ऑल द बेस्ट

दीप्ति अंगरीश 15 फरवरी से सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। फाइनल एग्जाम विद्यार्थियों को तनाव में जकड़ लेता है, वहीं अभिभावकों की चिंता भी बढ़ा देता है। उम्मीद करते हैं कि बोर्ड की परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों ने सभी विषयों की गहन तैयारी कर ली होगी। आखिर ये परीक्षाएं अहम हैं। इन्हीं के नतीजों के आधार पर करिअर को दिशा देने के मौके मिलेंगे। हम आपको डरा नहीं रहे, बल्कि सचेत कर कुछ हिदायतें दे रहे हैं, जिससे आप बोर्ड की परीक्षाओं में अव्वल अंक प्राप्त करें। अभिभावकों की बात करें तो उनकी चिंता जायज है। आखिर आज का दौर प्रतिस्पर्धा का है, उसमें खुद को स्थापित करना काफी मुश्किल है। 12वीं के बच्चों में इसे लेकर खौफ 10वीं के छात्रों से कम होता है। डर तो उन्हें अधिक लगता है, जो पहली बार बोर्ड की परीक्षाएं दे रहे हैं। परीक्षा महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यही सब कुछ है। जिन बच्चों का पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो पाता है, उन्हें परीक्षा की तारीखें घोषित होने के बाद अधिक तनाव में देखा जाता है। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी बनती है कि बच्चों को संभालें और परीक्षा के समय उन्हें तनावमुक्त रखें। यह समय परीक्षाओं का है। हर गली, मोहल्ले में बच्चे बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों में व्यस्त हैं। बच्चों के साथ अभिभावक भी तनाव में हैं। तनाव से बच्चों काे सेहत संबंधी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पता नहीं प्रश्नपत्र में क्या पूछा जाएगा? उन सवालों के सही जवाब दे पाएंगे कि नहीं? ये आशंकाएं बच्चों के मन में उभरनी शुरू हो जाती हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चे जितना मुक्त भाव से पढ़ेंगे-सीखेंगे उतना ही उनके बोध का स्तर मजबूत होगा। परीक्षा में अधिक अंक हासिल करने की होड़ और अध्यापकों-अभिभावकों के दबाव में बच्चे विषय के बिंदुओं को समझने के बजाय रटने में लग जाते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास कमजोर होता जाता है। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी बनती है कि बोर्ड परीक्षाओं के दौरान बच्चों को सहज और संतुलित बने रहने के लिए प्रोत्साहित करें। करिअर काउंसलर डाॅ. राकेश कुमार राजू के अनुसार, अब शेष दिनों में समय तालिका के अनुरूप पढ़ाई करना उचित होगा। इसमें पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को हल करें। यह तरीका कठिन से कठिन सवालों के जवाब के समाधान करना सिखा देगा। इससे विषय पर पकड़ मजबूत होगी। इस समय कुछ नया विषय पढ़ने की बजाय जितना पढ़ा है उसे दोहराएं और पुराने पूछे गए सवालों को लिखकर याद करें। इस समय कुछ नया पढ़ने का मतलब है, दिमाग को बोझिल करना। यह समय है प्री एग्जाम की स्मार्ट तैयारी का। जैसे-जैसे परीक्षा के दिन पास आते हैं, वैसे-वैसे अवसाद, घबराहट, बेेचैनी और चिंता घेर लेती है। इससे निपटने के लिए पढ़ाई के बीच में छोटे-छोटे ब्रेक जरूर लें। इस ब्रेक में टहलें, मनपसंद गाना सुनें, पहेली हल करें, भागने वाले खेल खेलें, फल खाएं। ब्रेक लेने से मांसपेशियों को आराम मिलता है और नव ऊर्जा का संचार होता है। इसके अलावा, दिमाग में ऑक्सीजन की आपूर्ति और एंडोर्फिन हारमोन का संचार होता है, जो दिमाग को तरोताजा रखता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। जब तक परीक्षाएं चल रही हैं, तब तक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखनी जरूरी है। ये अाभासी दुनिया समय की बर्बादी करते हुए मन-मस्तिष्क को मायावी जाल में गोते लगवाती है। इस समय तनाव यदि हावी हो जाए तो पढ़े हुए विषयों की तैयारी भी डगमगा सकती है। तनाव महसूस करने पर माता-पिता, शिक्षकों और पूर्व छात्रों से तनाव काे काबू करने के तरीकों के बारे में जानना उचित होगा। माता-पिता का भी इन परीक्षाओं में अहम योगदान होता हैै। उनकी गतिविधियों से भी बच्चों को प्रोत्साहन मिलता है। कई बार कुछ माता-पिता परीक्षा के दिनों में