खुद भी शिष्टाचार अपनाएं

मोनिका अग्रवाल

आज हम बात करेंगे अपने प्रति शिष्टाचार की। सभ्य व्यवहार समाज के लिए ही नहीं, अपने लिए भी ज़रूरी है। खुद के व्यक्तित्व का विकास देखते हैं वह क्या-क्या है। 0 जब कोई आपसे आपका नाम पूछे या आप कहीं अपना नाम लिख रहे हों तो खुद अपने नाम के आगे श्रीमान या श्रीमती जैसे शब्दों का प्रयोग न करें। 0 आपके नाम का ईमेल या पत्र आता है तो जवाब अवश्य दें। 0 यदि आप किसी व्यक्ति से कोई वस्तु पकड़ रहे हैं या उसको दे रहे हैं तो हमेशा दाएं हाथ का प्रयोग करें। 0 बड़ों की सेवा या परिजनों की सेवा परम धर्म है लेकिन किसी की अनावश्यक सेवाएं लेना अधर्म है। किसी का उपकार मत लो। 0 सच बोलने के अलावा अपनी और आसपास की साफ-सफाई रखें, सदाचार भी अवश्य अपनायें। 0 किसी की वस्तु जो गिर गयी है तो उसी को वापस दे दो। यदि कोई व्यक्ति आपकी गिरी हुई वस्तु को उठाकर दे तो उसे धन्यवाद दो। आपको कोई धन्यवाद दे तो नम्रता प्रकट करो। 0 अपने प्रति जैसा व्यवहार आप स्वयंं से चाहतेे हैं वैसा ही व्यवहार आप सामने वाले के साथ भी करें। मान लीजिए आप भीड़ में खड़े हैं और ऐसे में किसी को आपका पैर या धक्का लग जाये तो उससे क्षमा मांगो। यदि कोई आपसे क्षमा मांगे तो विनम्रतापूर्वक उत्तर देना चाहिए। 0 कोई कुछ पूछे तो नम्रतापूर्वक उसे उत्तर दें। 0 बात-बात पर झूठ न बोलें। कुछ लोगों में आदत होती हैै कि छोटी-छोटी बातों में कसमें खाते हैं या देते हैं, ऐसा न करें। 0 असभ्य भाषा या आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग ना करें। 0 यदि आप किसी के यहां अतिथि बनें तो ऐसा व्यवहार करें कि उस घर के लोगों को आपके लिये कोई विशेष प्रबन्ध न करना पड़े। 0 आपने किसी से कोई वस्तु ली है तो उसे सुरक्षित और जल्दी वापस दें। जिस दिन के लिये वस्तु लौटाने को कहा गया हो, उससे पहले ही उसे लौटा देना उत्तम होता है। 0 किसी के घर जाते या आते समय द्वार बंद करना मत भूलें। किसी की कोई वस्तु उठायेें तो उसे फिर से यथास्थान रख देना चाहिए। 0 कहने को तो यें शिष्टाचार की छोटी-छोटी बातें हैं, लेकिन ये बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। व्यक्ति अपने अच्छे आचरण से सबका स्नेह और आदर पाता है।

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