कोरोना से जंग में अलर्ट करेगा आरोग्य सेतु

योगेश कुमार गोयल

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए 2 अप्रैल को भारत में नीति आयोग द्वारा ‘आरोग्य सेतु एप’ लांच किया गया है, जो यूज़र्स को यह बताने में मदद करता है कि उसके आसपास कोई कोरोना संक्रमित व्यक्ति तो नहीं है। ‘नेशनल इन्फॉरमेटिक्स सेंटर’ द्वारा विकसित यह एप 11 भाषाओं में उपलब्ध है। इस एप में कोरोना से जुड़े कई महत्वपूर्ण अपडेट दिए गए हैं और अब इस एप की मदद से ऑनलाइन ही डॉक्टर की सलाह भी ली जा सकती है। एप में जोड़ी गई ‘आरोग्य सेतु मित्र’ नामक सुविधा का उपयोग कर टेलीमेडिसन की सुविधा का लाभ लिया जा सकता है। अभी तक करोड़ों लोग इस एप को डाउनलोड कर चुके हैं और सरकारी एवं निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए इसका उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। फर्जी एप से रहें सावधान एक ओर जहां सरकार द्वारा आरोग्य सेतु को मोबाइल फोन में डाउनलोड करना अनिवार्य किया गया है, वहीं फर्जी आरोग्य सेतु एप का ख़तरा भी सामने आया है। दरअसल साइबर ठग इस एप को डाउनलोड करने के लिए एक फर्जी लिंक सोशल मीडिया पर फैलाकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आए नए लोगों को उस लिंक के ज़रिये ठगी का शिकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल ऐसे लिंक को खोलते ही लोगों के यूपीआई खाते की रकम साफ करने के लिए ठगों के लिए रास्ता खुल जाता है। यही कारण है कि सरकार द्वारा सोशल मीडिया या मैसेज के जरिये भेजे गए ऐसे किसी भी लिंक को क्लिक न करने और फर्जी आरोग्य सेतु एप से सावधान रहने की चेतावनी दी गई है। आरोग्य सेतु एप केवल गूगल प्ले स्टोर, एपल स्टोर तथा सरकारी साइट पर ही उपलब्ध है। निजता और गोपनीयता पर सवाल ‘आरोग्य सेतु’ कोरोनो वायरस के संक्रमण के प्रति लोगों को सचेत करता है लेकिन इसकी सिक्योरिटी तथा प्राइवेसी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि कोरोना के खिलाफ लड़ाई के इस दौर में इस एप की ही भांति कई और देश भी एप आधारित ट्रैकिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं और निजता के उल्लंघन को लेकर भारत के अलावा कई अन्य देशों में भी बहस जारी है। भारत सहित कई देशों की सरकारें अपने नागरिकों को निजता का उल्लंघन न होने को लेकर आश्वस्त भी कर रही हैं लेकिन बहस निरन्तर जारी है। जर्मनी सहित कुछ देशों में एप के ज़रिये केन्द्रित डाटाबेस को लेकर निजता और गोपनीयता पर बहस चल रही है। कई तकनीकी विशेषज्ञ और निजता एक्टिविस्ट इन ट्रैकिंग एप्स को लेकर उंगलियां उठा चुके हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के एप में मांगी गई निजी जानकारियों की गोपनीयता की क्या गारंटी है और यदि ये जानकारियां लीक हुई तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा? सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या एप के ज़रिये जुटाई गई निजी जानकारियों का उपयोग सरकारें अपने राजनीतिक हितों के लिए नहीं करेंगी? कुछ साइबर विशेषज्ञों द्वारा यह सवाल भी उठाए जा रहे हैं कि आरोग्य सेतु एप में जोड़ी गई ‘पीएम केयर्स’ फंड के लिए दान तथा ई-पास जैसी सुविधाओं के ज़रिये