मंदिर आंदोलन में शामिल लोगों काे मिले ट्रस्ट में स्थान

प्रयागराज, 1 दिसंबर (एजेंसी) जगद‍्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा है कि अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण के लिए गठित होने वाले ट्रस्ट में उन संत-महात्माओं और लोगों को भी स्थान मिलना चाहिए, जो श्री राम मंदिर आंदोलन में शामिल थे। यहां अलोपी बाग स्थित शंकराचार्य आश्रम में रविवार को उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि सुप्रीमकोर्ट के निर्णय से न केवल राम जन्मभूमि का विवाद समाप्त हो गया, बल्कि भगवान राम के पूर्ववर्ती, समकालीन और परवर्ती प्रसंगों में बताए गए स्थानों, घटनाओं और पात्रों के अस्तित्व की भी पुष्टि हो जाती है। शंकराचार्य ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद संस्थाओं द्वारा नियोजित श्री राम मंदिर आंदोलन की सफलता के लिए स्व. अशोक सिंघल के योगदान का उल्लेख किया। पुनर्विचार की मांग करना दोहरा मानदंड : श्रीश्री रविशंकर कोलकाता (एजेंसी) : मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के पुनर्विचार याचिका दायर करने के फैसले को आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने दोहरा मानदंड करार दिया। उन्होंने कहा कि हिंदुओं, मुसलमानों को आगे बढ़ना चाहिए और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए। मध्यस्थता समिति के सदस्य रहे रविशंकर ने कहा कि मामला काफी पहले सुलझा लिया गया होता, यदि एक पक्ष विवादित जगह पर मस्जिद बनाने पर न अड़ा रहता। 99% मुसलमान पुनर्विचार याचिका के पक्ष में : रहमानी लखनऊ (एजेंसी) : ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अनुसार 99 फीसदी मुसलमान चाहते हैं कि बाबरी मस्जिद पर सुप्रीमकोर्ट के फैसले को लेकर पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए। बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने रविवार को कहा कि मुसलमानों को न्‍यायपालिका पर भरोसा है, इसीलिए अयोध्‍या मामले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की जा रही है, मगर बाबरी मस्जिद के फैसले के बाद वह भरोसा ‘कमजोर' हुआ है। टकराव का माहौल बनाने की कोशिश : नकवी नयी दिल्ली (एजेंसी) : केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले में पुनर्विचार याचिका की बात करने वाले लोग 'बिखराव और टकराव का माहौल' पैदा करने की कोशिश में हैं, लेकिन समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या का मुद्दा अब खत्म हो गया है और इसे उलझाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

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