थोड़ा-सा बचपना कर लें

शिल्पा जैन सुराणा

हंसता, खिलखिलाता, मुस्कुराता बचपन, कितना प्यारा लगता है। जब भी किसी बच्चे को खुलकर मुस्कुराते देखते हैं तो चेहरे पर अनायास ही एक मुस्कान आ जाती है और दिल में एक ख्याल भी, हम भी अगर बच्चे होते। तो क्यों नही थोड़ा बचपना भी कर लिया जाए, माना कि हम वो पल वापिस नहीं ला सकते पर अपने बच्चों के साथ बचपना दिखा कुछ पलों के लिए ही फिर से बच्चे तो बन सकते हैं।

खेलें बच्चों के गेम्स बचपन के खेल कितने मजेदार होते थे, खो-खो, पकड़ा-पकड़ी, जंजीर पर फिर हम बड़े हो गए और हमारे खेल हमारे बचपन के साथ ही गुम हो गए तो क्यों न एक बार फिर उन यादों को दोहराया जाए। बच्चों के साथ पार्क जाएं तो बतियाने के बजाय अपने बच्चों और दोस्तों को इकट्ठा करें और खेलें वही पुराने खेल। आपकी और बच्चों की हंसी इस आनन्द को दुगना कर देगी।

बच्चों की तरह बात करें तुतलाती जुबान में अपनी मीठी बोली से सबका मन मोहते बच्चे कितने प्यारे लगते है ना। कामकाज में व्यस्त होने के कारण हम अपने बच्चों के इन सुनहरे लम्हो को एन्जॉय भी नहीं कर पाते तो कभी-कभी बन जायें बच्चों के साथ बच्चे। उनसे उनकी भाषा में बात करें, कभी तुतलाकर तो कभी खिलखिलाकर। यदि आपके बच्चे बड़े हैं तो उन्हें बतायें वो बचपन में कैसे बात किया करते थे।

चंचलता लें उधार माना कि बचपन को फिर से नहीं पाया जा सकता पर हम बच्चों से उनकी चंचलता तो उधार ले सकते हैं। उनके पास खिलौने नहीं हों तो वो कटोरी चमच्च को ही खिलौना बना कर उतने ही खुश रहते हैं।

एक झपकी सुकून वाली बच्चों को सोते हुए देखा है कितने प्यारे और मासूम लगते हैं। दुनिया के परेशानियों से दूर सुकून भरी नींद और हमें नींद के समय भी हज़ारों परेशानियां याद आ जाती हैं, कल ये काम करना है, ऑफिस का ये टारगेट अधूरा रह गया, कामवाली फिर से नहीं आई। फिक्र ने हमारी नींद को भी फुर्र कर दिया है तो बच्चों से सीखे चैन भरी नींद सोना। उन्हें कल की क्या, अगले पल की भी चिंता नहीं। तो बस थोड़ा उनकी तरह बन जायें। कल क्या होगा उसे कल देखेंगे। एक झपकी सुकून की ली जाए।

मस्ती करना आप गृहिणी हैं या आप वर्किंग वीमेन हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। अपनी जिम्मेदारियों के बोझ तले दबी हैं तो थोड़ा सा बोझ हटायें। क्या हो गया अगर एक दिन घर बिखरा रह गया, क्या हो गया यदि एक दिन ऑफिस का काम अधूरा रह गया। थोड़ा सा मस्ती करने में क्या जाता है। अपने बोझिल पलों से ब्रेक लें, अपना पसन्दीदा गाना चलायें और बच्चों की तरह थिरकें। थोड़ा सा बचपना दिखाए और हो-कर के गेट के पीछे से आने वाले को डराएं। ये छोटी-छोटी खुशियां आपके बोझिल दिन को भी मजेदार बना देंगी। बचपन कहीं खोया नहीं है, वो आपके आसपास ही है, बच्चों में अपना बचपन ढूंढिये, उनके बचपने को अपनाइए और खुद में छुपा वो प्यारा-सा बच्चा जरा बाहर लाइये। तो क्यों न थोड़ा बचपना कर लिया जाए।

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