काफी डाटा जुटाया जा सकता है। हाल ही में एक गैर सरकारी भारतीय संस्था ‘इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन’ द्वारा भी ट्रैकिंग एप पर विस्तृत अध्ययन के बाद कहा गया है कि भारत में व्यापक डाटा सुरक्षा कानून का अभाव है और सर्विलांस तथा इंटरसेप्शन के जो कानून हैं, वे आज की वास्तविकताओं से काफी पीछे हैं। आईएफएफ के अनुसार सिंगापुर तथा कुछ यूरोपीय देशों में भी सरकारें ऐसे ही एप का इस्तेमाल कर रही हैं लेकिन वहां ऐसी कई बातों का ध्यान रखा जा रहा है लेकिन भारत में इन्हें नजरअंदाज़ कर दिया गया है। आईएफएफ के मुताबिक आरोग्य सेतु में पारदर्शिता के मोर्चे पर कई खामियां हैं। यह एप अपने डेवलपर्स तथा उद्देश्य के बारे में पूरी जानकारी नहीं देता। संस्था के मुताबिक सिंगापुर में केवल स्वास्थ्य मंत्रालय ही इस तरह की प्रणालियों द्वारा एकत्रित डाटा को देख अथवा इस्तेमाल कर सकता है, जबकि भारत में इन सब बातों पर सवाल उठते रहे हैं । हालांकि सरकार सफाई दे रही है कि डाटा केवल स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ साझा किया जा रहा है। 6 मई को फ्रांस के एक हैकर तथा साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट इलियट एल्डर्सन ने आरोग्य सेतु एप की सुरक्षा में खामियां होने का दावा किया। एल्डर्सन ने आरोग्य सेतु एप को एक ओपन सोर्स एप बताते हुए इसे हैक करने का दावा किया था। हालांकि केन्द्रीय आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा स्पष्ट कर दिया गया कि भारत का तकनीकी अविष्कार यह एप डाटा और निजता की सुरक्षा के मामले में बहुत मजबूत और कोविड-19 से लड़ने में कारगर है। सरकार का स्पष्टीकरण एल्डर्सन के अनुसार यह एप कई अवसरों पर यूज़र्स की लोकेशन ट्रेस करता है, जिसे लेकर स्पष्ट किया गया कि एप ऐसा गलती से नहीं कर रहा बल्कि उसे डिज़ाइन ही इस तरह से किया गया है और यह एप की प्राइवेसी पॉलिसी में लिखा हुआ है। एल्डर्सन के मुताबिक सी प्रोग्रामिंग स्क्रिप्ट के ज़रिये यूज़र अपनी रेडियस और लॉंगिट्यूड-लैटीट्यूड लोकेशन बदल सकता है, जिससे वह कोविड-19 के आंकड़े हासिल कर सकता है। इस पर सरकार का कहना है कि रेडियस केवल 5 बिन्दुओं, आधा किलोमीटर, एक किलोमीटर, दो किलोमीटर, 5 किलोमीटर तथा दस किलोमीटर पर ही सेट है। इसलिए उसे इसके अलावा बदलना संभव नहीं है और आंकड़े पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में हैं। आरोग्य सेतु टीम के मुताबिक एप में कोई सिक्योरिटी ईश्यू नहीं है और उपयोगकर्ता की लोकेशन किसी और से शेयर नहीं की जाती, यह केवल रजिस्ट्रेशन के समय, अपने असेसमेंट के समय और कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग डाटा भरते समय ली जाती है। आरोग्य सेतु टीम के अनुसार वह अपने सिस्टम को लगातार अपडेट कर रही है और उसे अब तक किसी तरह की सुरक्षा में सेंध या डाटा चोरी की जानकारी नहीं मिली है। वैसे भी इसमें कोई संवेदनशील डाटा नहीं होता बल्कि वही सामने आता है, जो पहले से है। एल्डरसन के इस सवाल का जवाब मिलना शेष है कि आरोग्य सेतु एप कौन सा ट्राएंगुलेशन है? दरअसल उन्होंने आशंका जताई है कि इस एप का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति