खाते-खाते दें सीख

सुभाष चंद्र

क्या कर रहो हो बेटा? इस तरह से खाना नहीं खाते। पूरी कोशिश करो कि खाना खाते समय मुंह से आवाज नहीं के बराबर हो। ये गुड मैनर्स नहीं है। ठीक है मम्मी। आगे से ध्यान रखूंगा। संभव है मां-बेटा के बीच ऐसी बातचीत आपने भी सुनी हो। आपके घर में भी हुआ हो। बच्चा है, उसे सिखाना मां-बाप और अभिभावक का काम है। खाने का टेबल केवल खाने के लिए नहीं होता है। खाने के टेबल पर कई तरह की बातचीत होती है। ऐसे में डिनर टेबल एक बेहतरीन मौका देता है आपको कि अपने संबंधों को प्रगाढ़ कर सकें। अपने बच्चों के साथ दिनभर की थकावट को दूर भगाएं। बच्चे जब चार-पांच साल के हों तभी से इसका ख्याल रखें, जिससे उनके व्यक्तित्व का पूरी तरह से विकास हो। एक्सपर्ट्स का कहना है कि डाइनिंग टेबल पर कही गई सभी बातें बच्चों के दिमाग पर गहरा प्रभाव डालती हैं। इसलिए इस दौरान पेरेंट्स को उतनी ही सोच समझकर बातें बोलनी चाहिए, जितनी सोच समझकर आप डाइनिंग टेबल पर खाने के आइटम रखते हैं।

बच्चों पर रखें विशेष ध्यान बच्चों को बिना आवाज के खाना खाना सिखाएं। ज्यादा मुंह भरकर खाना न खिलाएं, निवाला सिर्फ उतना ही डालें, जितना वह आराम से खा सके। इसके अलावा प्लेट भरकर खाना न डालें, दोबारा जरूरत पड़ने पर खाना दोबारा सर्व करें। डाइनिंग टेबल पर बैठते समय बच्चे को इस बात की जानकारी जरूर दें कि कौन सा बर्तन किस तरीके से इस्तेमाल करना है। बड़े चम्मच को सूप और कटोरी का इस्तेमाल ग्रेवी वाली सब्जी के लिए किया जाता है।

आपका हो खास फोकस अपने बच्चे को खाने के तौर तरीके सिखाना न भूलें। जब आप अपने बच्चों के साथ टेबल पर खाना खाने बैठें तो उन्हें बताएं कि फॉर्मल लंच या डिनर के दौरान जब तक होस्ट यानी मेजबान न कहे, तब तक बैठना नहीं चाहिए। डाइनिंग टेबल मैनर्स का सबसे पहला उसूल है मेजबान की सेटिंग को बनाए रखना। इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि ग्लास-प्लेट वगैरह नियत स्थान पर ही रखा जाए। युवावस्था में उन्हें जो चीजें सिखाई जाएंगी वह उनके साथ जीवन भर रहेंगी। इससे व्यक्ति के चरित्र का पता चलता है। साथ ही यह एक सामाजिक शिष्टाचार भी है। डाइनिंग टेबल पर खाना खाने के लिए बच्चों को साथ बिठा रहे हैं तो इस बात का ख्याल रखें कि उनकी कुर्सी आरामदायक हो। कुर्सी की ऊंचाई बच्चे की हाइट के मुताबिक हो, जिससे वह आराम से बैठ सके। बड़ों का सम्मान एक ऐसा आचरण है जो धीरे-धीरे समाज से खत्म हो रहा है। अपने बच्चे को अच्छे आचरण सिखाते समय इस बात का ध्यान ज़रूर रखें कि वे जूठे हाथ से बर्तनों को न इधर-उधर न करें।

इन पर भी रखें ध्यान जब मुंह में खाना हो तो बात नहीं करनी चाहिए। फोर्क को बाएं ओर और नाइफ को दाएं ओर रखें। मुंह फाड़कर चबाने से भद्दा कुछ नहीं होता है। बेशक होस्ट आपको उस टाइम कुछ नहीं कहेगा, लेकिन बाद में आप मजाक के पात्र बनेंगे। ध्यान रखें कि मुंह कोई गोदाम नहीं है। छोटी बाइट्स लेना ज्यादा ठीक रहता है।

तारीफ करने की आदत डलवाएं अपने बच्चे में इस बात की आदत भी डालें कि खाने के बाद खाना बनाने वाले की तारीफ भी करे। असल में, पेरेंट को बच्चे के अच्छे व्यवहार और तरह-तरह के प्रयासों की प्रशंसा करनी चाहिए। इससे बच्चा दूसरों की प्रशंसा करना सीखेगा। पर उन्हें यह भी सिखाएं कि वह किसी की झूठी प्रशंसा न करे। न टिशू पेपर बिखेरें, न ही कपड़ों पर हाथ पोंछें। इससे बच्चों के ही नहीं आपके भी असभ्य होने का मैसेज जाएगा।

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