काका के ‘अवतार’

आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच अपने ‘मनोहर काका’ अब खुलकर बैटिंग करने के मूड में हैं। आने वाले दिनों में उनके अलग-अलग ‘अवतार’ देखने को मिल सकते हैं। जल्द ही वे अपने ‘राजनीतिक गुरु’ यानी नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करने की तैयारी में हैं। बताते हैं केंद्र से मोटा बजट हासिल करने की जुगत में हैं, जिससे बड़ी घोषणाएं करके प्रदेश में माहौल बनाया जा सके। योजना तो हजारों करोड़ रुपये लेने की है। यही नहीं, अब हर दसवें दिन काेई न कोई नयी घोषणा करने का खाका भी खींच चुके हैं। बिजली की दरें पहले ही घटा चुके हैं। अब दलितों और पिछड़ों के लिए भी सौगात का पिटारा खोलने वाले हैं। नवरात्र में भी कोई नया तोहफा राज्य के लोगों को मिलने के आसार हैं। फिर दशहरे और दिवाली का बंपर भी उनकी पोटली से निकलेगा। कई वर्गों पर ‘लक्ष्मी’ बरस सकती है। क्रिसमिस-डे के लिए भी विशेष तैयारियां हैं। अब देखना यह होगा कि सांता क्लॉज वाले दिन काका की पोटली से क्या-क्या निकलेगा। स्थिति यह है कि अब तो काका के मंत्री और आसपास के करीबी अफसर भी नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर काका के दिमाग में चल क्या रहा है। चाचा-भतीजा इनेलो वाले चाचा-भतीजे के बीच का राजनीति ‘प्रेम’ इन दिनों खुलकर सामने आ रहा है। दोनों एक-दूसरे से अव्वल दिखने का कोई मौका नहीं छोड़ते। 25 सितंबर की गोहाना रैली बेशक स्थगित हो गई, लेकिन इससे पहले हुआ ‘पोस्टर वार’ अब भी सुर्खियों में है। गोहाना व सोनीपत सहित इस इलाके के कई शहरों एवं गांवों में रैली के लिए लगे पोस्टर में दुष्यंत का जलवा है। बिल्लू भाई के फोटो पोस्टर से गायब थे। सिरसा व फतेहाबाद सहित कई शहरों में लगे रैली के पोस्टरों में बिल्लू भाई छाये रहे। इनमें दुष्यंत गायब थे। अब रैली चूंकि 7 अक्तूबर को गोहाना में होगी। ऐसे में आगे भी यह पोस्टर वार होने की संभावना है। घर का भेदी इनेलो की 25 सितंबर को गोहाना रैली स्थगित करने पर अाधिकारिक फैसला होने से पहले ही यह बात सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। ऐसे में ‘घर का भेदी...’ वाली कहावत चर्चाओं में है। अपने बिल्लू भाई तो इस पूरे घटनाक्रम के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार मानते हैं। जब 24 सितंबर को उनकी गुरुग्राम में प्रेस कांफ्रेंस से पहले ही सोशल मीडिया पर रैली स्थगित होने और आगामी तारीख की घोषणा हो गई तो बिल्लू भाई आग-बबूला हो गये। कहने लगे, कांग्रेसी हमारे खिलाफ साजिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया के लोगों को खरीदा हुआ है। साहब की बात ठीक भी हो सकती है, लेकिन उसका क्या, जो उन्होंने खुद ही कहा। बिल्लू भाई ने ही तो बताया कि रैली स्थगित होने के बारे में उनके अलावा पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला व प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा को ही पता था। अगर ऐसी बात थी तो फिर बात लीक हुई कैसे? डेरों में भाजपा 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार राज्य की 10 में से 7 सीटों पर जीत हासिल करने वाली भाजपा अब फिर से चुनावी रण में कूदने जा रही है। इस बार टारगेट हारी हुई सीटों पर भी जीत हासिल करने का है। सो, पार्टी कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती। बताते