गूगल ने कड़ी की अपनी नीति

सान फ्रांसिस्को, 21 नवंबर (एजेंसी) गूगल ने इस अंदेशे के चलते कि, मतदाताओं को प्रभावित करने के इरादे से और गलत जानकारी फैलाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल हो सकता है, राजनीतिक विज्ञापनों के संबंध में अपनी नीति को सख्त बना दिया है। दरअसल इस सब के चलते इस तरह के प्लेटफॉर्म पहले से दबाव में हैं। कंपनी का कहना है कि उसके नियम किसी भी विज्ञापनदाता को गलत जानकारी देने से रोकते हैं चाहे वह विज्ञापनदाता राजनीति या किसी भी अन्य क्षेत्र से जुड़ा हो। अब वह अपनी नीति को और अधिक स्पष्ट बना रही है। गूगल के विज्ञापन उत्पाद प्रबंधन के उपाध्यक्ष स्कॉट स्पेंसर ने एक ऑनलाइन पोस्ट में कहा, ‘किसी भी विज्ञापनदाता का गलत दावे करना हमारी नीतियों के खिलाफ है। चाहे वह किसी कुर्सी की कीमत का विज्ञापन हो, या यह विज्ञापन हो कि आप टेक्स्ट मैसेज से मतदान कर सकते हैं या फिर चुनाव टल गया है या फिर ऐसा संदेश हो कि चुनाव में खड़े किसी उम्मीदवार की मौत हो गई है।’ जिन विज्ञापनों को प्रतिबंधित किया जा सकता है उनमें ऐसे विज्ञापन शामिल हैं जो ऐसे गलत दावे करते हैं जो मतदाता के विश्वास को कम करते हैं या फिर चुनाव में उनकी भागीदारी पर असर डालते हैं। गूगल में राजनीतिक विज्ञापनों को सर्च क्वेरी रिजल्ट के साथ जगह मिलती है और वीडियो सेवा यू-ट्यूब पर या वेबसाइट पर डिस्प्ले विज्ञापनों वाले स्थान पर रखे जाते हैं। गूगल आयु, लैंगिक तथा अन्य श्रेणियों के आधार पर राजनीतिक विज्ञापनों की पहुंच को भी सीमित कर देगा। सभी बदलावों को ब्रिटेन में हफ्तेभर के भीतर लागू कर दिया जाए्गा, पूरे यूरोपीय संघ में यह इस वर्ष के अंत तक लागू होंगे और बाकी दुनिया में 6 जनवरी से लागू किए जाएंगे। स्नेप ने इस हफ्ते पुष्टि की थी कि वह स्नेपचैट पर राजनीतिक विज्ञापनों पर नजर रखता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भ्रामक जानकारी तो नहीं फैलाई जा रही। पिछले हफ्ते ट्विटर ने भी कुछ ऐसा ही कदम उठाया था।

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