चाय बेचने वाले से लोकप्रिय नेता बने मोदी

अहमदाबाद, 16 मई (भाषा) भाजपा के  लालकृष्ण आडवाणी जैसे वरिष्ठ और वयोवृद्ध नेता तथा अन्य के विरोध का सामना करने के बावजूद 63 वर्षीय संघ प्रचारक मोदी ने सोलहवीं लोकसभा के चुनाव के लिए देशभर में ऐसा अथक अभियान चलाया जिस पर सवार होकर भारतीय जनता पार्टी ने अपना अब तक का सबसे बढिय़ा प्रदर्शन किया। देश की राजनीति में पिछले तीन दशक से मौजूद रही पार्टी अभी तक कभी इतनी शानदार जीत दर्ज नहीं कर पाई थी। एक कुशल योजनाकार मोदी ने, रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले से लेकर भारत का एक लोकप्रिय नेता बनने तक का सफर बड़ी सफलता से पूरा किया। हालांकि उनके बहुत से विरोधी उनके इस दावे से सहमत नहीं हैं। संघ परिवार की 'हिंदुत्व की प्रयोगशाला' माने जाने वाले राज्य गुजरात में मोदी ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी छवि एक कट्टरपंथी की बनाई थी जो लगातार तीन बार चुनाव दर चुनाव अपनी विजय का परचम लहराता रहा। हालांकि लोकसभा चुनाव में अल्पसख्यकों ,खासतौर पर मुसलमानों का समर्थन हासिल करने के लिए उन्होंने जानते बूझते अपनी कट्टर हिंदुत्ववादी छवि को त्याग दिया और अपना पूरा ध्यान विकास के मुद्दे , खासतौर से गरीब मुसलमानों के विकास पर केंद्रित किया। गुजरात के मेहसाणा के ऐतिहासिक वादनगर शहर में पिछड़े 'मोध घांची'(तेली) समुदाय में जन्मे मोदी का उभार एक असाधारण घटना है हालांकि उनके बहुत से विरोधी उनके पिछड़े समुदाय से संबद्ध होने की बात को भी नहीं मानते। गौतम बुद्ध और स्वामी विवेकानंद के जीवन और शिक्षाओं से सबक लेने वाले मोदी ने काफी युवावस्था में ही अपना वादनगर का घर छोड़ दिया था और एक प्रचारक के तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हो गए थे।

मोदी का ट्वीट भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने पार्टी को लोकसभा चुनाव में मिल रही जीत से उत्साहित होकर ट्वीट किया, भारत जीत गया। अच्छे दिन आने वाले हैं। मोदी ने गुजरात की वडोदरा लोकसभा सीट और यूपी की वाराणसी सीट से जीत दर्ज करने के बाद अपनी मां हीराबेन से मुलाकात की और पांव छूकर उनका आशीर्वाद लिया। मां ने मोदी के सिर पर हाथ फेरा और तिलक लगाकर उन्हें आशीर्वाद दिया। आम चुनावों में भाजपा  की शानदार जीत पर पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने मोदी को बधाई दी है।

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