अवसाद के दौर को समझिये

मोनिका शर्मा

हमारे यहां आज भी डिप्रेशन के संकेतों पर गौर नहीं किया जाता। घर हो या बाहर, इन लक्षणों को समझने की कोशिश ही नहीं की जाती। खोये और टूटे से रहने वाले मन की पीड़ा समझने के बजाय या तो मजाक बना दिया जाता है या उपेक्षा का भाव रखा जाता है। जिसके चलते कई बार लोग सुसाइड जैसे कदम भी उठा लेते हैं। इसलिए अवसाद के लक्षणों के प्रति सचेत रहें। इससे जूझ रहे किसी अपने-पराये की मदद कर इससे उबरने में साथ दें।

अपनों से दूरी डिप्रेशन के शिकार लोग अपने परिजनों और दोस्तों से दूरी बना लेते हैं। घर या अपने कमरे तक ही सिमट जाते हैं। दूरी बनाकर अकेले रहने का चुनाव करते हैं। ऐसे लोग समाज से पूरी तरह से कट जाते हैं। हर समय दुःखी रहते हुए किसी के साथ अपना दुःख साझा नहीं करते। सबसे दूर हो जाने की ऐसी स्थितियां बताती हैं कि व्यक्ति के मन में अवसाद घर कर रहा है। इन संकेतों को समझते हुए उनसे बातचीत करने की कोशिश करनी चाहिए। धीरे-धीरे सहज जिंदगी को ओर मोड़ने का प्रयास करना चाहिए।

बुरी आदतों की दस्तक अवसाद के जाल में फंसकर लोग बुरी आदतों का भी शिकार हो जाते हैं। इसीलिए किसी परिजन, दोस्त या रिश्तेदार को अचानक ऐसी लत का शिकार होते देखें तो हालात को समझने का प्रयास कीजिये। बड़े ही नहीं कई बार बच्चे भी तनाव और डिप्रेशन में ड्रग और शराब के सेवन की आदत लगा लेते हैं। शारीरिक और मानसिक व्यग्रता के चलते ऐसी आदतें अपनाने वाले लोग आगे चलकर इनके लती बन जाते हैं। इसीलिए किसी व्यक्ति के इस लक्षण को नजरअंदाज न करें। शुरुआत में ही आदतों के इस बदलाव को समझें और उन्हें डिप्रेशन के जाल से बचाएं।

व्यवहार में नकारात्मक बदलाव अवसाद के शिकार लोगों का व्यक्तित्व और व्यवहार दोनों बदल जाते हैं। आमतौर पर ऐसे बदलाव नेगेटिव ही होते हैं। डर, दुख, गुस्सा, हताशा, अपराध बोध और चिड़चिड़ापन उनके व्यवहार का हिस्सा बन जाता है। ऐसे लोग एंग्जाइटी और तनाव से घिर जाते हैं। अवसाद के शिकार लोग हंसना -मुस्कुराना तक भूल जाते हैं। कभी बेवजह का आक्रोश तो कभी रोने और दुःखी होने का असंयत बर्ताव करने लगते हैं। इतना ही नहीं उनके मन में ख़ुदकुशी के विचार भी आने लगते हैं। असहज और अजीब हो जाता है। ऐसे में व्यवहार में आये इन नकारात्मक बदलावों को लेकर शिकायत करने के बजाय कारण समझने की कोशिश कीजिये। अपनों का साथ और संवाद ही अवसाद से ग्रसित इनसान को इस स्थिति से उबार सकता है।

दिनचर्या में बदलाव डिप्रेशन के शिकार लोगों का बदला हुआ बर्ताव उनकी दिनचर्या में भी देखने को मिलता है। डिप्रेशन की जद में आये लोग हरदम थकान, सुस्ती और चिंताओं से घिरे रहते हैं। यहां तक कि उनकी खाने और सोने की आदतों में बदलाव आ जाता है। अनिद्रा, भूख ना लगना, उदासी और अपकेलापन उनकी पूरी दिनचर्या बिगाड़ देते हैं। निराशा और खालीपन के कारण किसी काम में उनकी दिलचस्पी नहीं रहती। बिगड़े मूड और शेड्यूल के इस दौर में ऐसे लोग अपनी हॉबी और काम से भी दूरी बना लेते हैं। काम करना भी चाहें तो उस पर फोकस नहीं कर पाते। अस्त-व्यस्त सी जीवनशैली अपना लेने वाले ऐसे लोगों को खुद की देखभाल में भी रुचि नहीं रहती। इसलिए ऐसे बदलावों को अनदेखा मत कीजिये। समय रहते इन बातों को समझिये और अवसाद से घिर रहे इनसान के मददगार बनिए।

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