चीन को लेकर मोदी पर हमलावर कांग्रेस अलग-थलग पड़ी

हरीश लखेड़ा/ट्रिन्यू नयी दिल्ली, 1 जुलाई चीन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावर कांग्रेस विपक्षी दलों में अलग-थलग पड़ गई है। कांग्रेस चीन प्रकरण पर यूपीए के कुनबे को भी साथ नहीं रख पाई है। यहां तक कि यूपीए में कांग्रेस के प्रमुख सहयोगी दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), डीएमके और शिवसेना भी चीन को लेकर पहले ही मोदी सरकार के रुख से सहमत हैं, जबकि अन्य विपक्षी खासतौर पर क्षेत्रीयदल भी लद्दाख प्रकरण पर सरकार के साथ खड़े दिख रहे हैं। चीन प्रकरण पर कांग्रेस के अधिकतर बड़े नेता भी चुप्पी साधे हैं। यहां तक कि यूपीए सरकार में विदेश राज्यमंत्री रहे आनंद शर्मा का चीन के विरोध में बड़ा बयान नहीं आया है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस में भी एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो चीन को लेकर राहुल गांधी के रुख से सहमत नहीं है, लेकिन कोई विरोध करने की स्थिति में भी नहीं है क्योंकि राहुल निजी तौर पर प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर ले रहे हैं। पार्टी के अधिकतर बड़े नेताओं के चुप्पी साध लेने पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी ही चीन मामले में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ मैदान में डटे हैं। यूपीए में कांग्रेस के प्रमुख घटक दल एनसीपी प्रमुख शरद पवार तो गलवान घाटी में 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने के मामले में राहुल गांधी के उठाए प्रश्नों पर अप्रत्यक्ष तौर पर उन्हें नसीहत भी दे चुके हैं। शिवसेना पहले ही कह चुकी है कि वह सरकार के साथ है। डीएमके प्रमुख स्टालिन भी कांग्रेस की बजाए सरकार के साथ हैं। यूपीए में कांग्रेस समेत यही चार दल प्रमुख हैं। अन्य प्रमुख विपक्षी दलों में टीएमसी प्रमुख व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बीजू जनता दल प्रमुख व ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, टीएसआर प्रमुख व तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव, वाईएसआर कांग्रेस प्रमुख व आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी से लेकर पूर्वोत्तर की पार्टियां और मुख्यमंत्री भी मोदी सरकार के साथ हैं। चीन प्रकरण में बसपा प्रमुख व उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के सरकार के साथ खड़े होने पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा उन पर भाजपा के प्रवक्ता के तौर पर बयान देने का आरोप लगा चुकी हैं। उत्तर प्रदेश का एक अन्य प्रमुख दल सपा भी सरकार के साथ है। सिर्फ माकपा व भाकपा ही मोदी सरकार के साथ नहीं है, लेकिन वे भी कांग्रेस के समर्थन में नहीं दिख रहे हैं। चीन मुद्दे पर देश में भारी विरोध का माहौल बना है लेकिन कांग्रेस का चीन की बजाए मोदी पर हमलावर रुख लोगों को पसंद नहीं आ रहा। ऐसे में राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन से पैसा मिलने की बात सामने आने से कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ गई हैं और पार्टी लगातार चीन के मुद्दे पर अकेली पड़ गई है।

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