गुमनाम हुए जो गायक

असीम चक्रवर्ती

इधर लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, जतिन-ललित, अनु मलिक, कुमार शानू, अलका याज्ञिक, उदित नारायण, कविता कृष्णमूर्ति आदि फिल्म संगीत के पंडितों को रियलिटी शो में चीफ गेस्ट के तौर पर देखना बेहद सुखद लग रहा है। यदि हम चैनल के सूत्रों की बात पर यकीन करें तो उनके आने से म्यूजिक के रियलिटी शो की टीआरपी में एक बड़ा उछाल आ जाता है। अब देखिए न इन दिनों ज्यादातर चैनल अपने शो में किसी न किसी पुरानी दिग्गज म्यूजिकल हस्ती को अपने साथ ज़रूर जोड़ते हैं। और यह जब भी आते हैं तो अपने साथ संगीत का एक कर्णप्रिय खजाना भी साथ ले आते हैं। ज्यादा नहीं तो 90 के कुछ दिग्गज गायक कलाकरों की बात करें तो अलका, उदित, कुमार शानू, अभिजीत आदि के गाने किसी रियलिटी शो में बजते हैं तो उसकी टीआरपी स्वतः ही बढ़ जाती है। फिर क्या बात है कि इन हिट गायकों को इधर बहुत उपेक्षित रखा गया है। कभी साल में चालीस-पचास फिल्मों में गाना गाने वाले ये गायक आज मुश्किल से साल में एकाध फिल्मों में ही गाना गाते हैं। फिर भी खुश हैं उदित अभी हाल में मुंबई एयरपोर्ट में गायक उदित नारायण मिल गये। हमेशा की तरह वही हंसमुख चेहरा। पता चला वह एक तमिल फिल्म के गाने की रिकाॅर्डिंग के सिलसिले में चेन्नई जा रहे हैं। उदित को देखकर कई पुरानी यादें ताज़ा हो जाती हैं। एक दौर था, जब हर बड़ी फिल्म में उनके दो-तीन गाने ज़रूर होते थे। मगर पिछले छह-सात साल से ऐसा हो रहा है जब साल में न के बराबर हिंदी फिल्मों में उनकी आवाज़ सुनने को मिल रही है। नये गायकों को मौका देने के नाम पर आज के नये संगीतकारों ने उन्हें लगभग उपेक्षित कर रखा है। पर किसी भी तरह के दोषारोपण से दूर उदित बताते हैं,‘मैंने शुरू से ही अपने गायन को किसी भाषा के दायरे में कैद नहीं किया। असल में मेरे गायन कॅरियर की शुरुआत ही नेपाली फिल्मों के गायन से हुई थी। इसके बाद हिंदी के अलावा मैंने मैथिली, कन्नड़, मराठी, बंगाली, असमी, तमिल, तेलुगू, मलयालम, भोजपुरी, गढ़वाली, सिंधी, पंजाबी आदि देश की हर भाषा में गाने गाये। यह सिलसिला आज भी जारी है। मैंने कभी यह नहीं सोचा कि मुझे सिर्फ बाॅलीवुड की फिल्मों में ही गाना है। मुझे तो गाने के जो भी आॅफर मिलते हैं, मैं उसे एक चैलेंज की तरह कबूल कर लेता हूं।’ उल्लेखनीय है कि पिछले दो-तीन साल से वह हर साल दो-तीन फिल्मों में ज़रूर गा लेते हैं। इस साल फिल्म सुपर-30 के लिए गाया उनका एक गाना जुगराफिया काफी पसंद किया गया है। लगातार व्यस्त हैं शानू सिर्फ उदित ही नहीं, कभी ढेरों हिट फिल्मी गीत गाने वाले अभिजीत, कुमार शानू, सोनू निगम, एसपी. बाला सुब्रमण्यम, सुरेश वाडकर, अलका याज्ञनिक, कविता कृष्णामूर्ति, पूूर्णिमा, साधना सरगम आदि गायकों का भी यही हाल है। अब जैसे कि कभी एक दिन में 28 गाने रिकाॅर्डिग करने वाले कुमार शानू