नासा को मिल गया विक्रम का मलबा

वाशिंगटन, 3 दिसंबर (एजेंसी) नासा ने चंद्रमा पर भारत के महत्वाकांक्षी चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का मलबा मिलने का दावा करते हुए उसकी एक तस्वीर साझा की है। विक्रम लैंडर की 7 सितंबर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने की भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की कोशिश नाकाम रही थी और लैंडिंग से कुछ मिनट पहले लैंडर का इसरो से संपर्क टूट गया था। उसके बाद इसको लेकर सबकी रुचि बनी हुई थी। नासा ने अपने ‘लूनर रिकॉनसन्स ऑर्बिटर' (एलआरओ) से ली गई तस्वीर में अंतरिक्ष यान से प्रभावित स्थल को और उस स्थान को दिखाया है जहां मलबा हो सकता है। लैंडर के हिस्से कई किलोमीटर तक लगभग दो दर्जन स्थानों पर बिखरे हुए हैं। नासा ने कहा, ‘भारतीय वैज्ञानिक से यह जानकारी मिलने के बाद, एलआरओसी दल ने पहले की और बाद की तस्वीरें मिला कर इसकी पुष्टि की। पहले की तस्वीरें जब मिलीं थी तब खराब रोशनी के कारण प्रभावित स्थल की आसानी से पहचान नहीं हो पाई थी।' नासा ने कहा कि इसके बाद 14 -15 अक्तूबर और 11 नवंबर को दो तस्वीरें हासिल की गईं। एलआरओसी दल ने इसके आसपास के इलाके में छानबीन की और उसे प्रभावित स्थल (70.8810 डिग्री दक्षिण, 22.7840 डिग्री पूर्व) तथा मलबा मिला। नासा के अनुसार नवंबर में मिली तस्वीर के पिक्सल (0.7 मीटर) और रोशनी (72 डिग्री इंसीडेंस एंगल) सबसे बेहतर थी। भारत का यह अभियान सफल हो जाता तो वह अमेरिका, रूस और चीन के बाद चांद पर पहुंचने वाला चौथा देश बन जाता। कमाल के हैं ये भारतीय वैज्ञानिक शान, खोज में इन्हीं की रही भूमिका भारत के शौकिया अंतरिक्ष वैज्ञानिक षनमुगा सुब्रमण्यम ने चेन्नई स्थित अपनी ‘प्रयोगशाला' में बैठकर चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम के अवशेषों को खोजने में नासा और इसरो दोनों को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के चंद्रमा की परिक्रमा लगाने वाले अंतरिक्ष यान द्वारा भेजे चित्रों की मदद से यह खोज की। नासा ने विक्रम लैंडर के चंद्रमा की सतह से टकराने वाली जगह के चित्र जारी करते हुए माना कि इस जगह का पता लगाने में सु्ब्रमण्यम की खास भूमिका रही है। सुब्रमण्यम मैकेनिकल इंजीनियर और एप डेवलपर हैं। अपनेआप में अनूठे सुब्रमण्यम को उनके परिजन और दोस्त 'शान' कहकर बुलाते हैं। उन्होंने बहुत कम साधनों की मदद से यह कारनामा कर दिखाया। मंदिरों के शहर मदुरै के इस निवासी ने कहा कि विक्रम के गिरने की जगह का पता लगाने के लिए उन्होंने दो लैपटॉप का इस्तेमाल किया। इसकी मदद से उन्होंने उपग्रह द्वारा भेजी गई पहले और बाद की तस्वीरों का मिलान किया। वह हर दिन एक शीर्ष आईटी फर्म में काम करने के बाद लौटने पर रात 10 बजे से दो बजे तक और फिर ऑफिस जाने से पहले सुबह आठ बजे से 10 बजे तक आंकड़ों का विश्लेषण करते। उन्होंने करीब दो महीने तक इस तरह आंकड़ों का विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि नासा को ईमेल भेजने से पहले उन्हें पूरा भरोसा था कि उन्होंने पूरा विश्लेषण कर लिया है। यह पूछने पर कि उन्हें यह विश्लेषण करने के लिए किसने प्रेरित किया, उन्होंने कहा कि वह स्कूली शिक्षा पूरी होने के बाद से ही इसरो के उपग्रह प्रक्षेपण को बेहद ध्यान से देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके परिवार का कोई भी व्यक्ति अंतरिक्ष विज्ञान से नहीं जुड़ा है। उन्होंने बताया, 'मुझे इसरो के पूर्व शीर्ष वैज्ञानिक एम अन्नादुरै ने एक तारीफ भरा संदेश भेजा। साथ ही उनके कार्यालय ने भी उनकी उपलब्धि की प्रशंसा की है। यह पूछने पर कि क्या वह अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जाना चाहेंगे, उन्होंने कहा कि वह अपने काम के बाद अपने इस शौक को जारी रखना चाहेंगे।

पाकिस्तानी मंत्री बोले-गैर जिम्मेदाराना है भारतीय अंतरिक्ष अभियान इस्लामाबाद : पाकिस्तान के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी को भारतीय अंतरिक्ष अभियान 'गैर-जिम्मेदाराना' लगता है। चौधरी को बड़बोलेपन के लिए जाना जाता है और माना जाता है कि वह प्रधानमंत्री इमरान खान के खास हैं। चौधरी ने ट्वीट किया, 'भारत अंतरिक्ष मलबे का एक बड़ा स्रोत बनता जा रहा है, भारत का गैर जिम्मेदार अंतरिक्ष मिशन पूरे पारिस्थितिक तंत्र के लिए खतरनाक हैं, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को इस पर गंभीरता के साथ ध्यान देने की जरूरत है।'

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