खुशनुमा होगा ज़िंदगी का गणित

प्रोफेशनल और ऑफबीट कोर्सों के अलावा हमारे कुछ परंपरागत क्षेत्र नये प्रारूप के साथ छात्रों को करिअर बनाने के कई मौके देते हैं। रोजगार देने के मामले में तो इनका कोई सानी नहीं है। मैथमेटिक्स की भी हमारे देश में पुरानी परम्परा रही है। विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं में इसका बहुतायत में प्रयोग किया जाता है। तकनीकी क्षेत्र में भी मैथमेटिक्स प्रोफेशनल्स की ज़रूरत तेज़ी से बढ़ती जा रही है।

मैथमेटिक्स यानी गणित की पढ़ाई आसान नहीं है, लेकिन जो लोग इस विषय में रुचि रखते हैं और जिनका मैथ अच्छा है, उनके लिये इस क्षेत्र में रोज़गार और करिअर के अवसर कम नहीं हैं। मैथ में पढ़ाई करने के बाद फाइनेंशियल सर्विस कंपनी, रिसर्च लैब ऑफ मल्टीनेशनल कंपनी के अलावा किसी भी कंपनी में नौकरी पा सकते हैं। अगर टीचिंग में रुचि है तो किसी भी स्कूल और कॉलेज में टीचर के तौर पर करिअर की शुरुआत कर सकते हैं। इसरो, डीआरडीओ, एरोनॉटिकल रिसर्च, आईबीएम, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, फेसबुक जैसी कंपनियों में मैथमेटिशियन के तौर पर करिअर शुरू कर सकते हैं। अगर 12वीं तक मैथ पढ़ा है तो देश के किसी भी संस्थान से इसमें ग्रेजुएशन कर सकते हैं। बीएससी, बीटेक, इंटीग्रेटेड बीएससी-बीएड, बीएस, इंटीग्रेटेड एमएससी, एम.मैथ, एमटेक, इंटीग्रेटेड एमएससी, पीएचडी जैसे कोर्स के ज़रिए एक्सपर्ट बन सकते हैं। कब करें शुरुआत आमतौर पर मैथमेटिक्स से संबंधित कोर्स 12वीं के बाद किए जा सकते हैं, लेकिन बैचलर कोर्स के बाद किए जाने वाले कोर्सों की मांग अधिक है। 12वीं के पश्चात जहां बीए/बीएससी (मैथ) अथवा बी मैथ में प्रवेश मिलता है, वहीं बैचलर के पश्चात एमए/एमएससी (मैथ) अथवा एम. मैथ में दाखिला ले सकते हैं। अगर मास्टर करते हैं तो उसके पश्चात पीएचडी की राह आसान हो जाती है। इससे संबंधित बीटेक और इंट्रिग्रेटेड कोर्स भी हैं। ये कोर्स बारहवीं के बाद किए जाते हैं। इसमें कई संस्थान ग्रेजुएट कोर्स के लिये बारहवीं में उच्च प्रतिशत अंकों के आधार पर दाखिला देते हैं। दृष्टिकोण स्पष्ट रखें मैथमेटिक्स का हर जगह इस्तेमाल होता है। यह सब्जेक्ट पढ़ने में तभी रुचि बढ़ती है, जब छात्र अपना कांसेप्ट क्लीयर रखें। हालांकि पहले की अपेक्षा छात्रों का रुझान मैथमेटिक्स की ओर बढ़ा है। खासकर लड़कियों की बड़ी जमात इस सब्जेक्ट की ओर आकर्षित हुई है। आज लड़कों की तुलना में उनकी संख्या बराबर है। अक्सर लोग सांख्यिकी (स्टेटिस्टक्स) और मैथ को एक ही मान बैठते हैं, जबकि दोनों में काफी अंतर है। सांख्यिकी पूरी तरह से मैथ पर आधारित है। बिना मैथ के सांख्यिकी का कोई वजूद नहीं है। जो भी छात्र इस क्षेत्र में कदम रखना चाहते हैं, उन्हें इस बात को ध्यान में रखना होगा कि कड़ी मेहनत के दम पर ही कामयाबी मिल सकती है। रोज़गार के मौके सरकारी व प्राइवेट विभाग में बैचलर और मास्टर्स के बाद मैथमेटिक्स का कोर्स करने वाले लोगों को रोज़गार के मौके मिलते हैं। टेलीविजन नेटवर्क फर्म, फार्मास्यूटिकल एजेंसी, फाइनेंस या इंश्योरेंस कंपनी, केमिकल इंडस्िट्रयल यूनिट जैसी जगहों पर डिज़ाइन, एनालिसिस, सर्वेक्षण के लिए मैथमेटिक्स प्रोफेशनल्स की ज़रूरत होती है। इसके अलावा मार्केट रिसर्च, फाइनेंशियल एनालिसिस, एक्चूरियल सर्विस, कैपिटल मार्केट्स में भी अवसर हैं। शैक्षिक संस्थानों में टीचिंग व रिसर्च का विकल्प है। कोचिंग अथवा संस्थान खोलकर अपनी सेवाएं दे सकते हैं तो विदेशों में भी रोज़गार के कम मौके नहीं हैं। बैंकिंग