एसआईटी की सिफारिशें मंजूर, कार्रवाई होगी

नयी दिल्ली, 15 जनवरी (एजेंसी) केन्द्र ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उसने 1984 के सिख विरोधी दंगों के 186 मामलों की जांच करने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज एसएन ढींगरा की अध्यक्षता में गठित विशेष जांच दल की सिफारिशें स्वीकार कर ली हैं और वह कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करेगी। चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्य कांत की पीठ को याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील आरएस सूरी ने सूचित किया कि विशेष जांच दल की रिपोर्ट में पुलिस अधिकारियों की भूमिका की निंदा की गयी है। उन्होंने कहा कि वह दंगों में संलिप्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिये एक आवेदन दायर करेंगे। कांग्रेस के पूर्व पार्षद बलवान खोखर को पैरोल सुप्रीम कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से संबंधित एक मामले में कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार के साथ उम्र कैद की सजा काट रहे कांग्रेस के पूर्व पार्षद बलवान खोखर को बुधवार को 4 सप्ताह के लिये पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया ताकि वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल हो सकें। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, ‘इन परिस्थितियों में, हम अपीलकर्ता को पैरोल देना उचित समझते हैं। तद्नुसार हम निचली अदालत की संतुष्टि के अनुरूप बलवान खोखर को आज से चार सप्ताह के लिये पैरोल पर रिहा करने का निर्देश देते हैं।’ सिखों को ट्रेनों से निकालकर मारा गया, पुलिस देखती रही नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान सिख यात्रियों को दिल्ली में रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों से बाहर निकालकर मारा गया। लेकिन पुलिस ने किसी को भी नहीं बचाया। सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन ढींगरा की अध्यक्षता वाली एसआईटी की रिपोर्ट में कहा गया कि सिख यात्रियों की ट्रेन और रेलवे स्टेशनों पर हत्या किये जाने के पांच मामले थे। यह घटनाएं एक और दो नवंबर 1984 को नांगलोई, किशनगंज, दयाबस्ती, शाहदरा और तुगलकाबाद रेलवे स्टेशनों पर हुई। पुलिस ने किसी भी दंगाई को मौके से गिरफ्तार नहीं किया। कारण दर्शाया गया कि पुलिसकर्मियों की संख्या बेहद कम थी।

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