आदिवासियों को लेकर पूर्वोत्तर के नेताओं ने जताई चिंता

नयी दिल्ली, 30 नवंबर (एजेंसी) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को असम, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय के राजनीतिक दलों, छात्र निकायों और नागरिक समाज समूहों के नेताओं के साथ प्रस्तावित नागरिकता संशोधन (सीएबी) विधेयक की रूप-रेखा पर चर्चा की। ज्यादातर क्षेत्रीय दलों और नागरिक समाज समूहों ने इस बात पर चिंता जताई कि सीएबी से आदिवासी प्रभावित हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, ऐसा पता चला है कि गृह मंत्री ने उन्हें संकेत दिया कि आंतरिक रेखा परमिट (आईएलपी) व्यवस्था द्वारा संरक्षित आदिवासी क्षेत्र और संविधान की छठी अनुसूची के तहत प्रशासित क्षेत्र सीएबी से प्रभावित नहीं होंगे। सूत्रों ने बताया कि इन क्षेत्रों को प्रस्तावित विधेयक के दायरे से छूट दी जा सकती है। बैठक में असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघायल के मुख्यमंत्री क्रमश: सर्बानंद सोनोवाल, पेमा खांडू और कोनराड संगमा, केंद्रीय मंत्री किरण रिजीजू और विभिन्न सांसदों ने शिरकत की। गौर हो कि नागरिकता अधिनियम 1955 में प्रस्तावित संशोधन पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के हिन्दुओं, सिखों, बौद्ध, जैन, पारसियों और ईसाइयों को भारत की नागरिकता देने की बात कहता है, भले ही उनके पास उचित दस्तावेज न हों। पूर्वोत्तर राज्यों में इसका विरोध हो रहा है। गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर शुक्रवार को भी बैठक की थी।

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