के लिये तैयारी कर सकते हैं। आमदनी मैथमेटिक्स प्रोफेशनल्स को शुरुआती दौर में 20-25 हजार रुपए महीना सैलरी मिलती है। इस क्षेत्र में चार-पांच साल के अनुभव के पश्चात 80-90 हजार रुपए प्रति माह कमा सकते हैं। टीचिंग के प्रोफेशन में हैं तो भी 70-80 हज़ार रुपए महीना आसानी से कमा सकते हैं। इसके अलावा कुछ और प्रोफेशन चुनकर भी करिअर में कामयाबी का तमगा जोड़ा जा सकता है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर सॉफ्टवेयर डिजाइन करने और उसे डेवलप करने के काम में कम्यूटर साइंस व मैथ की थ्योरी व उनके सिद्धांतों का प्रयोग होता है। इस क्षेत्र के प्रोफेशनल्स के लिए काफी संभावनाएं मार्केट में हैं। चार्टर्ड एकाउंटेंट एकाउंटिंग, ऑडिटिंग व टैक्सेशन से जुड़े इस प्रोफेशन में शानदार भविष्य है। फाइनेंस एवं एकाउंट से जुड़े क्षेत्रों में जॉब्स की कमी नहीं है। मैथ इसमें काफी मददगार होता है। मैथमेटिशियन मैथमेटिशियन का संबंध ऐसे प्रोफेशनल्स से है, जो मैथ्स के आधारभूत क्षेत्रों का अध्ययन या रिसर्च करते हैं। ये लॉजिक, स्पेस, ट्रांसफार्मेशन, नंबर जैसी समस्याओं का निर्धारण करते हैं। बैंकिंग बैंकिंग सेक्टर में भी मैथमेटिक्स प्रोफेशनल्स की काफी डिमांड है। कोर्स के पश्चात वे एकाउंटेंट, कस्टमर सर्विस, फ्रंट डेस्क, कैश हैंडलिंग, एकाउंट ओपनिंग, करंट एकाउंट, सेविंग एकाउंट, लोन प्रोसेसिंग ऑफिसर, सेल्स एग्जीक्यूटिव, रिकवरी ऑफिसर आदि के रूप में काम कर सकते हैं। इन सभी में मैथमेटिकल स्किल्स का होना ज़रूरी है। ऑपरेशन रिसर्च एनालिस्ट ऑपरेशन रिसर्च को एप्लाइड मैथ और फॉर्मल साइंस की एक शाखा के तौर पर समझा जा सकता है। इसमें मैथमेटिकल मॉडलिंग, स्टैटिस्टिकल एनालिसिस और मैथमेटिकल ऑप्टिमाइजेशन का प्रयोग होता है। ऑपरेशन रिसर्च एनालिस्ट इन्हीं आधुनिक विधियों के ज़रिए मैनेजर को सही निर्णय लेने और समस्याओं के समाधान के लिए सुझाव देते हैं। शिक्षण टीचिंग का क्षेत्र बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। स्कूलों में भी मैथ के टीचरों की डिमांड हमेशा रहती है। ऐसे कई मैथ टीचर हैं, जो कोचिंग व टय़ूशन के रूप में अच्छी आमदनी करते हैं। कम्प्यूटर सिस्टम एनालिस्ट संबंधित प्रोफेशनल्स आईटी टूल्स का उपयोग करते हुए किसी भी एंटरप्राइजेज को टारगेट पूरा करने में मदद करते हैं। ज्यादातर सिस्टम एनालिस्ट अपना काम एक विशेष कम्प्यूटर अथवा सॉफ्टवेयर के ज़रिए करते हैं। इसका सीधा फायदा संस्थान को पहुंचता है। कहां से करें कोर्स सेंट स्टीफन्स कॉलेज, नई दिल्ली वेबसाइट- www.ststephens.edu हरीश्चन्द्र रिसर्च इंस्टीटय़ूट, इलाहाबाद (प्रयागराज) वेबसाइट- www.hri.res.in द इंस्टीटय़ूट ऑफ मैथमेटिकल साइंसेज, चेन्नई वेबसाइट- www.imsc.res.in इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीटय़ूट, नई दिल्ली वेबसाइट- www.isid.ac.in (कोलकाता, बेंगलुरु, चेन्नई व तेजपुर आदि कई जगहों पर सेंटर मौजूद) टाटा इंस्टीटय़ूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, बेंगलुरु वेबसाइट- www.tifr.res.in इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु वेबसाइट- www.iisc.ernet.in

प्रमुख कोर्स

बीए/बीएससी (मैथ) 3 वर्ष बीमैथ 3 वर्ष बीटेक 4 वर्ष एमए/एमएससी (मैथ) 2 वर्ष एममैथ 2 वर्ष एमटेक 2 वर्ष पीएचडी 3 वर्ष

इन स्किल्स की ज़रूरत

क्रिटिकल थिंकिंग प्रॉब्लम सॉल्विंग एनालिटिकल थिंकिंग क्वांटिटेटिव रीज़निंग कम्युनिकेशन स्किल्स टाइम मैनेजमेंट

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