दुश्मन पर अचूक निशाने वाला ब्रह्मास्त्र

एस-400 रक्षा प्रणाली

योगेश कुमार गोयल

द्वितीय विश्वयुद्ध में जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर सैन्य परेड में शामिल होने के लिए तीन दिवसीय दौरे पर मॉस्को गए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रूसी उपप्रधानमंत्री यूरी बोरिसोव से हुई द्विपक्षीय रक्षा संबंधों पर चर्चा के बाद उम्मीद जताई है कि रूस से भारत को समय पर एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली मिल जाएगी। रक्षामंत्री के अनुसार भारत-रूस संबंध एक विशिष्ट एवं विशेष सामरिक भागीदारी है और दोनों देशों के बीच मौजूदा सैन्य अनुबंध बरकरार रहेंगे तथा कई मामलों को दोनों देश कम समय में आगे लेकर बढ़ेंगे। उनकी रूस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-रूस के बीच हुए रक्षा सौदों (विशेषकर एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली) की जल्द से जल्द आपूर्ति कराना था। दरअसल, चीन नहीं चाहता कि रूस भारत को एस-400 सहित इन रक्षा सौदों की शीघ्र आपूर्ति करे, लेकिन रूस द्वारा भारत को जल्द से जल्द एस-400, सुखोई-30 एमकेआई तथा मिग-29 की आपूर्ति के संकेत दिया जाना नि:संदेह चीन के लिए बड़ा झटका है। भारत करीब 58 फीसदी रक्षा सौदे रूस के साथ ही करता है। हथियारों के उत्पादन की भारत की ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम में भी रूस भारत का बहुत बड़ा मददगार साबित हो रहा है। मेक इन इंडिया सैन्य प्रोजेक्ट के तहत रूस के पास 12 अरब डॉलर की परियोजनाएं हैं। इसके अलावा सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक करीब 25 अरब डॉलर के हथियारों की खरीद और होने के आसार हैं। भारत-रूस के बीच हथियारों के संयुक्त उत्पादन तथा तकनीक के हस्तांतरण में ब्रह्मोस मिसाइल सबसे महत्वपूर्ण है। रूस से 18 सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों के लिए पांच हजार करोड़ रुपये तथा 200 कामोव-226टी यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों के लिए 3600 करोड़ रुपये का सौदा है, जिनका एचएएल में रूस के सहयोग से उत्पादन हो रहा है। अमेठी में 7.5 लाख एके-203 असॉल्ट राइफलों के निर्माण के लिए भी रूस से 12 हजार करोड़ का करार हुआ है। भारतीय नौसेना भी रूसी सहयोग से निर्मित छह युद्धपोतों आईएनएस तलवार, त्रिशूल, ताबर, तेग, तरकश और त्रिकांड का संचालन कर रही है। मल्टीफंक्शन रडार से लैस दुश्मन की बर्बादी का ब्रह्मास्त्र मानी जाने वाली एस-400 दुनियाभर में सर्वाधिक उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणालियों में से एक है, जो रूसी सेना में 2007 में सम्मिलित हुई थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 2018 में हुई शिखर बैठक के दौरान वायुसेना को ताकत प्रदान करने के लिए करीब 5.43 अरब डॉलर यानी 40 हजार करोड़ रुपये में एस-400 एंटी एयरक्रॉफ्ट मिसाइल रक्षा प्रणाली की पांच इकाइयां खरीदने का करार हुआ था, जिसे देश के रक्षा क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत माना गया था। इनमें से दो यूनिट 2021 के अंत तक भारत को मिलनी है और इन्हीं की जल्द आपूर्ति के लिए रक्षामंत्री द्वारा रूस यात्रा के दौरान बातचीत हुई है। यह ऐसी प्रणाली है, जिसके रडार में आने के बाद दुश्मन का बच पाना असंभव हो जाता है। इसके हमले के सामने भागना तो दूर, संभलना भी मुश्किल होता है। कुछ रक्षा विशेषज्ञ इसे जमीन पर तैनात ऐसी आर्मी भी कहते हैं, जो पलक झपकते ही सैकड़ों फीट ऊपर आसमान में ही दुश्मनों की कब्र बना सकती है। कहा जा रहा है कि एस-400 के वायुसेना में शामिल होने के बाद भारत जमीन की लड़ाई भी आसमान से ही लड़ने में सक्षम हो जाएगा। यह एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम तीन तरह के अलग-अलग मिसाइल दाग सकता है और इसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी आसानी से पहुंचाया जा सकता है। यही नहीं, नौसेना के मोबाइल प्लेटफॉर्म से भी इसे दागा जा सकता है। एस-400 में मिसाइल दागने की क्षमता पहले से ढाई गुना ज्यादा है। यह कम दूरी से लेकर लंबी दूरी तक मंडरा रहे किसी भी एरियल टारगेट को पलक झपकते हवा में ही नष्ट कर सकती है। यह मिसाइल प्रणाली पहले अपने टारगेट को स्पॉट कर उसे पहचानती है, उसके बाद मिसाइल सिस्टम उसे मॉनीटर करना शुरू कर देता है और उसकी लोकेशन ट्रैक करता है। इस मिसाइल रक्षा प्रणाली से अमेरिका के एफ-35 जैसे सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट भी इसके हमले से बच नहीं सकते। यह प्रणाली जमीन से मिसाइल दागकर हवा में ही दुश्मन की ओर से आ रही मिसाइलों को नष्ट करने में सक्षम है। यह एक साथ 36 लक्ष्यों और दो लॉन्चरों से आने वाली मिसाइलों पर निशाना साध सकती है और 17 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से 30 किलोमीटर की ऊंचाई तक अपने लक्ष्य पर हमला कर सकती है। इसे मात्र पांच मिनट में ही युद्ध के लिए तैयार किया जा सकता है। 600 किलोमीटर की दूरी तक निगरानी करने की क्षमता से लैस एस-400 की मदद से भारत के लिए पाकिस्तान के चप्पे-चप्पे पर नजर रखना भी संभव हो सकेगा। यह किसी भी प्रकार के विमान, ड्रोन, बैलिस्टिक व क्रूज मिसाइल तथा जमीनी ठिकानों को 400 किलोमीटर की दूरी तक ध्वस्त करने में सक्षम है। इसके जरिये भारतीय वायुसेना देश के लिए खतरा बनने वाली मिसाइलों की पहचान कर उन्हें हवा में ही नष्ट कर सकेगी।

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