जब ढूंढ़ना हो आशियाना

मदन गुप्ता सपाटू आजकल अपना मकान बनाना या किराये पर भी लेना एक चुनौती होे गई है। जहां आपने रहना है, वहां भवन के वास्तु के अलावा और भी बहुत-सी बातों का ख्याल रखना अत्यंत आवश्यक है। पुराना गीत है- जहां नहीं चैना, वहां नहीं रहना।

  • यदि आप किसी टाउनशिप या किसी नये मोहल्ले में रहने जा रहे हैं तो उस जगह को अच्छे से समझें। पहले तो उसका वास्तु जानें। वहां उपलब्ध सुविधा के बारे में जानें, जैसे स्कूल, अस्पताल, मेडिकल, किराना दुकान, पानी-बिजली की सप्लाई, साफ-सफाई, सार्वजनिक वाहन। यदि ये सभी बातें आपके अनुकूल नहीं हैं, तो वहां न रहने में ही भलाई है। मकान शहर या मोहल्ले के पूर्व, पश्चिम या उत्तर दिशा में होना चाहिए।
  • घर लेते या बनाते वक्त भूमि का मिजाज देख लें। भूमि लाल है, पीली है, भूरी है, काली है या पथरीली है? चूहों के बिल वाली, बांबी वाली, फटी हुई, ऊबड़-खाबड़, गड्ढों और टीलों वाली भूमि का त्याग कर देना चाहिए। जिस भूमि में गड्ढा खोदने पर राख, कोयला, भस्म, हड्डी, भूसा आदि निकले, उस भूमि पर मकान बनाकर रहने से रोग होते हैं। पूर्व, उत्तर और ईशान दिशा में नीची भूमि लाभप्रद होती है। आग्नेय, दक्षिण, नैऋत्य, पश्चिम, वायव्य और मध्य में नीची भूमि रोगों को उत्पन्न करने वाली होती है।
  • दक्षिणमुखी घर में रहना शुभ नहीं माना जाता। इसके अलावा मोहल्ले या टाउनशिप भी दक्षिणमुखी होते हैं, जैसे उनका मुख्य प्रवेश द्वारा दक्षिण में हो और उत्तर एवं ईशान में जरा भी खाली स्थान न हो।
  • किसी भी मकान, काॅलोनी या मोहल्ले और शहर के बीच का स्थान ब्रह्मस्थान कहा गया है। यदि यह स्थान गंदा है, तो इसे वास्तु दोष माना जाता है।
  • तिराहे या चौराहे पर वास्तु दोष निर्मित होता है। इस जगह नकारात्मक ऊर्जा अधिक होती है। यहां लोगों व वाहनों का आवागमन लगा रहेगा, जिसके चलते आपकी मानसिक शांति भंग ही रहेगी। इसलिए तिराहे या चौराहे पर घर नहीं बनाना चाहिये।
  • शराब का ठेका, जुआघर, मांस-मछली की दुकान के पास बने घर में नहीं रहना चाहिये। ऐसी जगह आपके जीवन में कभी शांति नहीं रहने देगी। इससे आपके और बच्चों के भविष्य पर नकारात्मक असर होगा। इन जगहों पर अपराधी, तामसिक और नकारात्मक किस्म के लोगों का आवागमन अधिक होता रहता है, इससे घर पर संकट के बादल कभी भी मंडरा सकते हैं।
  • यदि घर के आसपास ऑटो गैरज या इसी तरह के शोर उत्पन्न करने वाले किसी काम की दुकान हो, तो यह भी आपके लिए परेशानी की जगह है।
  • बहुत-से वास्तुशास्त्री मानते हैं कि मंदिर के पास घर नहीं होना चाहिए, लेकिन यह उचित नहीं है। दरअसल, आपको मंदिर के पास मकान लेते वक्त उसकी दिशा का चयन करना चाहिए। आपका मकान मंदिर के इतनी दूर होना चाहिए, जिससे मंदिर के कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो और आपका जीवन भी मंदिर के दैनिक कार्यों के कारण बाधित न हो। हमने यह देखा है कि मंदिर से लगे या मंदिर के अंदर बने जिन घरों का निर्माण वास्तु के अनुसार हुआ है, वहां रहने वाले लोग सुख-समृद्धि भरा जीवन व्यतीत कर रहे हैं। भारत के कई शहरों में व्यस्त बाजार में छोटे-बड़े धार्मिक स्थल होते हैं, जिनके आसपास घनी आबादी या दुकानें होती है। ऐसी जगहों पर खूब व्यवसाय होता है और वहां रहने वाले लोग खूब तरक्की करते हैं।

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