घर की रौनक बंधनवार

शशि सिंघल

दीवाली के त्योहार पर घर की साफ-सफाई के बाद घर के मुख्य द्वारों पर बंधनवार न हो तो घर की सजावट में रौनक नहीं आती। बंधनवार यानी तोरण के अनेक रूप मार्केट में हैं। क्यों न इस बार द्वार पर खास अंदाज़ में करें लक्ष्मी जी का स्वागत। प्रयोग में बदलाव दीवाली के पर्व पर लोग बंधनवार खूब चाव से खरीदते हैं लेकिन आज इन्हें इस्तेमाल करने का ट्रेंड बदल गया है। जो बंधनवार पहले घर के मुख्य द्वार पर ही लगाए जाते थे, वह आज घर के अन्दर कमरों में विभिन्न तरीकों से लगाए जा रहे हैं। डिजाइन की भरमार बंधनवार के अनगिनत डिजाइन बाजार में उपलब्ध हैं। गत्ते पर चित्रित लक्ष्मी-गणेश की तस्वीरों, स्वास्तिक व शुभ-लाभ के अलावा सीपियों, मोतियों, शीशे, साटन रिबन, फूल, घंटियों और विभिन्न प्रकार की सामग्री से सुसज्जित व आकर्षक बंधनवार की भरमार है। बंधनवार न सिर्फ गत्ते पर तैयार होते हैं बल्कि अब तो ये साटन, शनील, बुकरम आदि विभिन्न प्रकार के कपड़ों तथा प्लाई पर तैयार किए जाते हैं। बंधनवार की लंबाई अमूमन सवा या डेढ़ मीटर रखी जाती है जबकि चौड़ाई का कोई साइज़ नहीं होता। चौड़ाई तो डिज़ाइन पर निर्भर करती है। रंगों का चयन त्योहार की महत्ता को देखते हुए रंगों का चयन भी खूब सोच समझ कर किया जाता है। यूं तो बाज़ार में बहुत से रंगों में बंधनवार मौजूद हैं। मगर पीले व नारंगी के अलावा लाल, हरे व गाढ़े रंगों का चलन अधिक दिखता है। वैसे मान्यता के अनुसार त्योहार पर पीले व नारंगी रंग शुभ का प्रतीक माने जाते हैं। कीमत भी ज्यादा नहीं इस महंगाई के दौर में कीमत की बात करें तो बंधनवार के मूल्य उनकी डिजाइन, उसमें प्रयुक्त सामग्री के हिसाब से रहते हैं। इनकी कीमत 50 रुपये से लेकर 500 रुपये तक रहती है। क्यों लगाते हैं बंधनवार हमारी पुरानी प्रचलित परम्परा में भी शामिल है और वास्तुशास्त्र की दृष्टि से भी शुभ प्रतीक है। हिन्दू शास्त्रों में किसी भी शुभ कार्य में तोरण लगाए जाने को अच्छा माना गया है। मुख्यतः धन की देवी माता लक्ष्मी का अपने घर में स्वागत करने व उन्हें प्रसन्न करने के लिए घर के मुख्य दरवाजों पर बंधनवार लगाने की परम्परा सदियों से चली आ रही है। ये बंधनवार घर की शोभा तो बढ़ाते ही हैं, साथ ही इनके बांधने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और शुभता का प्रवेश होता है। पारम्परिक बंधनवार पारम्परिक बंधनवार की बात करें तो पहले के समय में हर शुभ कार्य में आम या अशोक के पत्ते तथा गेंदे के फूलों से तैयार किए गये तोरण घरों के दरवाजों पर लगाए जाते थे। ये परम्परा आज भी जारी है। माना जाता है कि आम के पत्तों में एंटी बैक्टीरियल व एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टी होती है, जिससे घर में खुशियां आती हैं और बीमारियां दूर रहती हैं। इन्हें घर पर ही तैयार कर सकते हैं।

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