बच्चों को बार-बार ताने मारने वाले अंदाज में पढ़ने को कहते रहते हैं। पढ़ लो नहीं तो फेल हो जाओगे, नहीं पढ़ोगे तो अपने दोस्तों से पिछड़ जाओगे। परीक्षा के दिन हैं और इसके कान पर जूं तक नहीं रेंगती। इस उम्र में तो हम रात-रात भर जागकर पढ़ा करते थे। ऐसी बातें सुनकर बच्चा झुंझला जाता है। नकारात्मक बातें किसी के भी मन पर हथौड़े की तरह प्रहार करती हैं, इसलिए बच्चे से हर समय सकारात्मक बातें करने का प्रयास करना चाहिए। खासकर परीक्षा के दिनों में उसके साथ चिड़चिड़ेपन के साथ बातें कतई न करें। उसके साथ अधिक से अधिक समय बिताएं। उसे खेलने-कूदने, संगीत सुनने, समय पर भोजन करने और सो जाने को कहें। उसकी समस्याओं को जानें कि वह कहां अटक रहा है या कमजोर महसूस कर रहा है, उसे दुरुस्त करने का प्रयास करें। उसे प्रोत्साहित करें कि कोई बात नहीं, घबराने की कोई जरूरत नहीं। जहां माता-पिता डगमगाएं, वहीं बच्चे हतोत्साहित हो जाते हैं। एेसी बातचीत या गतिविधियां बोर्ड की परीक्षा देने वाले बच्चों के सामने नहीं करनी चाहिए, जैसे- कोई भी नकारात्मक टिप्प्पणी, बच्चों की तुलना, किसी बात पर बच्चों के साथ टकराव, हाथ उठाना आदि। माता-पिता का एेसा रवैया बच्चों को हतोत्साहित कर सकता है, जो आत्मविश्वास को शून्य करने में सक्षम है। अभिभावकों को समझना चाहिए कि बच्चे के साथ नकारात्मक बर्ताव उसकी तैयारी में खलल डाल सकता हैे। ऐसे में बच्चे को नकारात्मक प्रतिक्रिया दिए बिना सुनना बेहतर है। यदि बच्चा बोले कि मुझे कुछ याद नहीं या कुछ समझ नहीं आ रहा, तब अभिभावकों का फर्ज़ है कि बच्चों में भरोसा जगाएं कि वे सर्वश्रेष्ठ हैं और आपको उनकी काबिलियत पर विश्वास है। ऐसा करने से उनमें खोया व डगमगाया आत्मविश्वास पुनः लौटेगा और पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ेगी। परीक्षा के दिनों में तनाव और घबराहट होने की वजह से अकसर बच्चों का खानपान प्रभावित हो जाता है। उनका मेटाबॉलिज्म यानी भूख और पाचन का चक्र गड़बड़ हो जाता है। ऐसी स्थिति में कुछ बच्चे या तो जरूरत से ज्यादा खाने लगते हैं या कुछ की भूख ही समाप्त हो जाती है। इसी तरह कई बच्चे देर रात तक जागकर पढ़ते रहते हैं। ये दोनों ही स्थितियां ठीक नहीं हैं। माता-पिता की जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों को समय से भोजन करवाएं और समय पर उन्हें सोने को कहें। परीक्षा के दिनों में सहज दिनचर्या बहुत जरूरी होती है। परीक्षाओं तक आहार और जीवनशैली में बदलाव लाना नितांत आवश्यक है। इसमें बरती लापरवाही तैयारी से लेकर परिणाम को प्रभावित कर सकती है। इसके लिए 7 से 8 घंटे की नींद लें, चाय-काॅफी, जंक फूड से परहेज करें। देर रात नहीं खाएं, एक बार खाने के बजाय दिनभर में छोटे-छोटे आहार लें। देर रात तक जागने से पाचन तंत्र गड़बड़ा सकता है, दिमाग को सतर्क रखने के लिए शरीर को हाइड्रेट रखें, प्रोटीनयुक्त भोजन का सेवन करें। उच्च प्रोटीन खाद्य पदार्थ जैसे- नट्स, दाल, सोयाबीन आदि मन को सतर्क करते हैं। अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट्स लेने से बचें, क्योंकि इससे नींद अधिक आती है, एक जगह पर बहुत देर तक न बैठें। इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चा सेल्फ ग्रूमिंग और अंदरूनी खुशी पर ध्यान न दे। यह दोनों ही जरूरी हैं, क्योंकि ये खुशी और मन की शांति जगाती हैं। इसका मतलब है बेहतर एकाग्रता। नवयुग विद्यालय की शिक्षिका कुमकुम झा का कहना है कि परीक्षा के दिन नाश्ते में बच्चे को गरम दूध, अंडा वगैरह न दें, इससे गैस बनती है और शरीर में शिथिलता आती है। लस्सी या फलों का रस आदि दे सकते हैं। परीक्षा के लिए निकलते समय बच्चे को प्रसन्न करने वाली बातें करें। किसी भी तरीके से डराएं नहीं, बल्कि उनके मन का भय दूर करें। कई बार माता-पिता खुद परीक्षा वाले दिन सशंकित और डरे हुए होते हैं, इसका बच्चों पर बुरा असर पड़ता है। बच्चा तनाव में होगा, तो परीक्षा में घबराया रहेगा और उसके सवालों के गलत उत्तर लिखने की आशंका बनी रहेगी। इसलिए बच्चों को जहां तक हो सके परीक्षा केंद्र में प्रसन्न मन ले जाएं और प्रवेश कराएं।

