सीएम अमरेंद्र को क्लीन चिट

लुधियाना में बुधवार को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह मीडिया से बातचीत करते हुए। -अश्विनी धीमान

वीरेन्द्र प्रमोद/निस लुधियाना, 27 नवंबर सेशन जज गुरवीर सिंह की अदालत ने आज करोड़ों के कथित लुधियाना सिटी सेंटर घोटाले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह सहित सभी 31 आरोपियों को बरी कर दिया है। आरोपियों में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह के अलावा उनका बेटा रणइंदर सिंह और दामाद रमिंदर सिंह भी शामिल थे। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार का यह मामला काफी देर से लंबित था। इससे पहले वे अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट मामले में भी बरी हो चुके हैं। अदालत परिसर से बाहर निकल कर मुख्यमंत्री अमरेंद्र ने कहा, ‘हम पर लगाए गए सभी आरोप खारिज कर दिए गए हैं।' उन्होंने कहा कि हमें पहले ही दिन से पता था कि यह झूठा मामला है। उल्लेखनीय है कि 2007 में विजिलेंस ब्यूरो ने मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह समेत 36 आरोपियों के विरुद्ध लुधियाना सिटी सेंटर मामले में दिल्ली की एक फर्म को गलत ढंग से लाभ पहुंचाने के आरोप में केस दर्ज किया था। इस प्रोजेक्ट को कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने 2002 में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान 2003 में लांच किया था। मीडिया में प्रोजेक्ट में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगने के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने 19 सितंबर 2006 को विजिलेंस ब्यूरो को इसकी जांच सौंप दी। उसके बाद 2007 के चुनाव में कांग्रेस हार गई और अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के समय में विजिलेंस ब्यूरो ने कैप्टन अमरेंद्र सिंह और 35 अन्य के विरुद्ध कई धाराओं के तहत एक मामला दर्ज किया। 36 आरोपियों में से पांच की मृत्यु हो चुकी है जिनमें लुुुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के तत्कालीन चेयरमैन रिटायर्ड विंग कमांडर परमजीत सिंह सीबिया भी शामिल थे। रोचक बात ये है कि 12 साल मुकदमा चलने के बाद भी किसी आरोपी के विरुद्ध चार्जशीट तक दाखिल नहीं हुई और न ही किसी पर कोई आरोप तय हुए। विजिलेंस ब्यूरो ने अपनी क्लॉजर रिपोर्ट में कहा कि सारे मामले की पुलिस जांच के दौरान पाया गया कि न तो यह भ्रष्टाचार का मामला है, न ही किसी को रिश्वत देने का और न ही कहीं कोई अनियमितता हुई है। सेशन जज ने इसे स्वीकार करते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। सुमेध सैनी व बैंस ने दी थी चुनौती : पंजाब पुलिस के पूर्व महानिदेशक सुमेध सिंह सैनी, तत्कालीन विजिलेंस ब्यूरो लुुुधियाना के एसएसपी कंवलजीत सिंह संधू, विधायक सिमरजीत सिंह बैंस और एक अन्य सुनील कुमार डे ने क्लॉज़र रिपोर्ट को चुनौती दी थी लेकिन अदालत नें उसे ये कहकर रद्द कर दिया कि उनमें से किसी का इस मामले से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कुछ लेना-देना नहीं। इस बीच लोक इंसाफ पार्टी के प्रधान एवं विधायक सिमरजीत बैंस ने घोषणा की वे निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे क्योंकि भ्रष्टाचार के इस मामले को गम्भीरता से लड़ा ही नहीं गया।

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