कोरोना के दौर में बुद्ध का संदेश प्रकाशस्तंभ जैसा : कोविंद

नयी दिल्ली, 4 जुलाई (एजेंसी) राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि ऐसे वक्त में जब कोरोना वायरस वैश्विक महामारी दुनियाभर में इनसानों और अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचा रही है तो खुशी पाने के लिए घृणा और हिंसा जैसे दोषों का त्याग करने का भगवान बुद्ध का संदेश एक प्रकाशस्तंभ की तरह है। उन्होंने राष्ट्रपति भवन में अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ द्वारा आयोजित एक डिजिटल कार्यक्रम में कहा, ‘हम सभी जानते हैं कि जब कोरोना वायरस की उग्रता कम होगी तो हमारे सामने इससे कहीं अधिक गंभीर जलवायु परिवर्तन की चुनौती होगी।' कोविंद ने कहा कि दुनिया परेशानियों से घिरी दिखाई देती है। उन्होंने कहा, ‘राजाओं और धनी लोगों के तनावग्रस्त होने की कई कहानियां हैं, जिन्होंने जीवन की क्रूरताओं से बचने के लिए बुद्ध की शरण ली।' राष्ट्रपति ने कहा कि बुद्ध का जीवन पहले की धारणाओं को चुनौती देता है, क्योंकि वह इस दोषपूर्ण दुनिया के बीच पीड़ा से मुक्ति पाने में विश्वास करते थे। कोविंद ने कहा, ‘आज जब महामारी ने दुनियाभर में इनसानों और अर्थव्यवस्थाओं को उजाड़ दिया है तो बुद्ध का संदेश एक प्रकाशस्तंभ की तरह है। उन्होंने खुशी पाने के लिए लोगों को लालच, नफरत, हिंसा, ईर्ष्या तथा कई अन्य दोष खत्म करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भारत को ‘धम्म'की उत्पत्ति की भूमि होने पर गर्व है। राष्ट्रपति ने ‘धम्म चक्र' दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कहा, ‘भारत में हम बौद्ध धर्म को परम सत्य की नवीन अभिव्यक्ति के रूप में देखते हैं।'

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