आर्थिक-सामाजिक राहत मिले कोरोना कहर से

जयंतीलाल भंडारी यकीनन कोरोना संकट के बीच देश के उद्योग कारोबार और प्रभावित लोगों को आर्थिक राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने रणनीतिक कदम आगे बढ़ाएं हैं। 23 मार्च को देश की कंपनियों को विकल्प दिया गया है कि वह कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) का धन कोरोना प्रभावित लोगों के कल्याण पर खर्च कर सकती हैं। इसी तरह 23 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्योग कारोबार जगत के साथ बैठक आयोजित करके प्रभावित उद्योगों और कर्मचारियों को वित्तीय सहयोग देने संबंधी उपयोगी विचार मंथन किया है। सरकार ने फार्मेसी सहित कुछ उद्योगों के लिए राहत पैकेज घोषित किए हैं। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) सहित कई आर्थिक एवं औद्योगिक संगठनों ने कोरोना से जंग में भारत के प्रयासों की सराहना की है। वास्तव में कोरोना संकट से प्रभावित हो रही देश की अर्थव्यवस्था को संभालने और देश के उद्योग कारोबार को राहत देने तथा प्रभावित लोगों को वित्तीय सहयोग देने के लिए सरकार के और अधिक कदम जरूरी दिखाई दे रहे हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बने कोरोना वायरस की चुनौती से निपटने के लिए वित्तमंत्री के नेतृत्व में जो कार्य बल गठित किया गया है, वह अर्थव्यवस्था से संबंधित विभिन्न पक्षों से बात करेगा और अनुकूल कदम उठाएगा। यकीनन कोरोना प्रकोप देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए 2008 की वैश्विक मंदी से भी अधिक भयावह दिखाई दे रहा है। हाल ही में क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडिज ने कहा है कि कोरोना वायरस (कोविड-2019) से वैश्विक मंदी का खतरा मंडरा रहा है। इसके चलते इस वर्ष 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था में आर्थिक सुस्ती गहराने से विकास दर कम होगी। वैश्विक विकास दर घटकर 2.4 फीसदी, चीन की विकास दर घटकर 5.2 फीसदी और भारत की विकास पर घटकर 5.3 फीसदी रहने का अनुमान है। इससे पहले भारत की विकास दर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कोरोना वायरस को पैनडेमिक यानी वैश्विक महामारी घोषित करने के बाद दुनिया में आर्थिक हाहाकार मच गया है। वित्त मंत्रालय ने देश में कोरोना संकट से उद्योग कारोबार को राहत देने के मद्देनजर कोरोना को प्राकृतिक आपदा घोषित किया है। दूसरे बड़े व्यापारिक साझेदार चीन से आयातित कच्चे माल एवं वस्तुओं पर देश के कई उद्योग-कारोबार निर्भर हैं। चीन से आने वाली कई वस्तुओं के आयात में भी कमी आ गई है। इससे खासतौर से दवा उद्योग, वाहन उद्योग, स्टील उद्योग, खिलौना कारोबार, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल्स, केमिकल्स, डायमंड आदि कारोबार मुश्किलों का सामना करते हुए दिखाई दे रहे हैं। नि:संदेह देश के विमानन क्षेत्र पर कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा असर हुआ है। इंडिगो सहित कई विमानन कंपनियों के वेतन में कटौती की गई है। पर्यटन उद्योग ठप होने से कई विमानन कंपनियां कोरोना के कारण दिवालिया हो सकती हैं। इन कंपनियों का नकदी भंडार खत्म हो रहा है, बेड़े के विमानों को परिचालन से बाहर किया जा रहा है। कोरोना के चलते अधिक मार देश की फूड इंडस्ट्री पर पड़ रही है। बड़ा नुकसान मुर्गीपालन उद्योग को भी हो रहा है। बड़ी संख्या में लोग डर के मारे चिकन नहीं खरीद रहे हैं। देश का कपड़ा उद्योग भी कोरोना की चपेट में आ गया है। इसी तरह देशभर में होटल कारोबार भी कोरोना वायरस की वजह से तेजी से घटा है। बाहरी लोगों के आवागमन में कमी आने से होटल उद्योग कारोबार में बड़ी कमी आई है। कंज्यूमर ड्यूरेबल को भी कोरोना प्रकोप के कारण नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में सिनेमा और मॉल कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए बंद कर दिए गए हैं। इससे सिनेमा जगत और मॉल को बड़ा नुकसान हो रहा है। संक्रमण बढ़ने की खबरों से निवेशकों में घबराहट बढ़ गई। कोरोना का संकट और गहराने से भारतीय कंपनियों के सामने नकदी का दबाव बढ़ गया है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से बिकवाली करने से बाजार पर दबाव बढ़ा है। भारत के शेयर बाजार में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज हुई है। ऐसे में एक ओर सभी लोगों को आर्थिक संकट के बीच स्वयं सावधानी रखनी होगी वहीं सरकार और रिजर्व बैंक को भी विशेष भूमिका का निर्वहन करना होगा। जहां सरकार को जमाखोरी पर कठोर नियंत्रण रखना होगा और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी, वहीं लोगों को भी राष्ट्रीय धर्म का पालन करते हुए अनावश्यक खरीदारी से बचना होगा। वस्तुतः इस समय सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को कोरोना वायरस महामारी के कारण उत्पादन में कमी और कीमतों में वृद्धि की दोहरी समस्या के मद्देनजर अर्थव्यवस्था की मदद के लिए राजकोषीय के साथ-साथ मौद्रिक उपायों की घोषणा पर ध्यान देना होगा। जब कोरोना संकट का भारतीय उद्योग कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है तब देश के उद्योग-कारोबार को राहत पैकेज देने की जरूरत है। साथ ही प्रभावितों को बेरोजगारी भत्ता देने की भी जरूरत है। इसके साथ-साथ उद्योग-कारोबार को उपयुक्त प्रोत्साहन देने की रणनीति से कोरोना प्रकोप के बीच भारत कई वस्तुओं की उत्पादन वृद्धि और निर्यात के मौकों को भी मुट्ठियों में ले सकता है। साथ ही कोरोना प्रकोप के कारण कच्चे तेल की घटी कीमतें भारत के लिए लाभप्रद रह सकती हैं।

