गुरु तेग बहादुर की यादगार धमतान साहिब

दलेर सिंह

जींद जिले के नरवाना उपमंडल में स्थित गुरुद्वारा धमतान साहिब श्री गुरु तेग बहादुर जी की याद में सुशोभित है। गुरु जी आगरा जाते हुए यहां पधारे थे। वे करीब 3 महीने यहां ठहरे और लोगों को सच्चाई के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। इस गुरुद्वारे के इतिहास से दो कथाएं जुड़ी हैं। एक है भाई रामदेव की, जो यहां आने वाली संगत को पानी पिलाने, लंगर के लिए पानी भरने और पानी के छिड़काव करने की सेवा करते थे। एक दिन भाई रामदेव ने गुरु घर में इतना पानी छिड़का, जैसे बारिश हुई हो। गुरु जी ने खुश होकर भाई रामदेव को ‘भाई मीहां’ (मींह यानी बारिश) के नाम से पुकारना शुरू कर दिया। गुरु जी ने उन्हें गुरु घर की तरफ से एक नगाड़ा और निशान साहिब भेंट किया। दूसरी कथा किसान दग्गो से जुड़ी है। संगत ने गुरु जी को काफी माया भेंट की थी। गुरु जी ने वह माया दग्गो की सौंपते हुए यहां गुरु घर (धर्मशाला) और संगत के लिए कुआं बनवाने को कहा। लेकिन, गुरु जी के जाने के बाद दग्गो ने वह पैसा अपना मकान बनाने और अपने खेत में कुआं बनाने पर खर्च कर दिया। बाद में एक दिन दिल्ली में अचानक गुरु जी से उसकी मुलाकात हो गयी। गुरु जी ने उससे गुरु घर और कुएं के बारे में पूछा तो दग्गो ने बताया कि लालच में आकर उसने वह पैसा अपने मकान और कुएं पर खर्च कर दिया। गुरु जी ने उसकी गलती माफ करते हुए उससे कहा कि खेत में कभी तंबाकू की खेती न करना, न ही मकान में तंबाकू रखना। लेकिन, दग्गो ने यह बात नहीं मानी। बाद में जब गुरु जी वापस यहां आये और उन्हें इस बारे में पता चला। माना जाता है कि इसके बाद दग्गो का वह मकान और खेत वीरान हो गया। गुरु तेग बहादुर जी की ‘श्री साहिब’ इस गुरुद्वारे में अब भी मौजूद है। तख्त श्री हुजूर साहिब नांदेड़ जाने वाली संगत इस स्थान पर दर्शन करके जाती है। गुरुद्वारा परिसर में सरोवर भी है,जहां श्रद्धालु स्नान करते हैं।

खटकड़ की बुझाई प्यास जींद जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर गांव खटकड़ में भी गुरु तेग बहादुर जी की याद में बना ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। गुरुद्वारे के ग्रंथी स्वर्ण सिंह ने बताया कि गुरु तेग बहादुर जी आनंदपुर साहिब से दिल्ली-आगरा जाते हुए, रास्ते में जींद जिले के गांव धमतान साहिब, खरक भूरा होते हुए खटकड़ भी आये थे। अपने पड़ाव के दौरान वे जहां-जहां भी ठहरे, उन्होंने लोगों को गुरु नानक देव जी के उपदेशों पर चलने की प्रेरणा दी। खटकड़ गांव के लोगों ने गुरु जी को बताया कि यहां का पानी कड़वा है। कथा है कि लोगों की विनती सुनकर गुरु जी ने आशीर्वाद दिया और भूमिगत पानी का कड़वापन दूर हो गया। कई अन्य कथाएं भी इस गुरुद्वारे से  जुड़ी हैं।

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