अवैध तरीके से बेच डाली करोड़ों की दारू

चंडीगढ़, 25 नवंबर (ट्रिन्यू) हरियाणा के आबकारी एवं कराधान विभाग में अवैध तरीके से करोड़ों की शराब बेचने का मामला सामने आया है। शराब की बड़ी होलसेल कंपनियों द्वारा फर्जी बिलिंग और स्टॉक में की जा रही इस धांधली का पर्दाफाश फतेहाबाद में हुई छापेमारी से हुआ है। डिप्टी सीएम दुष्यंत सिंह चौटाला के निर्देशों पर यह कार्यवाही हुई। आबकारी एवं कराधान विभाग दुष्यंत के ही अधीन है। खट्टर सरकार के पहले कार्यकाल में सबसे हेवीवेट मंत्री रहे कैप्टन अभिमन्यु के पास यह मंत्रालय था। दुष्यंत के पास कई जिलों से शराब बिक्री में घोटाला होने की शिकायतें पहुंची थीं। इन शिकायतों पर एक साथ एक्शन करने की बजाय एक जिले से शुरुआत करने का फैसला लिया गया। दुष्यंत के आदेशों पर विभाग के आला अफसरों से हिसार के डीईटीसी समीर यादव को फतेहाबाद में शराब कंपनियों के स्टॉक की फिजिकल वेरीफिकेशन के निर्देश दिये। यादव ने अलग-अलग अधिकारियों के नेतृत्व में पांच टीमों का गठन करके फतेहाबाद भेजा। फतेहाबाद डीईटीसी वीके शास्त्री को इसकी भनक तक नहीं लगी। हिसार की टीमें जब छापा मारकर रिकार्ड अपने कब्जे में ले चुकी तो अधिकारियों को इसका पता लगा। शराब की बिक्री में सबसे छोटे जिले फतेहाबाद में मिली धांधली के बाद अब अन्य जिलों में भी स्टॉक की फिजिकल वेरीफिकेशन करवायी जा सकती है। अकेले फतेहाबाद में 4 लाख से अधिक शराब की बोतलें अवैध तरीके से बेचने का पर्दाफाश हुआ है। इसमें देशी के अलावा विदेशी शराब का भी बड़ा स्टॉक शामिल है। हालांकि अभी शराब की कुल लागत का पता नहीं लगाया जा सका है, लेकिन पंचकूला मुख्यालय तक पहुंची रिपोर्ट के बाद अब शराब की वेल्यू का आकलन होगा। अनुमान है कि अकेले फतेहाबाद में ही कई करोड़ के राजस्व की चोरी शराब कंपनियों ने अवैध तरीके से की है। फतेहाबाद में दो एल-वन और तीन एल-13 का स्टॉक खंगाला गया। पांचों कंपनियों के खिलाफ मुख्यालय से जुर्माने के नोटिस जारी होंगे। इस तरह दिया घोटाले को अंजाम शराब की इन बड़ी कंपनियों ने कागजों में तो करोड़ों रुपये की शराब अपने स्टॉक में दिखाई हुई थी। जब स्टॉक को खंगाला गया तो पांचों कंपनियों के गोदाम में 4 लाख 8 हजार से अधिक बोतल यानी करीब 14 हजार शराब की पेटियां कम मिली। यानी यह शराब अवैध तरीकों से बेच दी गई। नियमों के अनुसार, बिना परमिट के गोदाम से शराब रिलीज नहीं हो सकती। जानिये क्या है एल-वन और एल-13 दरअसल, एल-वन के अंतर्गत अंग्रेजी शराब का स्टॉक आता है, जबकि एल-13 में देसी शराब आती है। एल-वन में सभी प्रकार की अंग्रेजी शराब की कंपनियां शामिल होती हैं। वहीं एल-13 में जगाधरी नंबर-1, माल्टा, संतरा, रोज, मालवा जैसी देसी शराब आती हैं।

"मुझे इस बात का तो पता लगा है कि किसी दूसरे जिले की टीम ने फतेहाबाद में छापेमारी कर स्टॉक की चैकिंग की है लेकिन क्या अनियमितता मिली, इसकी जानकारी नहीं है। इससे अधिक मेरे पास कोई सूचना नहीं है। इसलिए मैं इस पूरे घटनाक्रम पर इससे ज्यादा कुछ नहीं बोल सकता। स्वाभाविक सी बात है कि शिकायत के बाद ही जांच हुई होगी। -वीके शास्त्री, डीईटीसी फतेहाबाद

"मुख्यालय के निर्देशों के बाद फतेहाबाद में पांच कंपनियों का स्टॉक चैक किया। करीब 14 हजार पेटियां स्टॉक में कम मिली हैं। इनकी बिलिंग थी, लेकिन गोदाम में माल नहीं था। यानी अवैध तरीके से शराब बेची गई। पंजाब एक्साइज एक्ट-1914 के तहत ब्रीच केस बनाकर मुख्यालय भेजा गया है। अब अगली कार्यवाही आबकारी आयुक्त मुख्यालय से होगी। -समीर यादव, डीईटीसी हिसार

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