विकास कार्यों के लिए निगम के पास नहीं है धन

चंडीगढ़, 29 जून (ट्रिन्यू)

चंडीगढ़ नगर निगम में सोमवार को सदन की जारी वर्चुअल मीटिंग में मौजूद आयुक्त व मेयर। -प्रदीप तिवारी

यूटी नगर निगम के आयुक्त केके यादव ने सोमवार को कहा कि निगम के पास समर्पित कार्यों के लिए बजट के अलावा रखरखाव और विकास कार्यों के लिए कोई पैसा नहीं है। यहां तक कि 121 करोड़ के स्वीकृत काम भी अटके पड़े हैं। निगम सदन की वीडियो कानफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई आज की बैठक में उन्होंने कहा कि निगम के पास 597 करोड़ चालू वित्त वर्ष के लिए है व उसमें से 581 करोड़ की तो देनदारियां ही हैं। विकास और रखरखाव पर अकेले पैसा खर्च करें तो भी निगम को 16 करोड़ रुपये का घाटा है। निगमायुक्त ने कहा कि निगम को वेतनमानों पर 402 करोड़ रुपये, पेंशन पर 50 करोड़ रुपये, बिजली की लागत पर 120 करोड़ रुपये और दो पेट्रोल पंप चलाने पर 25 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। कुल 597 करोड़ रुपये का यह खर्च है। उनका कहना था कि निगम के पास जो 581 करोड़ रुपये हैं उसमें से अनुदान और स्वयं के स्रोतों से होने वाली आय भी शामिल है। निगम ने चालू वित्त वर्ष में खुद के स्रोतों से 321.51 करोड़ रुपये की कमाई का अनुमान लगाया था, लेकिन कोविड के बाद अब यह प्रभावी रूप घटकर 241 करोड़ रुपये हो गया है। इस स्थिति से उबरने को विचार करना चाहिए।

कांग्रेस और भाजपा के पार्षदों में नोकझाेंक कांग्रेस पार्षद देविंदर बबला ने कहा ने कहा कि भाजपा निगम को चलाने में विफल रही है। महापौर को इस्तीफा देना चाहिए और निगम भंग कर देना चाहिए। इस पर भाजपा अध्यक्ष और पार्षद अरुण सूद ने कहा कि 15 साल के कांग्रेस शासन में निगम को खाली कर दिया गया था और कोई राजस्व नहीं लाया गया था।

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