अम्फान की कंपन

कोरोना काल में दोहरी तबाही

पुरानी कहावत है कि मुसीबत अकेली नहीं आती, कोरोना संकट से जूझ रहे पश्चिम बंगाल में समुद्री तूफान अम्फान ने जो तबाही मचाई है, वह अभूतपूर्व है। पुरानी पीढ़ी के लोग कह रहे हैं, ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा। तबाही का मंजर ऐसा है कि हजारों कच्चे मकान गिरे हैं और बारह सौ से अधिक मोबाइल टावर ध्वस्त होने से संचार-सेवाएं ठप हैं, बिजली की लाइनें उखड़ गई हैं, सड़कों पर टूटे पेड़ व क्षतिग्रस्त कारें हैं। अगले कुछ दिनों में ही नुकसान का आकलन हो पायेगा। 24 परगना जिले में सबसे ज्यादा तबाही है और खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। ओडिशा में तबाही कम हुई, हालांकि कुछ मौतों का उल्लेख जरूर है। ऐसी आपदाओं से दो-चार ओडिशा ने इनके साथ जीना सीख लिया। मगर, बंगाल की तबाही बड़ी है, मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कह रही हैं कि वे खुद आकर तबाही का जायजा लें। यह अच्छा है कि समय रहते इस भयावह तूफान की जानकारी मिल गई थी और दोनों राज्यों में करीब छह लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया। संपत्ति के नुकसान को बचाने की कोशिश तूफान के विकराल रूप के सामने विफल रही है। सवाल स्वाभाविक है कि पहले ही कोरोना की विस्फोटक स्थिति से गुजर रहे पश्चिम बंगाल में क्या कोरोना से बचाव के उपाय संभव हो पायेंगे? जिन लाखों लोगों को राहत शिविरों में ठहराया गया है, वहां सोशल डिस्टेंसिंग व अन्य उपायों का पालन संभव है? उत्तर न में ही मिलेगा, जिसके खतरे आने वाले दिनों में उभर सकते हैं। केंद्र व पश्चिम बंगाल सरकार में आये दिन होने वाले टकराव का नजारा इस आपदा के बाद नजर आने वाला है। बहरहाल, समय रहते राहत-बचाव के कार्यों से हम जन-धन की हानि को कुछ कम कर पाने में सफल रहे हैं। नि:संदेह आने वाले वक्त में हमें एेसी आपदाओं में जीना सीखना ही पड़ेगा। यह एक स्वाभाविक प्रश्न है कि इतनी तीव्र गति के समुद्री तूफानों के आने का सिलसिला तेज कैसे हुआ। कहा जा रहा है कि पिछले कई दशकों में दो सौ किलोमीटर प्रतिघंटा के करीब की गति वाला तूफान देखने में नहीं आया। समुद्र में आने वाले तेज गति के तूफानों के बारे में वैज्ञानिक अध्ययनों का हवाला दे रहे हैं कि ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में तेजी से समुद्री जल के तापमान में निरंतर वृद्धि हो रही है। जैसे-जैसे पानी का तापमान बढ़ेगा, समुद्री तूफान रौद्र रूप दिखाते रहेंगे। पिछले चार दशकों का अध्ययन बता रहा है कि हाल ही में पौने दो सौ से दो सौ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाले तूफानों की आवृत्ति बढ़ी है। समुद्री जल के तापमान में महज एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से तूफानी हवाओं की तेजी में पांच से दस फीसदी तक की वृद्धि हो जाती है। ऐसे में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करना मानवता को बचाने के लिए पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। पिछले दिनों पूरी दुनिया में लॉकडाउन के चलते ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में खासी कमी देखी गई, जिसका धनात्मक असर हमारी आबोहवा पर नजर आया। लेकिन दुर्भाग्य कि यह स्थिति अस्थायी है और हमारी सक्रियता फिर हालात पहले जैसे कर देगी। इसके बावजूद पूरी दुनिया में इस मुद्दे पर जनमत तैयार करना होगा ताकि सरकारों को घातक गैसों के उत्सर्जन को रोकने के लिए दबाव बनाया जा सके। इसके साथ ही समुद्रतटीय राज्यों में ऐसे समुद्री तूफानों के साथ जीवन जीने के लिए आधारभूत संरचना में बदलाव किये जायें। भवनों की निर्माण शैली में बदलाव के साथ ही राहत-बचाव के लिए पुख्ता स्थायी तंत्र का भी विकास हो। यह मानते हुए कि आने वाले समय में ऐसे तूफान आते रहेंगे। सत्ताधीशों को भी मुआवजे और  फौरी राहत के बजाय स्थायी उपायों पर ध्यान देना चाहिए, ताकि जन-धन की हानि कम से कम की जा सके।

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