भी इन दिनों साल में बमुश्किल दो-तीन हिंदी फिल्मों में गाते हैं। एक तरह से हिंदी फिल्मी गायन से उनका पूरा पलायन हो चुका है। अब यह दीगर बात है कि फिल्म ‘दम लगा के हईशा’ में उनका और साधना सरगम का गाया एक ही गाना ‘तू है मेरी प्रेम की भाषा’ जबरदस्त हिट होता है। अंधेरी स्थित अपने रिकाॅर्डिंग स्टूडियो में वह बताते हैं, ‘कुछ संगीतकारों को लगता है कि मेरा पलायन हो चुका है। जबकि मैं लगातार व्यस्त हूं। बंगला फिल्मों के लिए मैं बराबर गा रहा हूं। इसके अलावा भोजपुरी, तमिल, तेलुगू आदि हर भाषा के गानों को लेकर व्यस्त हूं। सीधी सी बात है कि मैं गायक हूं, गाना नहीं गाऊंगा, तो क्या करूंगा। रियलिटी शो में मेरी लोकप्रियता देखकर आपको इसका अंदाज़ा हो ही जाएगा।’ साधना को कोई शिकायत नहीं दूसरी ओर गायिका पूर्णिमा भी नेपाली और मराठी फिल्मों में गाना गाकर संतुष्ट है। कई हिट गाने, गाने वाली गायिका साधना सरगम का रिश्ता हिंदी फिल्मों से लगभग टूट चुका है। मगर तमिल फिल्मों में उनके गायन को खूब पसंद किया गया है। यहां की फिल्मों के लिए वह अक्सर गाती रहती हैं। साधना कहती है, ‘मुझे कोई अफसोस नहीं है। मैं हर तरह के गाने गा सकती हूं, यह मैंने एक नहीं, कई बार साबित कर दिखाया है। अब हिंदी न सही, साउथ के म्यूजिक डायरेक्टरों ने मेरे टेलेंट को समझा है। ऐसे में जब हिंदी फिल्मी गानों के प्रस्ताव मिलते हैं तो एक अलग तरह की खुशी मिलती है।’ शास्त्रीय की मुरीद कविता साफ है कि हिंदी फिल्मी गायन में टेलेंट का कद निरंतर छोटा हुआ है। वरना कविता कृष्णमूर्ति, अलका याज्ञनिक, अनुराधा पौडवाल जैसी गायिका को यूं पिछली सीट में न बिठा दिया जाता। कविता भी दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के लिए खूब गा रही हैं। कविता बताती हैं, ‘मैं चूंकि क्लासिकल म्यूजिक को लेकर ज्यादा बिजी रहती हूं, इसलिए हिंदी के क्लासिकल बेस्ड गाने में ही मेरी रुचि है। इन दिनों हिंदी फिल्मों में जो हो-हुल्लड़ वाले गाने आ रहे हैं,उन्हें गाने की मेरी ज़रा भी इच्छा नहीं है। मुझे बड़ा ताज्जुब होता है, इधर हर हिट फिल्म के साथ एक नया गायक आ रहा है। मगर एक-डेढ़ साल बाद ही उसका कुछ पता नहीं चलता। मगर हमारी स्थिति इस तरह से कभी डगमग नहीं हुई। हम बराबर सिर्फ म्यूजिक को लेकर बिजी हैं।’ अलका का ध्येय अलका याज्ञनिक की आवाज हिंदी फिल्मों में अब कम ही सुनने को मिलती है मगर दूसरी भाषाओं की फिल्मों के लिए वह लगातार गा रही हैं। अलका कहती है, ‘मेरा तो एक ही ध्येय है-लगातार गाते रहिए। आप लता दीदी की बात जाने दीजिए, उनके अलावा उस दौर के ज्यादातर गायकों ने तीन-तीन दशक तक श्रोताओं पर राज किया, लगातार उनके गाने रिकाॅर्ड होते रहे। और यह सब उनकी काबिलियत का सुफल था। मैं भी उसी दिशा में आगे बढ़ना चाहती हूं। हिंदी न सही, क्षेत्रीय भाषाओं के गानों को ही मैंने एक चैलेंज की तरह