ओ मां

आज मदर्स डे ललित गर्ग ‘मां!’ इस लघु शब्द में प्रेम की विराटता, समग्रता निहित है। मां धरती पर जीवन के विकास का आधार है। मां ने ही अपने हाथों से इस दुनिया का ताना-बाना बुना है। सभ्यता के विकास क्रम में आदिमकाल से लेकर आधुनिककाल तक इंसानों के आकार-प्रकार, रहन-सहन, सोच-विचार, मस्तिष्क में लगातार बदलाव हुए। लेकिन मातृत्व के भाव में बदलाव नहीं आया। उस आदिमयुग में भी मां, मां ही थी। तब भी वह अपने बच्चों को जन्म देकर उनका पालन-पोषण करती थी। उन्हें अपने अस्तित्व की रक्षा करना सिखाती थी। आज के इस आधुनिक युग में भी मां वैसी ही है। मां नहीं बदली। मां के अंदर प्रेम की पराकाष्ठा है या यूं कहें कि मां ही प्रेम की पराकाष्ठा है। यह वो अलौकिक शब्द है, जिसके स्मरण मात्र से ही रोम-रोम पुलकित हो उठता है, हृदय में भावनाओं का अनहद ज्वार स्वतः उमड़ पड़ता है और मन-मस्तिष्क स्मृतियों के अथाह समुद्र में डूब जाता है। ‘मां’ वो अमोघ मंत्र है, जिसके उच्चारण मात्र से ही हर पीड़ा का नाश हो जाता है। ‘मां’ की ममता और उसके आंचल की महिमा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता, उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। जिन्होंने आपको और आपके परिवार को आदर्श संस्कार दिए। उनके दिए गए संस्कार ही आपकी मूल थाती है। हर संतान अपनी मां से ही संस्कार पाती है। संस्कार के साथ-साथ शक्ति भी मां ही देती है। इसलिए हमारे देश में मां को शक्ति का रूप माना गया है और वेदों में मां को सर्वप्रथम पूजनीय कहा गया है। श्रीमद‍्भागवत पुराण में उल्लेख मिलता है कि माता की सेवा से मिला आशीष सात जन्मों के कष्टों व पापों को दूर करता है और उसकी भावनात्मक शक्ति संतान के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। प्रख्यात वैज्ञानिक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने मां की महिमा को उजागर करते हुए कहा है कि जब मैं पैदा हुआ, इस दुनिया में आया, वो एकमात्र ऐसा दिन था मेरे जीवन का जब मैं रो रहा था और मेरी मां के चेहरे पर एक संतोषजनक मुस्कान थी। अब्राहम लिंकन का मां के बारे में कथन है कि जो भी मैं हूं, या होने की उम्मीद है, मैं उसके लिए अपनी प्यारी मां का कर्जदार हूं। मां हमारी भावनाओं के साथ कितनी खूबी से जुड़ी होती है, ये समझाने के लिए उपरोक्त पंक्तियां अपने आप में सम्पूर्ण हैं। किसी औलाद के लिए ‘मां’ शब्द का मतलब सिर्फ पुकारने या फिर संबोधित करने से ही नहीं होता, बल्कि उसके लिए मां शब्द में ही सारी दुनिया बसती है, दूसरी ओर संतान की खुशी और उसका सुख ही मां के लिए उसका संसार होता है। ठोकर लगने पर या मुसीबत की घड़ी में मां ही याद आती है, क्योंकि वो मां ही होती है जो हमें तब से जानती है जब हम अजन्में होते हैं। मां के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए एक दिन नहीं, बल्कि कई सदियां भी कम हैं। मां को धरती पर विधाता की प्रतिनिधि कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। सच तो यह है कि मां विधाता से कहीं कम नहीं है। क्योंकि मां ने ही इस दुनिया को सिरजा और पाला-पोसा है। कण-कण में व्याप्त परमात्मा किसी को नजर आये न आये, मां हर किसी को हर जगह नजर आती है। मां एक भाव है मातृत्व का, प्रेम और वात्सल्य का, त्याग का और यही भाव उसे विधाता बनाता है। मदर्स डे, मातृ दिवस या माताओं का दिन, चाहे जिस नाम से पुकारें, यह दिन सबके मन में विशेष स्थान लिए हुए है। पूरी जिंदगी समर्पित कर दी जाए तो भी मां के ऋण से उऋण नहीं हुआ जा सकता। संतान के लालन-पालन के लिए हर दुख का सामना बिना किसी शिकायत के करने वाली मां के साथ बिताये दिन सभी के मन में आजीवन सुखद व मधुर स्मृति के रूप में सुरक्षित रहते हैं। मदर्स डे मनाने का उद्देश्य यही है कि मातृशक्ति के इस रूप के प्रति लोग अपनी कृतज्ञता व्यक्त कर सकें और माताओं के स्मरण के साथ-साथ मातृशक्ति के प्रति अपने कर्तव्यबोध के प्रति सचेत हों।

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