अनूठे सब्जेक्ट का बढ़ता क्रेज़

बालीवुड में यूं तो कई तरह के विषयों पर फिल्में बनती रही हैं, लेकिन मौजूदा दौर में कुछ अनूठे सब्जेक्ट दर्शकों को खूब पसंद आ रहे हैं। इनमें बात चाहे खेल की हो, देशभक्ति की हो या ज्वलंत मुद्दों की, ये आज के दर्शकों के पसंदीदा विषय बन रही हैं। फिल्मकार भी दर्शकों की इस नब्ज़ को पकड़ते हुए मसाला और कॉमेडी से हटकर नए विषयों को छूने की कोशिश कर रहे हैं। असीम चक्रवर्ती

बाॅलीवुड में ऐसी कई फिल्में बन रही हैं, जिनमें कहानी का नयापन एक बड़ा आकर्षण होगा। जल्द रिलीज़ होने वाली बाला, उजड़े चमन जैसी फिल्में इसका ताजा उदाहरण हैं। और इसी पाइप लाइन में कई और फिल्में भी हैं। अब जैसे कि पिछले दिनों रिलीज़ ड्रीमगर्ल को लेकर दर्शकों के क्रेज़ की एक बड़ी वजह इसका सब्जेक्ट रहा है। वैसे देखा जाए तो इसका सब्जेक्ट बहुत साधारण-सा है। एक बेकार युवक सिर्फ अपनी बेरोज़गारी दूर करने के लिए काॅल सेंटर में लड़की की आवाज़ में पुरुषों का मन बहलाता है।

ड्रीमगर्ल की बात ही कुछ और ...

इस रोल को करने वाले अभिनेता आयुष्मान खुराना इस बात को मानते हैं कि उनकी यह फिल्म भी सिर्फ अपने अनूठे और थोड़ा बोल्ड सब्जेक्ट की वजह से दर्शकों की पसंद बनी है। वैसे आयुष्मान के लिए यह कोई नई बात नहीं है। अपने करिअर की शुरूआत से ही वह बिल्कुल अलग-थलग फिल्मों में काम करने पर यकीन करते रहे हैं। 'विकी डोनर', 'बधाई हो', ऐसी कई फिल्मों में काम कर चुके आयुष्मान इस बात पर यकीन करते हैं कि जब भी ऐसी कोई फिल्म तार्किक ढंग से बनी है, दर्शकों को उसका साथ मिला है। बात वाजिब है, ढेरों पुरानी फिल्मों की बात जाने दें तो पिछले साल की कुछ फिल्मों 'टाॅयलेट-एक प्रेम कथा', 'पैडमैन', 'गोल्ड', 'हिंदी मीडियम', 'लखनऊ सेंट्रल', 'बेगम जाॅन', 'स्त्री', 'बधाई हो', 'ड्रीमगर्ल' जैसी फिल्मों ने अपने निर्माण के पहले चरण से ही दर्शकों का दिल जीत लिया था, एकाध अपवाद को जाने दें तो इनमें से किसी ने दर्शकों को हताश नहीं किया।

‘बधाई हो’ की बधाई

जहां तक बधाई हो का प्रश्न है यह फिल्म अपने पहले ट्रेलर के साथ ही दर्शकों के जबरदस्त क्रेज की वजह बन गई थी। सबसे अच्छी बात यह थी कि यह फिल्म भी दर्शकों की उम्मीदों पर बिल्कुल खरी उतरी। इसके बाद की कहानी सर्वविदित है। एक मजबूत स्क्रिप्ट और कलाकारों के शानदार अभिनय की वजह से 20 करोड़ की यह फिल्म 175 करोड़ की कमाई करके बॉक्स आफिस के लिए एक उदाहरण बन गई।

टाॅयलेट की बात सरेआम

अक्षय कुमार की फिल्म टाॅयलेट-एक प्रेमकथा शुरू से आखिर तक काॅमेडी ट्रैक पर चलती है। पर इसका सब्जेक्ट बहुत अनूठा था। इसका सब्जेक्ट प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित था। यह फिल्म ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय की समस्या पर आधारित थी। कई रोचक घटनाओं को इसकी कहानी में पिरोया गया है। चूंकि स्वच्छ भारत अभियान की बातें इसमें गहरे तक जुड़ी थीं, इसलिए दर्शकों ने इसे हाथों हाथ लिया।

‘पैडमैन’ एक बोल्ड कथा

निर्देशक आर. बाल्की की यह फिल्म अपने सब्जेक्ट की वजह से बेहद बोल्ड बन जाती है। यह अरुणाचलम मुरुगंथम नामक शख्स की कहानी है। पर्दे पर इस किरदार को प्ले करेंगे अभिनेता अक्षय कुमार। अरुणाचलम वह शख्सियत है, जिन्होंने ग्रामीण हिन्दुस्तान की महिलाओं के लिए सेनेटरी पैड का निर्माण किया। कम बजट की पैैड मशीन का निर्माण करवाया। बस, यही सच्चाई दर्शकों के दिल में उतर गई। और यही बातें इस फिल्म को हिट बनाने के लिए काफी थी।

‘गोल्ड’ या असली सोना

कई लोग ऐसे हैं जो मान-सम्मान को ही असली सोना मानते हैं। और यह मान-सम्मान यदि देश के लिए अर्जित किया जाए तो फिर क्या कहने। हिन्दुस्तान के दूसरे खेल भले ही कितना छायें, पर अभी तक ओलंपिक में सर्वाधिक गोल्ड मेडल दिलाने में हॉकी का हाथ रहा है। स्वतंत्रता के बाद ओलंपिक में देश का पहला मेडल हॉकी की वजह से आया था। पर गलत प्रस्तुति और लचर स्क्रिप्ट के चलते यह फिल्म कोई बड़ा धमाका नहीं कर पाई। एक बेहद अच्छे सब्जेक्ट की यह फिल्म इसी वजह से पिट गई।

