तनाव से बनाएं तालमेल

सिमी वरैच

अस्पताल में जाने पर हमने देखा कि हर तरफ एक लंबी लाइन है। लाइन में खड़े लोग सर्दी खांसी और फ्लू से पीड़ित हैं। कई सीनियर डॉक्टर्स ओपीडी में नहीं आ रहे, बल्कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सलाह दे रहे हैं। पास में जाने पर पता चला कि कुछ लोग एक डाइटीशियन डॉक्टर सोनिया गांधी से कंसलटेशन ले रहे हैं। जो उन्हें बता रही हैं कि सबि्ज़यों को बाहर से लेकर आने के बाद कैसे और क्यों साफ किया जाना चाहिए। लोग जानने की कोशिश कर रहे हैं कि सब्जि़यों से किसी तरह का वायरस तो नहीं आ जाएगा।

दूरी की मजबूरी हम देख सकते हैं कि हमारे आस-पास कुछ लोग इन दिनों तनाव में है। बहुत से लोगों ने अपनी घरेलू नौकरानी से कह रखा है कि अगले दो महीने तक न आये। कुछ लोग अपने बूढ़े और बीमार माता-पिता की सेहत के साथ किसी तरह का कोई समझौता नहीं करना चाहते। अनिल भी ऐसे ही लोगों में से एक हैं। वह वैकल्पिक दिन पर ही दुकान जाता है और वापस आकर सबसे पहले खुद को सेनिटाइज़ करता है ताकि उसकी अस्थमा से पीड़ित पत्नी को परेशानी न हो। उसकी बहन हालचाल पूछने पहली बार लॉकडाउन के बाद घर आई लेकिन न तो मां के गले लग पायी और न ही पहले की तरह घुलमिल पाई। दूर से बात करके चली गई।

ऑफिस का माहौल दफ्तरों में भी लोग सावधान हैं। एक युवा पूछता है कि क्या उसका घर जाना उसके पैरेंट्स के लिए सेफ है? क्या हो अगर उसकी वजह से उसके अपनों को इंफेक्शन हो जाये। लॉकडाउन के कारण और भी कई तरह का डर लोगों के मन में पैदा हुआ है। गुड़िया नौकरानी का काम करती है। उसका पति दिन भर शराब पीता है, लॉकडाउन में भी उसे शराब पीने की लत है। गुड़िया और उसकी बेटी घर में कमाने वाले हैं लेकिन इन दिनों काम नहीं है। एक दिन शराबी पति घर से पैसे लेकर बाहर भाग गया और गुड़िया का तनाव तब और बढ़ गया जब लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचाया । तेज़ी से बढ़ रहा कोरोना के मरीज़ों का आंकड़ा कई तरह से लोगों को डरा रहा है, उन्हें तनाव में डाल रहा है। सवाल यह भी है कि आखिर यह सब कब तक चलेगा? लोगों के मन में सवाल है कि जब यह बीमारी चरम पर होगी तो क्या हमारे देश में पर्याप्त संख्या में बेड और वेंटीलेटर की व्यवस्था हो पाएगी? क्या सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार किया है या सिर्फ झूठा आश्वासन दे रही है?

काम पर लौटेंगे तो क्या होगा? एक अनदेखी आशंका हर वक्त लोगों के मन में घर कर रही है, वह है कि अगर वे बाहर निकलेंगे तो कहीं उनके परिवारों को संक्रमण तो नहीं हो जाएगा। जब अनिश्चितता होती है तो एंग्ज़ाइटी हार्मोन बढ़ जाता है, जिससे चिंता, अवसाद और थकान घेर लेती है। ऐसे में खुद की अनदेखी करना, मौजूदा हेल्थ समस्याओं के बारे में ध्यान न रखना ऐसे समय में डिप्रेशन का शिकार बना देता है। तनाव जो बना सकता है बीमार काम से गैरहाज़िरी नौकरी खोने का ख़तरा असुरक्षित फाइनांशियल फ्यूचर परिवार से दूर रहने की चिंता

