चोरी पकड़ी गई

जयती जैन

बिन्नी बंदर और उसके दोस्त जंगल की सबसे शैतान टोली में आते थे। उनका काम लोगों को सिर्फ परेशान करना था। वह दूसरे जानवरों यहां तक कि पक्षियों का भोजन चुराकर एक जगह एकत्रित करते और फिर दिनभर मौज उड़ाते थे। सभी बहुत परेशान थे लेकिन वह किसी की भी नहीं सुनते थे। जंगल में एक हिस्सा ऐसा भी था जहां पर शिकारियों का आना-जाना था और वहां पर पेड़ों पर कई मचानें बनी थीं। शिकारियों के डर से कोई भी जानवर उधर नहीं जाता था लेकिन बिन्नी और उसके दोस्त चुराए हुए खाने को एक जर्जर मचान पर जाकर छुपाते थे। उस मचान के जर्जर हो जाने के कारण कोई भी शिकारी उस पर नहीं चढ़ता था लेकिन यह बात बिन्नी और उसके दोस्तों को ही पता थी। इसलिए चुराए हुए खाने और छुपकर रहने के लिए वह उस मचान का उपयोग करते थे। एक रोज़ की बात है, जब बिन्नी और उसके दोस्तों ने हाथी के बच्चे का खाना चुरा लिया। वह बच्चा महज़ पांच दिन का था और हथिनी उसके लिए केले तोड़ कर लाई थी। हथिनी ने अपने बच्चे को वह केले दिए और खुद खाने के लिए हरे पत्ते लेने गई, तभी बिन्नी और उसके दोस्त आकर उस बच्चे का खाना चुरा ले गए। हथिनी ने जब आकर देखा तो वह बड़ी परेशान हुई कि उसके बच्चे को भूखा रहना पड़ेगा। वह तलाश करती रही कि सारे केले कौन उठाकर ले गया? जब हथिनी पूरे जंगल में केला चोर को ढूंढ रही थी तो उसे एक मेहरीन नाम का तोता मिला जो पक्षियों के लिए डाकिए का काम करता था। उसने हथिनी से परेशान होने की वजह पूछी तो हथिनी ने उसे सारी बात बताई। मेहरीन तोता बड़ा समझदार था। वह बोला-तुम फिर से अपने बच्चे के लिए केले लेकर आना और मैं पेड़ पर बैठकर नज़र रखूंगा कि कौन बच्चे का खाना चुराकर ले गया? अगले दिन हाथी और हथिनी दोनों बच्चे के लिए खाना लेकर आए लेकिन वह बंदरों की टोली नहीं आई। तब उन्होंने समझा कि शायद कोई भूखा होगा, इसलिए वह उस दिन खाना ले गया। अब वह निश्चिंत होकर अपने बच्चे के लिए खाना लाने लगे लेकिन तीन दिन बाद फिर से खाना चोरी हो गया। जब दो-तीन दिन लगातार खाना चोरी हुआ तो हाथी और हथिनी दोनों चोर की तलाश में निकले। उन्हें फिर वही मेहरीन नामक तोता मिला, जिसे उन्होंने सारी बात बताई। इस बार सभी ने मिलकर सोचा कि बच्चे को खाना देकर वह छुप जाएंगे और देखेंगे कि कौन खाना लेकर जा रहा है? अगले दिन जब बिन्नी बंदर और उसके दोस्तों की टोली आई तब सबको पता चला कि यह काम उनका है। मेहरीन तोते ने भी उनका पीछा किया और पता किया कि ये खाना कहां छुपाते हैं? यह बात जंगल में फैल गई कि बिन्नी रोज किसी न किसी जानवर-पक्षी का खाना ले जाकर एक जर्जर मचान पर छुपा देता है। जब सबको यह बात पता चली तो सभी उस मचान के पास पहुंचे और हाथी-हथिनी की मदद से उसे गिरा दिया। मचान के गिरते ही खाना ज़मीन पर गिर गया, जिसे बाकी जानवर खा गए। बिन्नी और उसके दोस्तों ने किसी तरह का कोई विरोध भी नहीं जताया क्योंकि वह जानते थे कि यदि विरोध करेंगे तो जंगल के सारे सदस्य उन्हें निकाल देंगे। बिन्नी और दोस्तों की जब शिकायत की गई तो जंगल में सभा जुटी और उन्हें सजा देने के लिए सभी एकमत हुए। अब बिन्नी और उसके दोस्त माफी मांगने लगे क्योंकि इतने दिनों से लगातार की गई चोरी की सज़ा बहुत कड़ी थी। उन्होंने सबके सामने गिड़गिड़ा कर माफी मांग ली और दोबारा ऐसी गलती ना करने की कसम खाई।

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