यूं करें तनाव की छुट्टी 0 परीक्षा के दौरान तनाव भगाने के लिए सबसे जरूरी है कि आप शारीरिक रूप से फिट रहें। इसके लिए दिन में 15 मिनट पैदल चलें या साइकिल चलाएं। ऐसा हफ्ते में कम से कम 3 बार करें। कोई न कोई खेल अवश्य खेलें। 0 जंक फूड खाने से बचें और हेल्दी खाना खाएं। परीक्षा के दौरान अपने वजन को भी नियंत्रित करें। 0 ब्रेकफास्ट दिन भर की एनर्जी देने के लिए जरूरी होता है। अगर आप ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं तो तुंरत अपनी आदत बदलें। 0 कई बार नकारात्मक सोच आपको तनाव में डाल देती है। ऐसे में आपको नकारात्मक से ध्यान हटाकर सकारात्मक सोचना है। 0 यह सोचें कि मेरे बहुत अच्छे अंक आएंगे। इससे आत्मविश्वास बढ़ेगा।

लिखकर दोहराएं इस समय कुछ नया विषय पढ़ने की बजाय जितना पढ़ा है उसे दोहराएं और पुराने पूछे सवालों को लिखकर याद करें। इस समय कुछ नया पढ़ने का मतलब है, दिमाग को बोझिल करना। यह समय है प्री एग्जाम की स्मार्ट तैयारी का। उन विषयों पर ज्यादा ध्यान दें जिसमें आप कमजोर हैं। -डाॅ. राकेश कुमार, करिअर काउंसलर

खुद छोड़ें परीक्षा केंद्र सभी अभिभावक बच्चों को परीक्षा केंद्र पर खुद छोड़ने और लेने जाएं। सुबह जल्दी जाग कर बच्चों को गरम पानी से नहाने और साफ-सुथरे कपड़े पहनने को कहें। हल्का नाश्ता जरूर दें। परीक्षा के लिए निकलते समय उसे प्रसन्न रखें। ध्यान रहे कि बच्चों को परीक्षाओं के दौरान सकारात्मक माहौल मिले। -कुमकुम झा, शिक्षिका

प्रश्नपत्र मिलते ही यह करें बोर्ड की परीक्षा देने वाले बच्चों को वाकिफ होना चाहिए कि कैसे प्रश्नपत्र हल करें। इसके लिए ऐसी युक्ति बनाएं कि समय पर प्रश्नपत्र पूरा हो जाए। प्रश्नपत्र मिलते ही सिलसिलेवार प्रश्नों को हल करने में न जुटें, बल्कि पहले 15 मिनट एकाग्रता से प्रश्नपत्र को पढ़ें। उसके बाद जो सवाल अच्छे से आते हैं वे करें। अंत में वे सवाल करें जो कठिन हों। अब तक जितना पढ़ लिया उसे वहीं पर रोक दें। इसका मतलब यह नहीं कि पढ़ने के दिन समाप्त हो गए हैं। यह दिन गहन पढ़ाई के नहीं, बल्कि समय प्रबंधन के साथ दिमाग को सुकून देते हुए तीव्र बुद्धि के साथ पढ़ने के हैं। अन्यथा इस समय लगातार पढ़ने से परिणाम प्रतिकूल हो सकते हैं। इन प्रारंभिक दिनों के लिए ऐसी समय सारिणी बनायें, जिसमें 7 से 8 घंटे की नींद शामिल हो। अधिकतम उत्पादकता के लिए सुनिश्चित करें कि पढ़ाई के दौरान प्रत्येक 50 मिनट के बाद 10 मिनट की ब्रेक शामिल हो। आसान विषयों के साथ कठिन विषयों की सूची बनायें। यदि कुछ कठिन लगता है, तो एक विराम लें, दूसरा विषय का अध्ययन करें और फिर कठिन विषय को पढ़े। रात में जगने की बजाय सुबह के समय पढ़ाई करने से वह दिमाग में जल्दी बैठता है। इसका कारण है सुबह के समय एकाग्रता अधिक होती है, क्योंकि उस समय ध्यान भंग करने वाली गतिविधियां कम होती हैं।

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