अनुशासन और कर्तव्य

मोनिका अग्रवाल

अनुशासन से मतलब सख्त नियम और कायदे नहीं है। अनुशासन से मतलब है किसी भी कार्य को उचित प्रकार और समझदारी से करना। अनुशासन का हमारे जीवन में क्या महत्व है, यह जानना बच्चों के लिए भी आवश्यक है। यह सीख हमें बच्चों को बचपन से देनी चाहिए। अनुशासन और कर्तव्य वह सीख है जो जीवन भर काम आती है। आचरण और व्यवहार बच्चे के जीवन में उनके प्रथम गुरु उनके माता-पिता होते हैं। इसलिए जैसा व्यवहार वे स्वयं करेंगे वैसा व्यवहार बच्चा सीखेगा। अतः पेरेंट्स को अपने जीवन में खुद को भी अनुशासित रखना ज़रूरी हो जाता है। आप की जीवनशैली भी नियमित और व्यवस्थित हो। आपका आचरण अच्छा हो। दूसरों से उचित व्यवहार हो। मृदु व्यवहार जब हम हर समय क्रोधित रहेंगे, बात-बात पर चिड़चिड़ायेंगे तो हमारे व्यवहार की कड़वाहट बच्चों को हमसे दूर कर देगी। वे हमसे बात करने से कतरायेंगे। वे हर समय डरे-डरे रहेंगे। रिश्तों में एक खिंचाव रहेगा। ज्यादा गुस्सा और चिड़चिड़ापन हमारे अंदर की सौम्यता को खत्म कर देता है। बेहतर है कि अपनी इस आदत को बदलें। बच्चों को मृदुभाषी और मिलनसार बनायें। समानता सिखायें बच्चों को अक्सर माता-पिता से शिकायत रहती है कि वे किसी के भाई या बहन को ज्यादा प्यार करते हैं। यह शिकायत यूं ही नहीं होती। लड़का या लड़की वाला भेद आपको अपने साथ जिस तरह अखर सकता है किसी दूसरे को भी ठीक वैसा ही महसूस हो सकता है। किसी से लड़के की अहमियत या लड़की की कमी के बारे में न पूछें न बात करें। क्योंकि बच्चा माता-पिता के लिये अनमोल है। अपने बच्चों से भी भेदभाव न करें। यदि मां-बाप आपस में भेद करेंगे तो बच्चे भी भेद करना सीखेंगे। फिर यह आगे चलकर उनके व्यवहार का हिस्सा बन जायेगा। बच्चों में आपसी मतभेद में पैदा हो जाएंगे। गलत-सही का फर्क अक्सर देखा गया है कि घर के बड़े खुद छोटी-छोटी बातों पर जाने-अनजाने झूठ बोल देते हैं या बच्चों से झूठ कहलवा देते हैं। जैसे—कह दो कि पापा घर पर नहीं हैं या-कह दो कि मम्मी अभी बहुत व्यस्त हैं..। झूठ बोलने से न केवल आपकी इमेज बिगड़ती है बल्कि यह झूठ बच्चों के मन पर गलत प्रभाव डालता है। बच्चा भी सोचता है कि छोटे-मोटे झूठ से कहीं कुछ फर्क नहीं पड़ता! जब मेरे मां-बाप ऐसा कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं! और वह सबसे पहले इस तरह का कोई छोटा झूठ आपसे ही बोलेगा। बच्चों के सामने झूठ बोलना या उनसे झूठ बुलवाना, बच्चों में गलत शिष्टाचार की नींव डालता है। संयम और आत्मविश्वास जीवन में सुख-दुख आते-जाते रहते हैं। हालातों का सामना करें। कठिनाइयों में आपका संयम और आत्मविश्वास परिस्थितियों से लड़ने, उनसे पार पाने की सीख देता है। बच्चों में भी संयम की नींव डालें। मदद करना अपने मन को जिस तरह हमने करना सीखा, ठीक उसी तरह अपने बच्चों को समझाएं कि दूसरे की मदद तारीफ के लिए नहीं बल्कि सही मायनो में उसकी सहायता के लिए करें। जज़्बातों की भी कद्र करना ज़रूरी है। आदर करें जब हम स्वयं अपने बड़ों का आदर करेंगे, बराबर वालों को मान देंगे और छोटों से प्यार से बोलेंगे तो सामने वाला भी हमें अपना आदर्श मान वैसा ही व्यवहार करेगा। बच्चों में यह खूबी उनकी अच्छी परवरिश और संस्कारी होने का भी परिचय देती है। ईमानदारी की आदत बच्चों में बचपन से डालें।

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