जयंतीलाल भंडारी

आशा है कि सरकार जन-जीवन संबंधी चुनौतियों के लिए हर स्तर पर आपदा प्रबंधन के उच्चतम प्रयास करेगी। आशा करें कि सरकार आर्थिक सुस्ती से उत्पन्न रोजगार चुनौतियों से प्रभावित हो रहे लाखों लोगों को राहत देने के लिए उद्योग-कारोबार को सहारा देगी, ताकि नौकरियों को बचाया जा सके। सरकारी विभागों में खाली पदों पर शीघ्र भर्तियां करेगी। निर्यात इकाइयों में नए रोजगार के अवसर निर्मित करेगी। गरीबी के कारण रोज कमाकर जीवनयापन करने वाले लोगों के रोजगार पर ध्यान दिया जाना होगा। विदेशी कारपोरेट कंपनियों को निर्देशित करना होगा कि वे वर्क फ्रॉम होम की नीति अपनाएं। पेट्रोल और डीजल कीमतों में उपयुक्त कमी करके उद्योग-कारोबार और उपभोक्ताओं को राहत दी जाए। इससे प्रभावित लोगों की मुश्किलों को कम किया जा सकेगा। आशा है कि सरकार के साथ-साथ उद्योग और कारोबार द्वारा समन्वित रूप से ऐसे रणनीतिक कदम आगे बढ़ाए जाएंगे, जिससे देश के उद्योग-कारोबार सहित संपूर्ण अर्थव्यवस्था को आसन्न मंदी के दौर से बचाया जा सकेगा। साथ ही करोड़ों लोगों को भी कोरोना के खौफ से आर्थिक-सामाजिक राहत दिलाई जा सकेगी।

लेखक ख्यात अर्थशास्त्री हैं।

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