुए थे। शम्मी कपूर ने यहां के कई स्थानीय लोगों को अपना बहुत अच्छा दोस्त बना लिया था। यहां तक कि कई शिकारे वालों को वह उनके नाम से जानते थे। लोग रास्ते में खड़े होकर छोटे-छोटे फूलों के गुलदस्तों से उनका स्वागत करते थे। जुबली कुमार को भी पसंद जुबली कुमार यानी राजेंद्र कुमार को भी कश्मीर में शूटिंग करना बहुत अच्छा लगता था। ‘आस का पंछी’, आरजू, अनजाना, आप आए बाहर आई, सूरज, साथी आदि कई फिल्मों की शूटिंग कश्मीर में हुई। रामानंद सागर की सुपरहिट फिल्म आरजू की तो अधिकांश शूटिंग कश्मीर में हुई थी क्योंकि इसकी कहानी के अहम हिस्से में कश्मीर था। याद कीजिए ‘ऐ फूलों की रानी बहारों की मलिका’, ‘अजी रूठ कर कहां जाइएगा’, ‘ए नर्गिस-ए-मस्ताना’ जैसे गानों के फिल्मांकन को। यश को कश्मीर से मोहब्बत थी रोमांस के बादशाह फिल्मकार यश चोपड़ा ने कभी अपनी एक बातचीत के दौरान कहा था कि उन्हें कश्मीर से गहरी मोहब्बत है। इसलिए दाग, कभी-कभी, सिलसिला, विजय, नूरी आदि कई फिल्मों की शूटिंग उन्होंने यहां की। जब हालत बिगड़ने लगे थे, तब भी उन्होंने सिलसिला के दो गानों और कुछ अहम दृश्यों का फिल्मांकन यहां किया था। सच तो यह है कि पुराने दौर के ज्यादातर फिल्मकार ही कश्मीर में शूटिंग करना पसंद करते थे। अब फिर वही जोश फिल्म वालों में देखने को मिलता है। अभिनेता अनुपम खेर कहते हैं, ‘अभी थोडा वक्त दीजिए, हालात पूरी तरह से अच्छे हो जाएं तो हमारे निर्माता ओवरसीज में गानों के फिल्मांकन की बजाय कश्मीर में शूटिंग करना पसंद करेंगे।

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