क्वारंटीन में रहने वाले बहुत से लोग जो इन दिनों क्वारंटीन में रह रहे हैं, उनमें एंग्ज़ाइटी की समस्या पैदा हो रही है। रिपोर्टस के मुताबिक उनमें मूड खराब रहना, असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है जो अगले कुछ महीनों तक रह सकती है। कोरोना पॉज़िटिव पाये जाने का डर, एक दम अकेले पड़ने जाना या अलग-थलग होने का डर और डराने वाला है। हेल्थ वर्कर्स के परिवार तो हर दिन इस तरह की समस्याओं से दो चार हो रहे हैं । फिर अन्य लोगों का हाल आसानी से समझा जा सकता है।

कैसे करें डील

  • तनाव के साथ डील करने के लिये कुछ लोग फ्रीक्वेंट वीडियो कॉल्स का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में एक साथ 4 लोगों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर जोड़ने वाले प्लेटफॉर्म बड़े काम आ रहे हैं। फैमिली और दोस्तों के साथ लंबी बातचीत से तनाव दूर भागता है । अपनों को हंसते मुस्कुराते देखना तनाव भगाने में किसी थैरेपी की तरह काम करता है।
  • बैडमिंटन, कैरम बोर्ड, सांप- सीढ़ी, कार्ड गेम बोरियत से बाहर निकालने में मदद कर रहे हैं।
  • कई लोग प्रवासी कामगारों की मदद करने, बाहर निकलने लगे हैं।
  • तनाव दूर भगाने के लिये कुछ लोग गार्डनिंग कर रहे हैं, तो कुछ लोग बालकनी में खड़े होकर पक्षियों की चहचहाट सुन रहे हैं।
  • सैर करने वाले भी इन दिनों वापस लौट आये हैं, सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए अपनी बॉडी और आत्मा को नयी ऊर्जा दे रहे हैं।
  • ऑनलाइन मेडिटेशन, ब्रीदिंग सीज़न इन दिनों नॉर्मल हो गया है।
  • बहुत से लोग अपनी लाइफ को साधारण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कम में ही खुश रहने की प्रैक्टिस कर रहे हैं।

डर कायम है तनाव और परेशानी को बहुत से लोग झेलना जानते हैं, उसके साथ तालमेल बिठाकर चलना सीखते हैं, लेकिन कुछ लोगों के लिये यह मुश्किल होता है। जो लोग तनाव से सफलतापूर्वक निपटना जानते हैं, उनमें एंग्ज़ाइटी का लेवल कम -होता है। इसकी वजह से वे ध्यान लगा पाते हैं, चीज़ों पर फोकस करने में सफल रहते हैं। इसी वजह से वे लोग जो मिला है उसके प्रति आभारी रहते हैं और छोटी-छोटी चीज़ों में खुशियां तलाशते हैं। तो आइए एंग्ज़ाइटी के साथ डील करना सीखें। अपने लुक, अपने वज़न, हाई कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिये काम करें। सबसे अहम अपनी मानसिक सेहत को सुधारें।

एंग्ज़ाइटी कम करने के टिप्स

  • सक्रिय रहें क्योंकि शारीरिक गतिविधियां तनाव बस्टर का काम करती हैं। पढ़ने, खाना पकाने, अलमारी साफ करने, संगीत सुनने जैसी चीज़ों को अपनी एक्टिविटीज़ में शामिल करें ।
  • जिनसे बहुत दिनों से बात नहीं हुई ऐसे पुराने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ रीकनेक्ट करें ।n दूसरों की मदद करें, अकेले रहने वाले या बुज़ुर्ग लोगों की मदद करें।
  • मूड और इम्यूनिटी को बढ़ावा देने के लिए योग, एक्सरसाइज़ करें ।
  • सावधान रहें, आप जो गतिविधि कर रहे हैं, उसमें पूरी तरह से शामिल हों । जब आप टहलने जाते हैं, तो अपने आसपास की चीजों को पेड़, पक्षी, हवा, सूरज, आदि को ध्यान से देखें ।
  • हर दिन 10 मिनट के लिए मेडिटेशन करें।
  • एक दिनचर्या बनाए रखें, जो लोग रोज़ाना प्रार्थना करते हैं, व्यायाम करते हैं और काम करते हैं, वे तनाव को बेहतर रखने में सक्षम होते हैं ।
  • नकारात्मकता हावी न होने दें। स्थिति को स्वीकार करें और पांच गहरी सांसें लें। यह तनाव कम करने में मदद करेगा ।
  • अच्छी नींद लें, नींद लेने से इम्यूनिटी बढ़ती है और तनाव कम होता है।

- लेखिका एक प्रख्यात मनोचिकित्सक हैं

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