कोई मजबूत होकर उभरा तो किसी का किला हुआ ध्वस्त

इन चुनावों ने कुछ दिग्गजों को चमकाया तो कुछ को शून्य पर लाकर खड़ा कर दिया। कुछ की स्थिति धूमिल हुई तो किसी ने बामुश्किल पार्टी की लाज रखी। 16वीं लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद जो स्थिति आयी, उसके बाद कई क्षत्रपों के किले ध्वस्त हो गये। महाराष्ट्र में राज ठाकरे के महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) शून्य पर आ गये। नीतीश कुमार (जेडीयू), लालू यादव (आरजेडी), मुलायम सिंह यादव (एसपी) और प्रकाश करात (माकपा) की स्थिति बहुत धूमिल हो गयी। इन सबसे इतर तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी की स्थिति और मजबूत हुई। इसी तरह तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। उधर, ओडिशा में बीजू जनतादल के नवीन पटनायक ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। बहुत समय से सत्ता से बाहर रह रहे आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने भी अपनी स्थिति बहुत अच्छी की। दो हिस्सों में बंटने जा रहे राज्य में सीमांध्र में उनकी पार्टी को स्पष्ट बहुमत तो मिला ही है, लोकसभा सीटों के हिसाब से भी उनकी स्थिति सुधरी है।

ध्वस्त

बहुज पार्टी समाज पार्टी कभी पूरे उत्तर-प्रदेश की हुकूमत चलाने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती की स्थिति इस बार के लोकसभा चुनाव में बहुत खराब रही।

महाराष्ट्र नव निर्माण सेना अपने बड़बोलेपन के लिये जाने जाने वाले मनसे प्रमुख राज ठाकरे भी लोकसभा चुनाव में खाता नहीं खोल पाये। उनका प्रदर्शन विधानसभा एवं निकाय चुनाव में बहुत अच्छा रहा था।

नेशनल कांफ्रेंस चुनावों के दौरान मोदी को वोट देने वालों को समुद्र में डूब मरना जैसा जुमला देने वाले नेशनल कांफ्रेंस के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री फारुक अब्दुल्ला भी शून्य पर आउट हुए। उनकी पार्टी की राज्य में सरकार है।

पस्त

जनता दल यूनाइटेड 02 नीतीश कुमार की जदयू पहले एनडीए का ही हिस्सा थी। नरेन्द्र मोदी को आगे किये जाने के विरोध में उन्होंने गठबंधन से नाता तोड़ लिया। उनकी पार्टी को करारी शिकस्त मिली।

समाजवादी पार्टी 05 सपा की उत्तर-प्रदेश में अपनी सरकार है। उसकी हालत प्रदेश में बहुत पतली रही। दो सीटों पर खुद मुलायम जीते, एक पर उनकी बहू। बमुश्किल पांच सीटें आ पाईं।

कम्युनिस्ट पार्टी (मा.) 09 चुनाव से ठीक पहले तीसरे मोर्चे के गठन में बढ़चढ़कर आगे आने वाले वामपंथी नेता प्रकाश कारात की माकपा की भी हालत अच्छी नहीं रही। उनकी पार्टी पूरे देश में नौ सीटों पर सिमट गई।

राष्ट्रीय जनता दल 04 चारा घोटाले में दोषी करार दिये जाने के बाद जेल से लौटे लालू यादव की राजद भी बड़ी मुश्किल से चार सीटें निकाल पाये। उनकी पत्नी और बेटी चुनाव हार गईं।

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