गुलशन कुमार पर ‘मुगल’

यह फिल्म कब बनेगी और कब रिलीज़ होगी, किसी को नहीं पता। वैसे इस फिल्म के बारे में ज्यादा कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है। टी सीरीज़ द्वारा निर्मित इस फिल्म के निर्माता भूषण कुमार और किशन कुमार हैं। फिलहाल इस फिल्म के बारे में ज्यादा कुछ बताने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि अभी तक इस फिल्म को कोई आधार नहीं मिला है।

अक्षय सबसे आगे

चार-पांच साल पहले अक्षय ने अपने एक इंटरव्यू में साफ कहा था कि अब उनकी नजर कमर्शियल आॅफ बीट फिल्मों पर होगी। उनका स्पष्ट इशारा था कि वह बिल्कुल अलग टाइप की फिल्में करना चाहते हैं। और अब वह पूरी तरह से फलीभूत हो रहा है। अक्षय का नाम इधर ऐसी फिल्मों के लिए खूब मशहूर हो रहा है। इस बात का जिक्र चलने पर अक्षय साफ कहते हैं, ‘इनके सब्जेक्ट वाकई में बहुत अच्छे हैं पर इनका लुक सीरियस नहीं होना चाहिए। बात को कुछ इस ढंग से कहना पड़ेगा कि दर्शकों का इनसे भरपूर मनोरंजन हो। वरना इनका नयापन कोई नोटिस नहीं करेगा।’

हिन्दुस्तान के ठग

हिंन्दुस्तान के ठग के ढेरों किस्से मशहूर हैं। लोग नटवरलाल की ठगी के किस्सों को बार-बार दोहराते हैं पर आम जिंदगी में ठगी की ऐसी ढेरों घटनाएं हैं, जिन्हें सुनते ही आप निरुत्तर हो जाएंगे। मशहूर अभिनेता आमिर खान ने फिल्म ‘ठग्स ऑफ हिन्दुस्तान’ में यह दांव खेला था, मगर बुरी तरह हाथ जला बैठे। इसके निर्माता आदित्य राज चोपड़ा अब इस तरह के रोचक सब्जेक्ट को भुना नहीं पाये।

‘मैं तो हर मोड़ पर तुझको दूंगा सदा’

1970 की बीआर इशारा की फिल्म चेतना को वयस्क सिनेप्रेमी शायद ही भूल सकें। इसलिए इस फिल्म का एकमात्र लोकप्रिय गीत ‘मैं तो हर मोड़ पर तुझको दूंगा सदा’ को सुनते ही उसे फिल्म चेतना के बारे में सब कछ याद आ जाता है। उस दौर में इस फिल्म को बेहद बोल्ड फिल्म के तौर पर प्रचारित किया गया था। आज के दर्शक जो फिल्मों में हीरो-हीरोइन के किस और बेडरूम दृश्य देखने के आदी हो चुके हैं, अब फिल्म चेतना में बोल्ड सीन की तलाश करेंगे। असल में फिल्म में सीन ही ऐसा है। इसके ज्यादातर बोल्ड सीन पर सेंसर की कैंची चल गई थी। लेकिन हीरोइन की बोल्डनेस को निर्माताओं ने फिल्म के पोस्टर में जमकर इस्तेमाल किया।

‘गाइड’ को कैसे भूल सकते हैं

इसी तरह से फिल्म गाइड का अनूठा सब्जेक्ट शायद ही दर्शकों के जेहन से मिटे। इस फिल्म की रीमेक की बातें कई बार चलीं पर हर फिल्मकार पीछे हट गया। गोल्डी यानी फिल्मकार विजय आनंद की इस क्लासिक को हमेशा अनूठा माना गया। न सिर्फ अपने सब्जेक्ट की वजह से बल्कि अपने तीनों नेगेटिव किरदार की वजह से यह हमेशा फिल्मों के अलग प्लेटफार्म पर खड़ी नजर आई। फिल्म का राजू गाइड इसकी हीरोइन रोजी के साथ धोखाधड़ी करता है। रोजी अपने नृृत्य के शौक के लिए राजू गाइड का इस्तेमाल करती है। रोज़ी का पति मार्को यानी किशोर शाहू अपनी बीवी पर अत्याचार करता है। ऐसे तीनों नकारात्मक किरदारों को लेकर आज फिल्म बनाना इतना आसान नहीं है।

सच्चाई कड़वी होती है

कुल मिलाकर आप इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि बोल्ड और अनूठे सब्जेक्ट में कहीं न कहीं एक कड़वी-मीठी सच्चाई छिपी रहती है। जिन्हें कबूल करते हुए फिल्म बनाना इतना आसान नहीं है। अब जैसे कि अभिनेता संजय दत्त का जीवन बहुत विवादास्पद रहा है। मगर फिल्मकार राजकुमार हिरानी एक हिट फिल्म बनाने के बावजूद पूरी ईमानदारी से इस बायोपिक (फिल्म संजू) में उन विवादों को पूरी ईमानदारी से उकेर नहीं पाए। यदि यह फिल्म ढंग से बनती तो फिल्मी इतिहास का हिस्सा आसानी से बन जाती।

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