का मोबाइल फोन ट्रैक किया जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक तकनीकी तौर पर यह एप स्वयं कोरोना संक्रमण को लेकर किसी प्रकार का विश्लेषण नहीं करता है और न ही इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का सहारा लिया गया है, जो एप यूज़र्स को संक्रमण का प्रभाव बता सके, उसका तापमान ले सके अथवा संक्रमित व्यक्ति के बारे में जानकारी कोरोना उपचार केन्द्र, जांच केन्द्र अथवा प्रशासन तक स्वतः ही पहुंचाई जा सके। एप में उपयोगकर्ता को स्वयं ही यह तय करना होता है कि वह अपनी कोरोना जांच कराएं अथवा स्वयं को क्वारंटीन करें। कितना सुरक्षित है डाटा? एप की डाटा की सुरक्षा और निजता के बारे में सरकार द्वारा स्पष्ट किया गया है कि जब भी कोई इस एप पर साइन-अप करता है तो हर यूज़र को एक ‘यूनिक रैंडम डिवाइस आईडी’ दी जाती है। दो डिवाइस के बीच सभी प्रकार के संचार के लिए किसी भी निजी जानकारी की बजाय इसी आईडी का इस्तेमाल होता है। जब एप उपयोगकर्ता किसी दूसरे रजिस्टर्ड डिवाइस के पास जाता है तो एप एन्क्रिप्टिड सिग्नेचर उसके फोन पर ही कलेक्ट कर लेता है। जब तक एप उपयोगकर्ता कोरोना पॉजिटिव नहीं है, तब तक इंटरएक्शन की जानकारी सर्वर पर नहीं भेजी जाती। आसपास के सभी डिवाइस इंटरएक्शन की जानकारी भी 30 दिनों तक मोबाइल फोन में संभालकर रखी जाती है। यह एप किसी भी उपयोगकर्ता की पहचान उजागर नहीं करता, यहां तक कि कोरोना संक्रमितों की पहचान भी किसी के साथ शेयर नहीं की जाती। एप की विशेषताएं यह एप कोरोना से बचाव में यूज़र तथा उसके परिजनों की जान बचाने के लिए एक अलार्म की भांति कार्य करता है। आरोग्य सेतु पर करोड़ों लोग स्वयं को सेल्फ एसेस कर चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक तीन लाख से ज्यादा लोगों को बीमार बताने पर मंत्रालय से मदद मिली। जबकि कुछ हज़ार कोरोना पॉजिटिव लोगों का ही डाटा डाउनलोड किया गया। गूगल मैप के सृजक तथा गूगल मैप इंडिया के सह-संस्थापक रहे ललितेश के अनुसार आरोग्य सेतु एप का डाटा बेहद सुरक्षित सॉफ्टवेयर में और बेहद गोपनीय होता है, जो उपयोगकर्ता के फोन में ही सुरक्षित रहता है, जिसे किसी भी सर्वर पर नहीं डाला जाता। एप का डाटा केवल तीस दिन तक ही रहता है, उसके बाद अपने आप डिलीट हो जाता है। जबकि कोरोना पॉजिटिव मिलने पर डाटा साठ दिन तक रहता है। जब कोई व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव होता है, केवल उसी स्थिति में उसका डाटा सरकार द्वारा दूसरों लोगों को सचेत करने के लिए उपयोग किया जाता है। एप जो व्यक्तिगत डाटा मांगता है, वह केवल भारत सरकार के साथ शेयर होता है और सरकार का दावा है कि इसमें कोई थर्ड पार्टी शामिल नहीं है। ललितेश के मुताबिक मोबाइल फोन का ब्लूटूथ हर 5 या 10 सेकेंड के बाद पिंग भेजता है और जीपीएस की मदद से 30 मिनट में लोकेशन पता की जा सकती है। इसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति को ट्रेस करने में नहीं बल्कि ज्यादा संक्रमित क्षेत्र का पता लगाने के लिए किया जाता है, जिससे हॉटस्पॉट को किसी पूरी कॉलोनी के बजाय एक छोटे क्षेत्र तक छोटा किया जा सकता है।

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