लिया है क्योंकि मैंने कभी नहीं चाहा था कि आज के ज्यादातर नये गायक कलाकारों की तरह तीन फिल्मी हिट गाने गाकर मैं भी गुम हो जाऊं। और बाद में वही तीन हिट गाने स्टेज शो में गाती फिरूं। मैं जानती हूं कि मेरी आवाज़ की जो रेंज है, उसमें कुछ अलग टाइप के गाने बहुत मेल खाते हैं, मगर ज्यादातर मौकों पर ये गाने भी मेरी बजाय किसी अपरिपक्व गायिका से गवा लिये जाते हैं। कभी-कभी तो कुछ संगीतकार ये गाने खुद पर ही फिट कर लेता है। इससे पता चलता है कि आज का संगीतकार म्यूजिक को लेकर कितना फिक्रमंद है। मुझे इसी बात का दुख है।’ देखा जाये तो कई अच्छे गायकों के पलायन की वजह भी यही उपेक्षा बनी है। सलमान ने नाता तोड़ा आज सुपर स्टार सलमान भले ही कितना इतराएं, पर यह कटु सच है कि इधर कई सालों से उनकी फिल्मों के गाने टाइम पास तो बने हैं पर यादगार नहीं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि कुछ गुणी गायकों से उन्होंने पूरी तरह से अपना नाता तोड़ लिया है। सिर्फ सलमान ही क्यों, कभी शाहरूख के लिए ढेरों अच्छे गाने, गाने वाले गायक कुमार शानू, उदित, अभिजीत, सोनू, शान जैसे गायक भी शाहरूख से बहुत दूर जा चुके हैं। सलमान खान के साथ भी ऐसा हुआ है। आज किसी भी गायक की आवाज सलमान के साथ फिट कर दी जाती है। वरना सलमान के साथ सबसे ज्यादा एसपी बालासुब्रह्मण्यम की उम्दा आवाज मेल खाती है। याद कीजिए उनकी दो सफल फिल्मों मैने प्यार किया और हम आपके हैं कौन को, इनमें सलमान पर फिल्माये गये बाला सुब्रह्मण्यम के सारे गाने आज तक संगीत रसिकों को अच्छी तरह से याद हैं। लेकिन विडंबना देखिए कि अब उसी सफल गायक को सलमान से कितना दूर कर दिया गया है। बालासुब्रह्मण्यम इस दुख को व्यक्त नहीं करना चाहते। उन जैसे शास्त्रीय आवाज रखने वाले गायक को यह शोभा भी नहीं देता। दूसरी ओर आज आलम यह है कि सूरज बड़जात्या की फिल्म हिमेश रेशमिया उनकी आवाज़ हैं। म्यूजिक लाॅबी ने कबाड़ा किया कई संगीत मर्मज्ञ मानते हैं कि आज के फिल्म संगीत को कबाड़ा करने में म्यूजिक लाॅबी का बड़ा हाथ रहा है। इसके विस्तार में जाने का कोई औचित्य नहीं है। शानू, अभिजीत, सोनू, उदित आदि कई उम्दा गायक इसी म्यूजिक लाॅबी के चलते फिल्मी गायन के एकदम हाशिए में खड़े कर दिये गये हैं। शाहरूख के लिए पहला हिट गाना देने वाले गायक विनोद राठौड़ बताते हैं,‘ शाहरूख जब भी मिलते हैं, उन्हें यह याद दिलाने की जरूरत नहीं पड़ती कि उनकी पहली बड़ी हिट फिल्म दीवाना के गाने मैंने गाये थे। मैं भी एक ऐसा गायक हूं, जिसकी आवाज शाहरूख से बहुत मेल खाती थी। लेकिन इसके बाद शाहरूख ने दर्जनों फिल्मों के लिए गाने गवाये पर उनमें मैं न के बराबर मौजूद था।’ देखा जाए तो नब्बे के दशक के कई हिट गायकों का यही दर्द है कि कई बड़े सितारों ने सफलता मिलते ही उनकी उपेक्षा की है।

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