चूहों की मनमानी

बाल कविता

छोटा चूहा, मोटा चूहा , मन का है खोटा चूहा। खूब करता है शैतानी,, चीजों को पहुंचाये हानि। कपड़ों को कुतरता जाये, चुपके से अनाज खाये। मम्मी थी बड़ी परेशान , सताते थे चूहे शैतान। पापा लाये चूहेदानी , बंद हुई चूहों की मनमानी।

हरिन्दर सिंह गोगना

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