आयुक्तों की सूचना

खट्टर काका की सरकार ने लोकसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले राज्य सूचना आयोग में अपने तीन और खासमखास को एडजस्ट कर दिया। अब आयोग में 2 सूचना आयुक्तों को छोड़कर पूरी तरह से ‘संघी भाइयों’ का कब्जा है। हालिया 3 नियुक्तियों को लेकर भाजपाई ही नहीं, पूरी ब्यूरोक्रेसी भी सकते में है। नौकरशाह तो आयोगों के पदों पर अपना जन्मजात अधिकार समझते रहे हैं, लेकिन काका ने कुछ को छोड़कर ऐसे पदों पर संघी भाइयों को ही तरजीह दी है। लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) केजे सिंह 2018 से ही काका के एडवाइजर के तौर पर काम कर रहे थे। इस बात का बहुत कम लोगों को पता था। अब वे सूचना आयुक्त हो चुके हैं। पंजाब वाली ‘मैडम’ भी काका के ‘आशीर्वाद’ से पंजाब की कुर्सी जाने के बाद हरियाणा में नयी ताजपोशी लेने में कामयाब रहीं। संघी और भाजपाई भाई लोगों को ये दोनों नियुक्तियां तो फिर भी रास आ गईं, लेकिन अपने सांघी वाले ताऊ यानी भूपेंद्र हुड्डा के करीबी रहे हिसार के जय सिंह बिश्नोई को राज्य सूचना आयुक्त नियुक्त करना किसी के गले नहीं उतर रहा। एक वरिष्ठ मंत्री भी कह रहे हैं कि काका ने क्या सोच कर यह फैसला लिया, यह तो वही जानें।

भाजपा के डोरे हरियाणा की सत्तारूढ़ भाजपा दूसरे दलों के नेताओं पर डोरे डाल रही है। सबसे अधिक नुकसान इनेलो को हो रहा है। कुछ जजपा में जा रहे हैं तो कुछ को भाजपा अपने साथ जोड़ रही है। भाजपाइयों ने कांग्रेस के भी कई बड़े चेहरों पर ‘मायावी जाल’ डाला हुआ है। अब देखना यह रोचक रहेगा कि इस जाल में कौन-कौन से नेता फंसते हैं। यह पूरी कवायद लोकसभा चुनाव में माहौल बनाने और मजबूत चेहरों को मैदान में उतारने को लेकर हो रही है। राज्य में लोकसभा की 10 में से 2 सीटों पर तो पार्टी के पास ठोस उम्मीदवार हैं, लेकिन बाकी के लिए वह ऐसे चेहरे तलाश रही है, जो जीत हासिल कर सकें। इसी वजह से कांग्रेस में सेंधमारी की कोशिश जारी है। चर्चा तो कई बड़े नामों को लेकर है, लेकिन अभी मुट्ठी बंद है। मुट्ठी खुलने के  बाद ही इसका खुलासा होगा कि ये नेता भगवा रंग में रंगते हैं या फिर हाथ के साथ ही रहते हैं। कहने वाले यह भी कह रहे हैं कि यह भाजपा की सोची-समझी रणनीति है। कुछ लोगों की इमेज पर ‘डेंट’ की प्लानिंग से भी इस कवायद को जोड़कर देखा जा रहा है।

दिल्ली से हरियाणा मफलर वाले नेताजी यानी अरविंद केजरीवाल की दाल गल नहीं रही है। दिल्ली में कांग्रेस के साथ गठबंधन की कोशिश नाकामयाब होने के बाद साहब ने हरियाणा में नया शिगूफा छोड़ दिया। ट्वीट करके राहुल गांधी से अपील कर डाली कि अगर नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी को शिकस्त देनी है तो हरियाणा में कांग्रेस, जननायक जनता पार्टी और आप को मिलकर चुनाव लड़ना होगा। वैसे साहब की यह रणनीति दिल्ली में कांग्रेस की छवि खराब करने के लिए भी हो सकती है, लेकिन दिल्ली की तरह ही हरियाणा के कांग्रेसियों ने भी इस पेशकश को सिरे से नकार दिया है। जजपा ने साफ कह दिया है कि वह समान विचारधारा वाले लोगों के साथ तो हो सकती है, लेकिन कांग्रेस के साथ कभी भी नहीं।

हाईकमान का रोड़ा हरियाणा के भाजपाई लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव करवाने के इच्छुक थे। बात दिल्ली तक भी पहुंची। हाईकमान से विचार-विमर्श भी किया गया, लेकिन नेतृत्व ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। लोकसभा चुनाव घोषित हो चुके हैं, लेकिन अपने हरियाणवी भाई लोगों की कोशिश अभी रुकी नहीं हैं। इस तरह की कोशिशें अभी जारी हैं कि विधानसभा को भंग करके लोकसभा के साथ ही चुनाव करवा लिए जाएं। सुनने में आया है कि दिल्ली वाले ‘सेठजी’ यानी हरियाणा मामलों के प्रभारी अनिल जैन छत्तीसगढ़ से लौटने के बाद प्रदेश भाजपा के नेताओं के साथ फिर से बातचीत कर सकते हैं। वैसे अभी तक तो हाईकमान का रोड़ा है, लेकिन अगर यह हट गया तो फिर विधानसभा भंग होने में भी देर नहीं लगेगी। कुल मिलाकर अब गेंद केंद्र के पाले में है। गोल होगा या नहीं, यह कह नहीं सकते।

मेरे करन-अर्जुन इनेलो वाले बिल्लू भाई की पार्टी से नेताओं की रवानगी भले ही नहीं रुक रही, लेकिन अब उनके दोनों बेटों करन और अर्जुन चौटाला ने मोर्चा संभाल लिया है। एक के पास छात्र संगठन की कमान है तो दूसरे को युवाओं को लामबंद करने का जिम्मा सौंपा हुआ है। पिता के साथ दोनों भाई कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। अब तो इन भाइयों ने जननायक जनता पार्टी वाले नेताजी यानी दुष्यंत चौटाला को भी चुनौती दे डाली है। कहते हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो दुष्यंत के खिलाफ हिसार से चुनाव मैदान में भी छोटा भाई खड़ा हो सकता है। वैसे जब पार्टी अलग हो ही गई है तो फिर राजनीतिक जंग में खुलकर दो-दो हाथ करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।

-दिनेश भारद्वाज

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