टॉप गियर में काका

kar copyअपने ‘मनोहर काका’ इन दिनों खुलकर बैटिंग कर रहे हैं। चंद रोज पहले ही वे 72 घंटे के मैराथन सफर पर हरियाणा के 13 जिलों को नाप चुके हैं। लंच-डिनर डिप्लोमेसी के जरिये वर्करों को साधने की कोशिश भी की। सीएम की डायरी व पैन खास तौर से ऐसे कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलती दिखी, जिनके जेहन में पार्टी के लिए बहुत कुछ करने की चाहत थी। बहुत कुछ नोट किया और दो दिन बाद ही आधा दर्जन के करीब फैसले भी ले लिए। अब ताबड़तोड़ 4 बड़ी रैली के जरिए बहुत कुछ दिखाना चाहते हैं। सीएम का टॉप गियर विपक्षियों को हजम नहीं हो रहा।

धान के दाने भुनाओ    पीएम मोदी ने धान के एमएसपी में 200 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर किसानों की वाहवाही लूटने का प्रयास किया है। पार्टी के जो नेता और पदाधिकारी मानसून सीजन में सुस्ता रहे थे, उन्हें काम मिल गया है। अब भाजपा के नेता व वर्कर धान के एमएसपी को लेकर फील्ड में हैं। यही कह रहे हैं, देखो क्या कभी किसी ने इतना दाम बढ़ाया। 5 से 15 रुपये बढ़ते थे, अब सीधी डबल सेंचुरी मारी है, म्हारे मोदी साहब नै। इसतै बढ़िया और के लेओगे।

होली मिलन की तैयारी कांग्रेस के 2 कदावर नेता इन दिनों एक-दूसरे की तारीफ करते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस युवराज के पसंदीदा अपने साइकिल वाले प्रधानजी अब सांघी वाले ताऊ के साथ ‘मधुर’ संबंध की पहल कर चुके हैं। िपछले दिनों चंडीगढ़ में प्रधानजी यह भी स्वीकार करने से नहीं चूके कि पूर्व सीएम हुड्डा के साथ उनके राजनीतिक मतभेद, मनभेद में बदल गए थे। वे चाहते हैं कि बीती बातों को भुलाया जाए और कांग्रेस को एकजुट करने के लिए मिलकर चला जाए। अपने ताऊ भी कहां पीछे हटने वाले थे। अगले ही दिन कह दिया, मेरा किसी के साथ मतभेद नहीं है। कांग्रेस एक है, हम सब पार्टी की मजबूती के लिए काम कर रहे हैं। अब साइकिल वाले प्रधानजी नब्ज देखकर बोल रहे हैं या चेहरा पढ़कर यह तो समय बताएगा, लेकिन वर्करों की जुबां पर एक ही बात है लगता है इबकै दीवाली तै पहल्यां होली मिलन होकै रवैगा।

‘छोटे स्वामीनाथन’ की ‘क्लास’ फरीदाबाद में हुई भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी में अपने बादली वाले ‘छोटे स्वीनाथन’ की पार्टी के ही नेताओं ने ‘क्लास’ लगा दी। केंद्र ने फसलों का समर्थन मूल्य क्या बढ़ाया अपने साहब के ठुमके रुक नहीं रहे हैं। बड़े जोश में कार्यकारिणी की बैठक में अपनी ‘संघर्ष गाथा’ सुनाने लगे और यहां तक कह गए कि हरियाणा में उनके समय हुए किसान आंदोलन की वजह से आज देशभर के किसानों का कल्याण हुआ है। अपने बांगर वाले बड़े चौधरी साहब कहा रुकने वाले थे। बेबाक होकर बोले, अगर केंद्र में भाजपा की सरकार नहीं बनती और मोदी पीएम नहीं होते तो ये कुर्ते टंगे ही रहते। ठुमके भी लगाने का मौका नहीं मिलता। बात यही नहीं रुकी, तालू वाले नेताजी ने सब्जियों के लिए शुरू की गई भावांतर भरपाई योजना पर ‘छोटे स्वामीनाथन’ की खिंचाई शुरू कर दी। कहने लगे, दादरी में तो किसानों को टमाटर की भरपाई के लिए 10 पैसे ही मिले। उखड़े ‘छोटे स्वामीनाथन’ ने कहा, आप तो किसानों को भड़का रहे हैं। मुझे लिखी चिट्ठी भी मीडिया में छपवा दी। यह तरीका सही नहीं है।

