देशभर में लागू होगा एनआरसी

संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान बुधवार को राज्यसभा में बोलते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह। - प्रेट्र

ट्रिब्यून न्यूज सर्विस नयी दिल्ली, 20 नवंबर मोदी सरकार असम की तर्ज पर अब देशभर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करेगी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि एनआरसी के आधार पर नागरिकता की पहचान सुनिश्चित की जाएगी और इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा। शाह ने साफ कर दिया कि देश के सभी नागरिक चाहे वे किसी भी धर्म के हों, एनआरसी सूची में शामिल होंगे। शाह ने नागरिकता संशोधन बिल को फिर लाने का भी ऐलान किया। उन्होंने कहा कि एनआरसी और नागरिकता संशोधन बिल, दोनों ही अलग-अलग मामले हैं। अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने और अयोध्या में राम मंदिर को लेकर सुप्रीमकोर्ट का फैसला आ जाने के बाद एनआरसी लागू करना मोदी सरकार का बड़ा कदम होगा। गृहमंत्री शाह ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि असम में गैरकानूनी तरीके से आये शरणार्थियों की समस्या से निपटने के लिये सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर एनआरसी लागू किया गया है। अब एनआरसी को पूरे देश में लागू किया जाएगा। उन्होंने सासंदों से कहा कि एनआरसी में धर्म विशेष के आधार पर भेदभाव नहीं होगा। क्योंकि, इसमें धार्मिक आधार पर नागरिकों की पहचान का कोई प्रावधान नहीं है। शाह ने कहा, सरकार चाहती है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ना के शिकार होकर भारत आये हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन पारसी और ईसाई धर्म के शरणार्थियों को नागरिकता दी जाये। इसके लिए कानून में संशोधन किया जाएगा। अपने राज्य में इजाजत नहीं दूंगी : ममता मुर्शिदाबाद (एजेंसी) : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वह राज्य में कभी नागरिक पंजी तैयार करने की इजाजत नहीं देंगी। ममता ने मुर्शिदाबाद में एक जनसभा में कहा, ‘कुछ लोग एनआरसी के नाम पर अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। ... कोई आपकी नागरिकता छीनकर आपको शरणार्थी नहीं बना सकता है। धर्म के आधार पर कोई बंटवारा नहीं होगा।' 'जम्मू-कश्मीर में हालात पूरी तरह सामान्य' नयी दिल्ली (एजेंसी) : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद वहां के हालात पूरी तरह सामान्य हैं। उन्होंने कहा कि 5 अगस्त के बाद से जम्मू-कश्मीर में अब तक पुलिस की गोलीबारी में एक भी स्थानीय नागरिक की जान नहीं गई है और राज्य के सिर्फ कुछ पुलिस थाना क्षेत्रों में रात 8 बजे से सुबह 6 बजे तक धारा 144 लागू है। शाह ने कहा कि 5 अगस्त के बाद से जम्मू-कश्मीर में पथराव की घटनाएं भी कम हुई हैं। साल 2018 में पथराव की 802 घटनाएं हुईं थी, जबकि 2019 में 544 घटनाएं दर्ज की गयीं। इंटरनेट सेवा बंद होने के कारण छात्रों को हो रही परेशानी के बारे में सदन में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद की चिंता पर सहमति जताते हुए शाह ने कहा कि पूरे देश में 1997 में मोबाइल फोन सेवा शुरू होने के बावजूद जम्मू-कश्मीर में मोबाइल फोन सेवा की 2003 में और इंटरनेट सेवा की 2002 में केंद्र की एनडीए सरकार ने अनुमति दी थी। उन्होंने कहा कि राज्य में सुरक्षा और आतंकवाद के कारण यह प्राथमिकता के आधार पर तय करना होगा कि ये सेवाएं कब शुरू की जायें। उन्होंने आंकड़ों के हवाले से बताया कि राज्य में स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन सहित सभी जरूरी नागरिक सेवाएं बहाल हो चुकी हैं। शाह द्वारा पेश आंकड़ों पर आजाद ने शंका व्यक्त करते हुए कहा, ‘लगता है किसी अन्य राज्य की रिपोर्ट गृह मंत्री के हाथों में आ गयी है।' इस पर शाह ने कहा कि अगर सदस्य चाहें तो वह सदन में जम्मू-कश्मीर के हालात पर चर्चा के लिये भी तैयार हैं। सभापति नायडू ने कहा कि इस विषय पर अलग से जल्द चर्चा करायी जाएगी।

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