पुस्तकों से करें प्रेम

बाल कविता

पुस्तकें हैं वरदान। सर्वोत्तम मित्र यही, अकेला ना रहे इनसान।। हर प्रकार का ज्ञान छिपा, हर अक्षर हैं इनके मोती। इनको जिसने अपना लिया, रहे ना उसकी किस्मत सोती।। भाषा ज्ञान का भेद नहीं, सब देशों में मिल जाए। किसी को एक ही पुस्तक, प्रसिद्धि शिखर पर पहुंचाए।। विभिन्न रूपों में मिलती है, विषय भी हैं इनके अपार। कीमत महत्वहीन हो जाए, जब अपना ले इन्हें संसार।। निरक्षर को साक्षर कर दें, अज्ञानी में भर दें ज्ञान। पुस्तकों की महिमा ऐसी, लेखक को बना दें महान।। मुकेश कुमार जैन

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