अयोध्या विवाद के स्थायी समाधान के लिए केन्द्र करे पहल : कटियार

लखनऊ, 15 सितम्बर (भाषा)। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय कटियार ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए जाने पर बल देते हुए केन्द्र सरकार से मांग की है कि वह अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक के मुकदमे में स्वयं एक पार्टी बनकर वार्ता और आपसी सहमति के आधार पर इस विवाद के समाधान की पहल करे। कटियार ने कहा कि मामले की सुनवाई कर रही हाईकोर्ट की पीठ ने विवाद को बातचीत से सुलझाने का प्रयास करने के लिए 17 सितम्बर को संबंधित पक्षों को आमंत्रित करने के निर्णय की ओर इशारा करते हुए कहा, 'अदालत ने एक अच्छा अवसर दिया है। केन्द्र सरकार को इस मुकदमे में स्वयं पक्षकार बनकर एक हलफनामा दाखिल करना चाहिए कि वह समस्या का समाधान वार्ता से करने का प्रयास करेगी और इसके लिए और समय दिया जाना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'मामले के आपसी सहमति और बातचीत से समाधान के लिए आई अर्जियों पर अदालत ने तारीख तय कर दी है। मगर एक दो लोग करोड़ों हिन्दुओं की भावना का प्रतिनिधित्व नहीं करते। इसलिए केन्द्र सरकार को हलफनामा देकर स्वयं इस मामले में एक पक्षकार बनकर समाधान का प्रयास करना चाहिए।' कटियार ने कहा, 'हमारे लिए अदालत का निर्णय सर्वोपरि है और सभी को इसका सम्मान करना चाहिए। मगर निर्णय जो भी हो, मामला सुप्रीमकोर्ट में जाएगा।' उन्होंने कहा कि सुप्रीमकोर्ट में जो समय लगेगा सो तो लगेगा ही, इससे स्थिति बिगडऩे की भी आशंका रहेगी। कटियार ने कहा कि यदि केन्द्र सरकार चाहती है कि सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहे तो उसे इस मामले में स्वयं एक पक्षकार बनकर बातचीत से इसके समाधान की दिशा में पहल करनी चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा, 'हम कोई विवाद नहीं चाहते बल्कि हम तो सिर्फ यह चाहते हैं कि वहां आपसी बातचीत से सौहार्दपूर्ण वातावरण में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो।' विभिन्न प्रधानमंत्रियों के शासनकाल में अयोध्या विवाद के बातचीत से समाधान के लिए हुए प्रयासों का उल्लेख करते हुए कटियार ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपानीत राजग सरकार ने अयोध्या विवाद के आपसी सहमति से समाधान के लिए संबंधित सभी पक्षों को वार्ता की मेज पर लाने की दिशा में कोशिश की थी। मगर कतिपय कारणों से उस पर अमल नहीं हो पाया। उन्होंने कहा, 'राजग सरकार में भाजपा मंदिर निर्माण के लिए कानून नहीं बना सकती थी, क्योंकि उसे बहुमत प्राप्त नहीं था। मनमोहन सरकार भी कानून बनाने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि कांग्रेस को भी पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं है।'

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