खुशियां बांटने का बड़ा दिन

खुशियां बांटने का बड़ा दिन

सीताराम गुप्ता

ईसा मसीह के जन्मदिन को ‘बड़ा दिन’ कहा जाता है। ‘बड़ा’ इसलिए, क्योंकि समाज के उत्थान में ईसा मसीह का योगदान महान है, बड़ा है। उन्होंने सच्चाई और स्पष्टता का मार्ग चुना और लोगों को इसी मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति बुरा नहीं होता। कोई भी व्यक्ति पूर्णतः निर्दोष नहीं होता, अतः हमें पापी व्यक्ति से नहीं, पाप से घृणा करनी चाहिए। गलतियां किसी से भी हो सकती हैं, अतः हममें क्षमाभाव अवश्य होना चाहिए। क्षमा के अभाव में मनुष्य शैतान बन जाता है। सच्चाई के लिए ईसा मसीह ने न केवल सूली पर चढ़ना स्वीकार कर लिया, बल्िक सूली पर चढ़ाने वालों को माफ भी कर दिया। संसार में ऐसा उदाहरण मिलना मुश्किल है। उनके जीवन व संदेशों का महत्व याद दिलाने के लिए ही उनका जन्मदिन हर वर्ष क्रिसमस के रूप में मनाया जाता है। क्रिसमस बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, क्योंकि ईसा मसीह लोगों के जीवन को खुशियों से भर देना चाहते थे। वैसे तो क्रिसमस का संबंध ईसाई धर्म से है, इसका धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। लेकिन, आज क्रिसमस जिस रूप में मनाया जाता है, वह धर्म-संप्रदाय की सीमाओं से न जाने कब का ऊपर उठ चुका है। आज ईसाई समुदाय के लोग ही नहीं, सभी लोग इसके आयोजन में बढ़-चढ़ कर भाग लेते हैं। बच्चों का तो यह अत्यंत प्रिय उत्सव है। केक किसको पसंद नहीं? उपहारों का लेनदेन किसे प्रसन्नता नहीं देता? सांता क्लाॅज का नाम लेते ही बच्चों के मुख की प्रसन्नता कई गुना बढ़ जाती है। क्रिसमस ट्री सजाने में बच्चे तो बच्चे, बड़े भी कहां पीछे रहते हैं? सभी बच्चे ही तो बन जाते हैं। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह किस मज़हब का त्योहार है। उन्हें तो बस क्रिएटिविटी चाहिए, धूम-धड़ाका और खाने-पीने की नयी-नयी चीज़ें चाहिए। चारों तरफ चहल-पहल हो, खाने के लिए लज़ीज़ व्यंजन हों, उल्लास का परिवेश हो और काम से फुर्सत मिल जाए, इसके अतिरिक्त और क्या चाहिए आदमी को खुश होने के लिए? क्रिसमस का आयोजन उसे यह सब उपलब्ध करवाता है। क्रिसमस विशेष रूप से उल्लास का पर्व है। अब क्रिसमस हो या अन्य कोई त्योहार, सभी हमें आनंद प्रदान करते हैं। आनंद की अवस्था में हमारे शरीर में तनाव कम करने वाले और रोग अवरोधक क्षमता उत्पन्न करने वाले हार्मोंस या रसायन उत्सर्जित होते हैं, जो हमें स्वस्थ बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं। इस प्रकार त्योहारों के आयोजन का सीधा संबंध हमारे उत्तम स्वास्थ्य तथा रोगमुक्ति से है। धर्म व आध्यात्मिकता के विकास के साथ-साथ क्रिसमस हमें खुशी प्रदान कर, तनावमुक्त कर, स्वस्थ व प्रसन्न बनाए रखने का एक उपक्रम है, इसमें संदेह नहीं। त्योहार का शाब्दिक अर्थ भी खुशी ही है। वस्तुतः आनंद मन का एक भाव है, अतः त्योहार मनाने का संबंध मन से होना चाहिए। लेकिन, आज त्योहार मनाना बहुत जटिल कार्य हो गया है। जटिलता में आनंद कहां और आनंद के अभाव में शरीर मेें लाभदायक रसायनों का उत्सर्जन अथवा स्वास्थ्य असंभव है। स्वास्थ्य के अभाव में आनंद कहां? सच्चा आनंद तो मन की प्रसन्नता में ही है। स्वयं भी प्रसन्न रहो और दूसरों को भी प्रसन्नता प्रदान करो। त्योहारों के माध्यम से यह बखूबी किया जा सकता है, लेकिन यह तभी संभव है जब हम आडंबररहित होकर सादगी से त्योहार मनाना सीख लें। अलगाव के वातावरण में यदि हम ईसा मसीह की शिक्षाओं अथवा संदेशों पर अमल करने का प्रयास करें, तो यह खूबसूरत दुनिया और अधिक खूबसूरत हो जाए, इसमें संदेह नहीं।

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