हैं कि भाजपा वोट बैंक के लिए एक बार फिर धर्मगुरुओं की शरण में जाने की तैयारी में है। डेरों और मठों के अलावा बड़े मंदिरों, गुरुद्वारों और धार्मिक संस्थाओं से भी संपर्क साधने के निर्देश पार्टी वर्करों को दिए जा चुके हैं। इस संदर्भ में पार्टी के हरियाणा मामलों के प्रभारी डॉ. अनिल जैन पिछले दिनों रोहतक में बैठक भी कर चुके हैं। चिंता इसलिए भी अधिक बढ़ी हुई कि पहले सतलोक आश्रम बरवाला के तथाकथित संत रामपाल सलाखों के पीछे पहुंचे और फिर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को भी 20 साल की सजा हो गई। डेरा अनुयायियों की नाराज़गी पार्टी को भारी पड़ सकती है। ऐसे में गिले-शिकवे दूर करने की कवायद पहले ही शुरू हो गई है। चिट्ठी से संदेश काका ने इन दिनों सरकार को ऐसे गियर में डाल दिया है, जो भाजपाइयों की समझ में नहीं आ रहा है। अब चिट्ठियों का दौर चल पड़ा है। काका आजकल केंद्रीय मंत्रियों को खत लिखकर प्रदेश के विकास पर जोर दे रहे हैं। चंद भाजपाई कह रहे हैं कि काका यह दौर तो ई-मेल का है, फिर चिट्ठी-पत्री क्यों? दरअसल, काका दिखाना चाहते हैं जो काम चिट्ठी कर देती है वह मेल से नहीं होता। मीडिया की सुर्खियां तो बनती ही हैं, साथ ही विपक्षी लोगों को पता चल जाता है कि हम क्या करने जा रहे हैं। गड्ढों का जिन्न मानसून लगभग विदाई की ओर है। आखिरी दौर में जमकर बरसात हुई। कई शहरों में मानसून की बरसात के बाद गड्ढे ऐसे दिखाई देने लगे हैं - मानो कोई जिन्न दिख रहा हो। वाहन चालकों को टॉप गीयर में गाड़ी चलाने में दिक्कत हो रही है। सरकार अब तक तो कांग्रेस के खोदे गए गड्ढों को भरने की चुटकी लेती रही, लेकिन साहब ये मानसून की बरसात के गड्ढे हैं। मैटीरियल भी कुछ खास नहीं था, जो बरसात सहन नहीं कर पाया। अभी तक कांग्रेसियों के गड्ढे भरने का दम भरती रही भाजपा अब अपने खुद के गड्ढों पर क्या कहेगी, यह सवाल हर ओर से उठ रहा है। बस की सवारी हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी नेता और भाजपा सरकार के बीच इन दिनों तल्खी बढ़ गई है। मानसून सत्र में काका की दो-टूक 720 बसें आकर रहेंगी। इससे रोडवेज के कर्मचारी नेता सहम गए हैं। काका का गुस्सा देखा तो कुछ दिन मीडिया से कन्नी भी काट ली। अब फिर से अक्तूबर में हड़ताल की तैयारी कर रहे हैं। ट्रांसपोर्ट मंत्रालय और काका इस खिचड़ी को पकाकर जनता को परोसने का मन बना चुके हैं। अब ये रोडवेज कर्मियों को स्वादिष्ट लगे न लगे, जनता को इसका स्वाद जरूर भा सकता है। चूंकि लोगों को राजनीति नहीं बस की सवारी करनी है। लिखित भरोसा हिसार सांसद दुष्यंत चौटाला की लिखा-पढ़ी से प्रदेश की अफसरशाही भी परेशान है। एलएलएम करने वाले देश के चुनिंदा सांसदों में से हैं तो कानून भी अच्छे से जानते ही होंगे। और ऊपर से अमेरिका से राजनीतिक शास्त्र के डिग्री होल्डर होना भी उनके काम आ रहा है। अब सांपला में दीनबंधु सर छोटूराम की प्रतिमा के अनावरण को लेकर उनके द्वारा किया गया आंदोलन सरकार व प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गया। सांपला एसडीएम को लिखित में देना पड़ा कि पहली नवंबर तक मूर्ति का अनावरण करवाया जाएगा। इसके बाद ही धरना हटाया गया। कहने वाले कह रहे हैं कि अगर सभी सांसद और विधायक ऐसे ही हो जाएं तो बात बनने में देर नहीं लगेगी। -दिनेश भारद्वाज

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