दूरसंचार टैरिफ कार्ड पर हो स्पष्टता

पुष्पा गिरिमाजी

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने ‘टैरिफ ऑफर प्रकाशन में पारदर्शिता’ सबंधी एक परामर्श जारी किया है जिसमें उन्होंने सही टैरिफ प्लान चुनने और विभिन्न समाधानों की पेशकश के संबंध में उपभोक्ताओं द्वारा पेश की जा रही समस्याओं को स्वीकार किया है। कुछ समाधानों, जिनमें वेबसाइटों, मोबाइल एप आदि पर पूर्ण टैरिफ बताने के लिए एक विशिष्ट प्रारूप शामिल है, को बताया गया है ताकि उपभोक्ताओं को विभिन्न सेवा प्रदाताओं द्वारा पेश किए जाने वाले टैरिफ को समझना और अन्य सेवा प्रदाताओं से उनकी तुलना करना आसान हो सके। ट्राई ने मूल्य गणक (कैलकुलेटर) का भी प्रस्ताव दिया है जो उपभोक्ताओं को नामांकन शुल्क और विभिन्न प्लान में मिलने वाली छूट को समझने में मदद करेगा। ट्राई ने सभी स्टेकहोल्डर्स की प्रतिक्रिया आमंत्रित की थी और यह प्रक्रिया जारी है। आप ट्राई के परामर्श पत्र और विभिन्न स्टेकहोल्डर्स की प्रतिक्रियाओं को इसकी वेबसाइट पर देख सकते हैं। उम्मीद है कि ट्राई प्रस्तावित बदलाव लाएगा और उपभोक्ताओं के लिए टैरिफ को समझना और अपने हित में सर्वोत्तम को चुनना आसान होगा। टेलीकॉम टैरिफ को समझना मुश्किल क्यों है? टैरिफ कैलकुलेटर क्या है और यह वास्तव में कैसे मदद करेगा? उपभोक्ताओं को पसंद का अधिकार है, लेकिन एक सूचित पसंद के लिए उनके पास जरूरी और पूरी सूचना होनी चाहिए ताकि वे फॉर्मेट को आसानी से समझ सकें। आज अगर आप टेलीकॉम सेवा प्रदाता की वेबसाइट पर मौजूद टैरिफ प्लान को देखेंगे तो आप पाएंगे कि एक सूचित पसंद को समझना कठिन है क्योंकि सूचना उपभोक्ता के अनुकूल नहीं होती और सबसे महत्वपूर्ण कि यह सूचना पूरी नहीं होती। स्पेशल टैरिफ वाउचर (एसटीवी) और कॉम्बो वाउचर्स (सीवी) में कोई आंकड़ा नहीं होता। जैसा कि अपने परामर्श पत्र में ट्राई कहता है, ‘सबसे महत्वपूर्ण तत्व जो अक्सर किसी उपभोक्ता को वास्तविक टैरिफ को प्रभावित करता है, वह है उपभोक्ता द्वारा चुनी गई टैरिफ योजना के लिए एसटीवी और सीवी की उपलब्धता।’ और वहां 500 से अधिक ऐसे एसटीवी और सीवी हैं। इसलिए टैरिफ प्लान का महज चित्र दे देना पर्याप्त नहीं होगा। इसी तरह एसटीवी और सीवी का विवरण देना भी पर्याप्त नहीं होगा। सबसे पहले और सबसे जरूरी है कि उन्हें इस तरह के फॉरमेट में बनाया जाए कि इन्हें समझना आसान हो और हर सेवा प्रदाता को उसे आदर्श फॉरमेट में बनाना चाहिए ताकि दूसरे सेवा प्रदाता से उसकी तुलना करना आसान हो। इसीलिए ट्राई ने एकीकृत नये फॉरमेट में टैरिफ का प्रस्ताव दिया। लेकिन यही सबकुछ नहीं है। भारत में 92 से 95 फीसदी उपभोक्ता प्रीपेड प्लान खरीदते हैं और वे सब विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं और आर्थिक पृष्ठभूमि से आए होते हैं। इससे यह पूरी तरह से जरूरी हो जाता है कि टैरिफ प्लान ऐसा हो जिसे प्रारंभिक शिक्षा वाले भी समझ सकें ताकि वे वही खरीदें जो उनके हित में हो। इसलिए ट्राई ने कीमत कैलकुटेर का प्रस्ताव दिया जो विभिन्न प्लान की वास्तविक कीमत को समझने में मददगार हो। विभिन्न देशों में प्राधिकरणों ने ऐसे ही कैलकुलेटर की शुरुआत की है। उदाहरण के लिए आयरलैंड के संचार नियामक आयोग ने ऐसी सुविधा अपनी वेबसाइट पर दी है ताकि उपभोक्ता स्पष्ट, निष्पक्ष तरीके से उपलब्ध सूचना के आधार पर निर्णय ले सकें। दूसरी तरफ यूके के प्राधिकरण ऑफकॉम के पास इसके लिए मान्यताप्राप्त एजेंसियां हैं जो सेवाओं की कीमतों की तुलना करते हैं। मान्यताप्राप्त एजेंसियां डाटा की प्रवाहता को सुनिश्चित करती हैं। एजेंसी बिलमॉनिट न केवल टैरिफ की तुलना करती है, बल्कि उपभोक्ताओं के टेलीकॉम बिल का विश्लेषण करती है और उन्हें सही योजना चुनने में मदद करती है, का कहना है कि यूनाइटेड किंगडम में लगभग 74 प्रतिशत टेलीकॉम उपभोक्ता गलत मोबाइल कॉन्ट्रैक्ट पर हैं! भारत में भी ज्यादातर लोग दूरसंचार सुविधाओं को बिना पर्याप्त जानकारी और विभिन्न सेवा प्रदाताओं के टैरिफ के बीच तुलना किए ले रहे हैं क्योंकि उन्हें पर्याप्त सूचना नहीं होती। मुझे उम्मीद है कि ट्राई न केवल दूरसंचार टैरिफ में अधिक पारदर्शिता की शुरुआत करेगा, बल्कि टैरिफ कैलकुलेटर के लिए ऑफकॉम या आयरलैंड मॉडल का भी पालन करेगा। वास्तव में, मैं सभी उपभोक्ताओं से आग्रह करूंगी कि टैरिफ के प्रकाशन में पारदर्शिता की दिशा में ट्राई के कदम का समर्थन करें, ताकि प्रस्ताव हकीकत में बदल जाएं।

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