टॉन्सिल की देखभाल कैसे करें

हेल्थ कैप्सूल

मोनिका अग्रवाल टॉन्सिल का आक्रमण बैक्टीरिया और अन्य संक्रमण के खिलाफ बचाव की कार्रवाई की पहली दिशा है, लेकिन ये टॉन्सिल कभी-कभी विशेष रूप से सर्दियों में संक्रमित हो जाते हैं और इस तरह की समस्या जैसे कि संक्रमण बुखार और बेचैनी पैदा करते हैं। टॉन्सिलाइटिस के लक्षण गले में खराश, निगलने में कठिनाई, गले और गर्दन के किनारों पर लिम्फ नोड्स का टेंडर होना, टॉन्सिल और गले के आसपास लाली होना, बुखार होना या ठंड लगना, टॉन्सिल पर सफेद या पीली कोटिंग का होना, गले में दर्दनाक छाले या अल्सर का होना, बात करने की क्षमता में बदलाव होना, आवाज़ की कमी होना, सिर दर्द होना, कान और गर्दन में दर्द होना और सांसों में बदबू होना, ये सब टॉन्सिलाइटिस के लक्षण हैं। घरेलू उपाय

  • हरी चाय, दूध, कॉफी और सूप जैसे गर्म तरल पदार्थों का सेवन करने के अलावा, सर्दियों में रोज़ गर्म नमकीन गरारे करना ज़रूरी है।
  • सर्दी के दिनों में, जब किसी के गले में सूजन और जलन रही हो तो कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम का सेवन नहीं करना चाहिए। इतना ही नहीं, कैमोमाइल चाय पीना आपके खराब पेट के लिए बहुत लाभदायक होता है और और जब आप गले में पहली खराश महसूस करना शुरू करते हैं तो चाय सुखद प्रभाव देती है।
  • नींबू में विटामिन सी की मात्रा काफी अधिक होती है, इसलिए अगर किसी को छींक के साथ-साथ गले में खराश हो रही है तो यह फायदेमंद साबित हो सकता है।
  • देसी घी का सेवन, दादी मां की औषधि में से एक है जो सूखे गले के इलाज में चमत्कार करता है। काली मिर्च के दाने को चबाएं और फिर उसे एक चम्मच गर्म घी के साथ गले से उतार लें। घी में जीवाणुरोधी और प्रज्वलनरोधी गुण होते हैं और यह गले को नम भी रखता है।
  • तुलसी और शहद का काढ़ा विशेष रूप से सूखे, खराश वाले गले के लिए एक बढ़िया औषधि है। पानी में तुलसी के कुछ पत्तों के साथ एक चम्मच शहद उबालें और इसे पी लें। यह काढ़ा बच्चों के लिए विशेष रूप से अच्छा है और रात की खांसी के लिए बहुत प्रभावी उपाय है।
  • तुलसी की चाय भी बना सकते हैं और इसे धीरे-धीरे घूंट-घूंट कर पी सकते हैं। तुलसी अपने औषधीय गुणों और शहद जीवाणुरोधी गुणों के लिए जाना जाता है।
  • मुलेठी सांस और पाचन विकार का इलाज करने के लिए आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है। गले की नमी को बरक़रार रखने के लिए मुंह में मुलेठी की स्टिक या लीकोरिस रख सकते हो। उसे चबाते रहें।

सीनियर ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉक्टर संजीव डैंग से बातचीत पर आधारित।

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