राय तो एक कर ल्यो भाजपाई भाई लोगों की कहानी भी निराली हैं। कभी कहते हैं कि विधानसभा के चुनाव समय पर ही होंगे और कभी कहते हैं कि अगर लोकसभा के साथ हुए तो हम इसके लिए भी तैयार हैं। रोचक बात यह है कि पार्टी के दिग्गज नेताओं द्वारा मिशन-2019 के लिए अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। अपने ‘खट्टर काका’ कहते हैं कि 70 प्लस के साथ सत्ता में वापसी करेंगे। अपने प्रभारी लालाजी का आकलन है कि पार्टी 65 सीटों के साथ सत्ता में वापसी करेगी। खुद को मोदी का करीबी बताने वाले ‘एक और सुधार’ सैल के निदेशक रॉक स्टार रॉकी मित्तल का अपना अलग ही गणित है। उन्हें लगता है कि 2014 में आई 47 सीटें इस बार बढ़कर 50 प्लस हो जाएंगी। अब काका की सरकार और पार्टी वर्करों में बड़ी दुविधा है। वे कह रहे हैं, वापसी कितने से होगी यह तो समय ही बताएगा लेकिन कम से कम एक राय तो कर ल्यो।

शाह का साया फरीदाबाद में 2 दिन चली भाजपा की संगठनात्मक बैठकों में पार्टी सुप्रीमो अमित शाह का साया साफ देखने को मिला। हरियाणा मामलों के प्रभारी डॉ. लालाजी के वक्तव्य में तो पूरी तरह से शाह का टास्क ही छाया रहा। साफ-साफ कह दिया, प्रधानजी ने रोहतक प्रवास में जो ड्यूटी लगाई थी, उस पर प्रदेश के भाजपाई खरे नहीं उतरे। इससे राष्ट्रीय अध्यक्ष काफी नाराज़ हैं। वैसे नाराज़गी जैसी बातें तो अब भाजपा में सामान्य हो गई हैं। अब तो सरकार के वरिष्ठ मंत्री और नेता भी मानने लगे हैं कि इस ‘नाराज़गी’ का अब कोई मतलब नहीं। जब तक ‘काका’ पर उनके ‘बड़े गुरुजी’ यानी मोदी का ‘आशीर्वाद’ है, इस तरह की बातों के कोई मायने नहीं। खबरें तो यहां तक हैं कि अपने-अपने तरीके से लॉबिंग करने वालों ने अब यह काम छोड़ दिया है और वे भी उन लोगों की राह पर चल पड़े हैं, जिन पर चलते हुए कई भाई लोग ‘काका’ के नजदीकियों में शुमार हो चुके हैं।

भावनाएं और नाराज़गी भाजपा के संगठन महामंत्री रामलाल का बड़ा नाम है। उनकी चोट में आवाज भी नहीं होती। वे बात भी कह देते हैं और किसी को बुरा भी नहीं लगने देते। हरियाणा के भाजपाइयांे की ‘क्लास’ के दौरान संघ के इन बड़े ‘तोपची’ ने बातों-बातों में प्रदेश सरकार की कार्यशैली से नाखुश वर्करों की भावनाएं भी उजागर कर दीं और मंत्रियों को नसीहत भी दे डाली। कहने लगे, मेरे पास दिल्ली में हरियाणा से चाहे कोई आए सभी सरकार की बुराई करते हैं। उनसे पूछता हूं तो कहते हैं फलां काम तो हो गया, फलां भी हो गया, लेकिन वह नहीं हुआ। उन्होंने कहा, इस ‘लेकिन’ शब्द को डायरी से निकाल दें। जब तक लेकिन को नहीं निकालेंगे, बात नहीं बनेग। अब नेताजी को कौन समझाए कि भाजपाई लोगों के पास यही तो एक शब्द है, जिसके सहारे वे अपना समय काट रहे हैं।

-दिनेश भारद्वाज

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