फिजियोथेरेपी कोर्स अब पत्राचार से नहीं

चंडीगढ़, 23 जून (ट्रिन्यू)। अब देश का कोई भी विश्वविद्यालय या संस्थान फिजियोथेरेपी का कोर्स पत्राचार के माध्यम से नहीं चला सकेगा। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन की ओर से देशभर के सभी विश्वविद्यालयों को इस संबंध में हाल ही में एक फरमान जारी किया गया है। यूजीसी के डिप्टी सचिव वीके जायसवाल की ओर से भेजी गई चिट्ठी में कहा गया है कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी को कई माध्यमों से यह जानकारी मिली थी कि देश के कई विश्वविद्यालय पत्राचार के माध्यम से फिजियोथेरेपी का डिप्लोमा (अंडर ग्रेजुएट) और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स आदि चला रहे हैं, जो एकदम अनुचित है क्योंकि  फिजियोथेरेपी प्रेक्टिकल टीचिंग पर आधारित कोर्स है, ऐसे में पत्राचार के तहत इस कोर्स को किसी भी सूरत में मान्यता नहीं दी जा सकती है। इसी तरह और भी प्रोफेशनल कोर्स हैं, जिन्हें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग की जरूरत होती है, वे कोर्स भी पत्राचार के तहत नहीं चलाए जा सकते। इस आदेश की प्रति इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इगनू) के चेयरमैन को भी भेजी गई है। इगनू विश्व की सबसे बड़ी डिस्टेंस एजुकेशन मोड की यूनिवर्सिटी मानी जाती है। विश्वविद्यालय को भेजे गए पत्र में अदालत में चल रहे मामले का भी उल्लेख किया गया है। इस मामले में अभी दिल्ली हाईकोर्ट में इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट और केंद्र सरकार व अन्य के बीच केस चल रहा है। इस मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के चंडीगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. जोरा सिंह का कहना है कि डिग्री के चक्कर में छात्र विभिन्न संस्थानों के झांसे में आ जाते हैं। विभिन्न प्रदेशों में चलने वाले इस कोर्स के छात्र हमारे क्षेत्र से भी हैं। फिजियोथैरेपी फुल टाइम प्रेक्टिकल टीचिंग है और इस दिशा में यूजीसी ने कठोरता से जो कदम उठाया है, वह प्रशंसनीय है। इससे शिक्षा के स्तर में बढ़ोतरी होगी और फर्जीवाड़े से बचा जा सकेगा।

सब से अधिक पढ़ी गई खबरें