जाएगा एक रोज़ कोरोना

बाल गीत देखो! तुम विचलित मत होना। जाएगा एक रोज़ कोरोना।। मम्मी बोलीं बिटिया मोना, हरगिज़ तुम धीरज मत खोना। अमर नहीं है ये बीमारी, देखो! इससे तनिक डरो ना। जाएगा एक रोज़ कोरोना।। आंख-नाक तुम अधिक मलो ना, गालों को रह-रह मत छूना। सेहत होगी ठीक तुम्हारी, मन को व्यर्थ उदास करो ना। जाएगा एक रोज़ कोरोना।। सब से कुछ दिन रख लो दूरी, क्वारंटीन है बहुत ज़रूरी। मन होने पाए न भारी, मन में शंका कोई धरो ना। जाएगा एक रोज़ कोरोना।। बार-बार हाथों को धोना, साफ़-स्वच्छ बिस्तर पर सोना। खाओ फल-सब्ज़ी गुणकारी, अफ़वाहों पर ध्यान धरो ना। जाएगा एक रोज़ कोरोना।।

- वसीम अहमद नगरामी

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