दुनिया में घूमा कृष्णा और सीमा का चक्का

हरियाणा के अग्रोहा में जन्मी और राजस्थान में ब्याही एक और मातृशक्ित हैं कृष्णा पूनिया, जिन्होंने अनेक बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का भाल ऊंचा किया। वस्तुत: उन्होंने तो अपनी अधिकांश उपलब्धियां शादी के बाद ही हासिल की हैं, इसलिए वह कुछ विशेष हैं और उन खिलाड़ियों के लिए टाॅनिक का काम करती हैं, जो विवाह और बच्चों के जन्म के बाद खेल जीवन पर विराम लगा देती हैं। चक्का फेंक की इस ऊंची कद काठी की महिला के नाम 2012 में बनाया गया 64.76 मीटर का राष्ट्रीय रिकार्ड है, जो आज तक नहीं टूटा है। मिल्खा सिंह द्वारा 1958 के राष्ट्रमंडल खेल के 400 मीटर दौड़ में जीते गये स्वर्ण पदक के बाद इन खेलों में स्वर्ण जीतने वाली वह प्रथम भारतीय हैं, जो उन्होंने 2010 में दिल्ली में जीता। सन‍् 2000 में वीरेंद्र पूनिया, जो स्वयं एथलीट रहे हैं, से विवाह के बाद उनकी कोचिंग में कृष्णा ने 2006 और 2010 के एिशयाई खेलों में कांस्य पदक जीते। वह 3 बार ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उनकी सेवाओं के लिए उन्हें पद‍्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया। वर्तमान में वह सादुलशहर से कांग्रेस विधायक हैं और समाज सेवा में अग्रसर हैं। चांद पर दाग है, फिर भी उसका आकर्षण सर्वोपरि है। सोनीपत की पुत्री सीमा अंतिल, जो अंकुश पूनिया से शादी के बाद अब सीमा पूनिया के नाम से जानी जाती हैं, के साथ भी खेल जीवन की शुरुआत में कुछ एेसा ही हुआ। जब उन्होंने सन‍् 2000 में मात्र 17 वर्ष की आयु में विश्व जूनियर एथलेटिक्स प्रतियोगिता की डिस्कस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता तो उन पर डोपिंग का दाग लगा और पदक छीन लिया गया। किंतु उन्होंने वापसी की और 2002 में इसी प्रतियोगिता में कांस्य पदक प्राप्त कर देश को गौरवान्िवत किया। अंकुश, जो स्वयं डिस्कस के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं और जिन्होंने 2004 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया है, उनके कोच बने और सीमा का कैरियर उड़ान भरने लगा। राष्ट्रमंडल खेलों में वह देश के लिए सफलतम एथलीटों में से एक हैं और 2006 से 2018 तक उन्होंने 3 रजत और एक कांस्य सहित चार पदक जीते हैं। 2014 में उन्होंने एशियाई खेल में स्वर्ण पदक जीता।

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